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MP: शासन ने नहीं बनाए नियम, इस साल नहीं बदलेगी प्रॉपर्टी की कीमत!

असमंजस में पंजीयन विभाग, यथावत रहेगी जमीनों की कलेक्टर गाइड लाइन

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सतना

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Suresh Mishra

Mar 19, 2018

Department of Registration and Stamps Madhya Pradesh news in hindi

Department of Registration and Stamps Madhya Pradesh news in hindi

रमाशंकर शर्मा @ सतना। प्रदेशभर में इस साल प्रॉपर्टी की कीमत नहीं बदलेगी। कीमतों में बदलाव संबंधी नियम शासन द्वारा अभी तक नहीं बनाया जा सका है। इस कारण जमीनों की कलेक्टर गाइडलाइन यथावत रहेगी। दरअसल, पंजीयन विभाग द्वारा इ-पंजीयन व्यवस्था लागू करने के साथ ही स्टाम्प एक्ट की कई धाराओं को विलोपित कर दिया गया था। इसमें एक धारा 47 क भी शामिल थी।

उसके नियमों के आधार पर संपत्तियों की कलेक्टर गाइड लाइन तैयार की जाती थी। अब इस धारा के समाप्त हो जाने से उप जिला मूल्यांकन, जिला व केंद्रीय समितियों का अस्तित्व खत्म हो गया है। ऐसे में बिना नए नियम तय किए अब कलेक्टर गाइड लाइन तैयार नहीं हो सकती है। वहीं अभी तक शासन द्वारा इस संबंध में कोई नया नियम तैयार नहीं किया जा सका है।

कलेक्टर गाइडलाइन तैयार नहीं हो सकी

इस आधार पर इस वर्ष पूरे प्रदेश में कहीं भी जमीनों का मूल्य निर्धारण करने वाली कलेक्टर गाइडलाइन तैयार नहीं हो सकी है। अब जबकि एक पखवाड़ा बचा है, ऐसे में अगर शासन नियम बना भी देता है तो 31 मार्च तक नई गाइडलाइन का तैयार होना मुश्किल माना जा रहा है। ऑफ द रिकॉर्ड अब पंजीयन कार्यालय के अधिकारी यह मान चुके हैं कि इस नए वित्तीय वर्ष में प्रॉपर्टी की कीमतें यथावत रहेंगी।

यह है गाइड लाइन
पंजीयन विभाग द्वारा हर साल वित्तीय वर्ष की शुरुआत के साथ अर्थात एक अप्रेल से संपत्तियों का स्टाम्प शुल्क नए सिरे से निर्धारित किया जाता है। इसके लिए ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में जमीन, प्लॉट, भवन के बाजार मूल्य का निर्धारण किया जाता है। यह प्रक्रिया ३१ मार्च के पहले पूरी कर ली जाती है। यह मूल्य अगले एक वित्तीय वर्ष के लिए मान्य होते हैं। यह कार्य तीन चरणों में होता है। इसमें उप जिला मूल्यांकन समितियां तहसील स्तर से जमीनों और भवनों का बाजार मूल्य तय कर जिला मूल्यांकन समिति को देती हैं। कलेक्टर की अध्यक्षता वाली जिला मूल्यांकन समिति भी अपने स्तर पर दरें तय कर दावे-आपत्ति के निराकरण के बाद मू्ल्य को अंतिम रूप देने केंद्रीय मूल्यांकन समिति को भेज देती है। वहां से दरें अंतिम होने के बाद अंतिम गाइड लाइन तैयार होकर वापस जिले में आती है और एक अप्रेल से अगले 31 मार्च तक यही दरें प्रभावित रहती हैं।

असमंजस की स्थिति
जानकारों का कहना है, धारा 47 क के विलोपित होने के साथ ही गाइड लाइन तैयार करने के नियम ही समाप्त हो गए हैं। गाइड लाइन तैयार करने वाली उप जिला मूल्यांकन समिति, जिला मूल्यांकन समिति और केन्द्रीय समिति का भी अस्तित्व नहीं रह गया है। ऐसे में जब तक समितियों के गठन के नियम और गाइड लाइन तैयार करने के नियम तैयार नहीं होते, तब तक संपत्तियों का मूल्य निर्धारण नहीं किया जा सकता है। ऐसे में संपत्तियों का नया मूल्य निर्धारण करने असमंजस की स्थिति है।

यह थे नियम
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2000 में मप्र बाजार मूल्य मार्गदर्शक सिद्धांत का बनाया जाना और उसका पुनरीक्षण नियम तैयार किया था। इसके तहत प्रक्रिया का निर्धारण करने के लिए समितियों का गठन स्टाम्प एक्ट की धारा 47व पठित धारा 75 के तहत किया गया था। अब जब इस धारा को ही विलोपित कर दिया गया है तो इसके तहत बने नियम भी स्वमेव समाप्त हो गए। नियमों के समाप्त होने के साथ ही गाइड लाइन निर्धारण की प्रक्रिया भी विलोपन के दायरे में आ गई है। शासन की जिम्मेदारी थी कि वह नए नियम बनाए।

31 मार्च को समाप्त हो जाएगा अस्तित्व
जानकारों का कहना है, अगर नए नियम लागू नहीं होते और इसके आधार पर नई गाइड लाइन तैयार नहीं होती है तो नई दरों का निर्धारण नहीं हो पाएगा।31 मार्च को वर्तमान दरें भी निष्प्रभावी हो जाएंगी। ऐसे में संपत्तियों की दरों की वैधानिकता पर भी सवाल खड़े हो जाएंगे।

अभी तक नई गाइड लाइन की प्रक्रिया प्रारंभ नहीं हुई है। नियम बनाने का मामला शासन स्तर का है। अगर वहां से नियम बन कर आते हैं तो आगे की प्रक्रिया की जाएगी।
संध्या सिंह, जिला पंजीयक