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मुकुंदपुर केस पर टिप्पणी: मंत्री जी को जनता से ज्यादा सितारों की चिंता क्यों

मुकुंदपुर केस पर टिप्पणी: मंत्री जी को जनता से ज्यादा सितारों की चिंता क्यों

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सतना

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Suresh Mishra

Jun 05, 2018

Comment on Mukundpur case: MP minister Rajendra shukla

Comment on Mukundpur case: MP minister Rajendra shukla

फिल्मी हस्तियों की मेहमानवाजी के लिए मंत्री राजेन्द्र शुक्ल के कहने पर रविवार को मुकुुंदपुर व्हाइट टाइगर सफारी को तीन घंटे तक आम पर्यटकों के लिए बंद रखा गया। क्या किसी मंत्री को यह अधिकार है कि अपने मेहमानों के लिए वह जनता को परेशानी में डाले। दो सौ किमी दूर से सफेद बाघ देखने आए परिवार अपने छोटे बच्चों के साथ धूप में घंटों तक पसीना बहाते रहे, लेकिन मंत्री को इसकी तनिक चिंता नहीं थी। हद तो यह रही कि सीसीएफ तक को इस सफारी के बंद करने की जानकारी नहीं दी गई।

मंत्री राजेंद्र शुक्ला मेहमानों की मेजबानी में इतने मशगूल दिखे कि उन्हें घुमाने के लिए गोल्फ कार्ट की ड्राइविंग भी खुद ने की। इस दौरान नियम विरुद्ध सरकारी और निजी वाहन उनकी गाड़ी के पीछे थे। इसमें सेंट्रल जू अथॉरिटी की गाइडलाइन की धज्जियां उड़ा दी गईं। जब मंत्री खुद गाड़ी चला रहे हों तो उन्हें रोकने की हिमाकत भला कौन कर सकता है।

लापरवाही इस कदर थी कि निजी वाहन कोर एरिया में बाघिन से बीस कदम की दूरी तक चले गए। इस मामले में केंद्रीय चिडिय़ाघर प्राधिकरण नोटिस भी दे देगा तो मंत्री का क्या बिगडऩे वाला है। ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, जब मंत्री की गाड़ी अंदर तक गई हो। वे पहले भी काफिले के साथ चिडिय़ाघर में प्रवेश करते रहे हैं, तब भी किसी ने उन्हें नियम बताने का साहस नहीं किया।

सत्ता की हनक में नेताओं को यह समझना होगा कि उन्हें ब्रांडिंग से ज्यादा उस जनता का ध्यान रखना चाहिए, जिन्होंने उन्हें चुनकर यहां तक पहुंचाया है। सवाल है कि जिन लोगों को मेहमान बनाकर घुमाया जा रहा था, उन्होंने भी प्रदेश के लिए क्या किया। अगर ये दौरा सरकारी घोषित कर दिया गया है तो भी जनता का पैसा फिजूल खर्च क्यों हो, उनसे जनता का क्या भला होगा, यह मंत्री को बताना होगा।
मुख्यमंत्री का दायित्व है कि बेलगाम हो चुके मंत्रियों पर लगाम कसें। प्रदेश की सत्ता में बैठे लोग जिस तरह पद का दुरुपयोग कर मनमानी कर रहे हैं, उससे सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
rajiv.jain@in.patrika.com