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स्मार्ट सिटी सतना की कछुआ चाल पर संचालनालय नाखुश

जवाबदेही तय करने सहित कलेक्टर से मांगी तथ्यात्मक रिपोर्टडीपीआर के अनुसार नहीं जारी हो सके टेंडर और वर्क आर्डर

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सतना. सतना को स्मार्ट सिटी की सौगात मिलने पर जनप्रतिनिधियों ने अपनी खूब वाहवाही लूटी। स्वीकृति मिलने के बाद अब इस दिशा में धरातल पर कितना काम हुआ, यह देखने की किसी को फुरसत नहीं मिली। थोड़ी बहुत हलचल कांग्रेस के नेताओं ने तब दिखाई थी जब नगरीय प्रशासन मंत्री ने स्मार्ट सिटी के काम को लेकर अप्रसन्नता जताई थी और यहां के कामों पर अघोषित रोक लगने की बात सामने आई थी। आज स्थिति यह है कि स्मार्ट सिटी को लेकर न अधिकारी गंभीर नजर आ रहे और न ही नेताओं को फिक्र है। अब जब सरकार स्तर पर स्मार्ट सिटी के कामकाज पर सवाल खड़े हुए तो शासन स्तर से समीक्षा की गई। इसमें पाया गया कि सतना स्मार्ट सिटी को लेकर प्रगति काफी कमजोर है। शासन ने इसे आपत्तिजनक मानते हुए कलेक्टर एवं चेयरमैन स्मार्ट सिटी से न केवल कमजोर प्रगति पर जवाबदेही तय करने को कहा है बल्कि एक सप्ताह के अंदर इस मामले की तथ्यात्मक रिपोर्ट भी तलब की है।
नगरीय प्रशासन के एडिशनल कमिश्नर स्वतंत्र कुमार सिंह ने सतना स्मार्ट सिटी के कामकाज के कमजोर प्रदर्शन पर सवाल उठाते हुए कलेक्टर एवं चेयरमैन सतना स्मार्ट सिटी डेवलपमेंट लिमि. को पत्र लिखा है। उसमें बताया गया कि सतना स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट की समीक्षा में मिला कि स्मार्ट सिटी के लिए तैयार किए गए डीपीआर के अनुरूप टेंडर और वर्क आर्डर जारी करने में न के बराबर प्रगति है। अभी तक सिर्फ एक कान्ट्रेक्ट साइन किया गया है वह भी जून 2019 में। कलेक्टर को बताया गया कि सतना स्मार्ट सिटी के बैंक अकाउंट में आज की तारीख में 80 करोड़ रुपए उपलब्ध हैं, जिसमें से सिर्फ 11.07 करोड़ रुपए ही खर्च किए गए हैं। खर्च की गई राशि को देखा जाए तो 7 करोड़ रुपए अनुबंध निष्पादन के रूप में खर्च हुए हैं जो अन्य स्मार्ट सिटी के साझे में हैं। 4 करोड़ रुपए कंपनी के संविधान और प्रशासनिक व स्थापना व्यय में खर्च हो गए।

परीक्षण कर मांगी रिपोर्ट

शासन ने कलेक्टर से कहा कि मामले का परीक्षण करें कि आखिर वो कौन से कारण हैं जिसकी वजह से डीपीआर के अनुसार टेंडर और वर्क आर्डर जारी नहीं हो सके? कहा कि इस कमजोर प्रदर्शन के लिए जिम्मेदारी भी तय करें कि स्मार्ट सिटी में काम शुरू न होने के लिये कौन जिम्मेदार है? इसके साथ ही कलेक्टर से इस पूरे मामले का तथ्यात्मक प्रतिवेदन भी एक सप्ताह में भेजने कहा गया है।
अढ़ायच के बाद थम गई रफ्तार
निगमायुक्त प्रवीण सिंह अढ़ायच के कार्यकाल में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट को लेकर तेजी से प्रक्रिया प्रारंभ की गई थी। लेकिन उनके तबादले के बाद और स्मार्ट सिटी के सीईओ के रूप में सविता प्रधान की नियुक्ति होने के साथ ही इस प्रोजेक्ट में जंग लगती चली गई। हालांकि कलेक्टर ने स्मार्ट सिटी को लेकर वर्तमान मौजूदा शहर में कुछ काम स्वीकृत तो किये लेकिन प्रस्तावित ग्रीन फील्ड स्मार्ट सिटी को लेकर मामला ठंडे बस्ते में ही पड़ा है।