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जेल में फिर कराई गई आरोपियों की पहचान परेड, दो गवाहों ने तीन आरोपियों को पहचाना

चित्रकूट का बहुचर्चित प्रियांश-श्रेयांश हत्याकाण्ड

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District court satna

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सतना. जिले के बहुचर्चित प्रियांश-श्रेयांश का अपहरण के बाद हत्या मामले के तीन आरोपियों की सोमवार दोपहर पहचान परेड करायी गयी। नायब तहसीलदार मझगवां के सामने मामले के दो गवाहों ने तीन मुख्य आरोपियों को पहचाना।

अभियोजन प्रवक्ता फखरुद्दी ने बताया, प्रियांश-श्रेयांश का अपहरण के बाद हत्या करने वाले आरोपियों के खिलाफ पुख्ता सबूत जुटाए जा रहे हैं। जिसके तहत सेंट्रल जेल में तीन आरोपियों की एक बार फिर पदम शुक्ला पिता रामकरण शुक्ला उम्र 25 साल निवासी रघुवीर मंदिर के पास जानकीकुंड थाना नयागांव, आलोक उर्फ लकी तोमर पिता सत्येंद्र सिंह उर्फ मुन्ना उम्र 19 साल निवासी तेंदुरा थाना भिसंडा जिला बांदा उत्तर प्रदेश, राजू द्विवेदी पिता राकेश द्विवेदी उम्र 23 वर्ष निवासी भभुआ थाना मरका जिला बांदा उत्तर प्रदेश शनिवार दोपहर नायब तहसीलदार मझगवां के सामने दो गवाहों से पहचान परेड कराइ गयी। परेड के दौरान दोनों गवाहों ने तीन आरोपियों को पहचाना।

किराए में लिया था रजाई और गद्दे
प्रियांश-श्रेयांश का अपहरण के बाद आरोपियों ने अर्तरा में किराए के मकान पर छिपा कर रखा था। जहां पर आरोपियों के पास बिस्तर नहीं था। पदम शुक्ला और राजू द्विवेदी ने टेंट हाउस से झूठ बोलकर किराए में रजाई और गद्दे लिए थे। टेंट हाउस संचालक ने परेड के दौरान दोनों आरोपियों को पहचाना और बताया कि इन्हीं ने उसके पास से सामग्री किराए पर ली थी।

देखा था फिरौती की रकम उठाते
आरोपियों ने अपहरण के बाद इंटरनेट कॉलिंग के जरिए प्रियांश-श्रेयांश के परिजनों ने फिरौती मांग थी। फिरौती की राशि एक निर्धारित स्थान पर रखने कहा था। परिजनों ने आरोपियों के कहे अनुसार निर्धारित स्थान पर फिरौती की रकम रख दी थी। जब आरोपी लकी तोमर और राजू द्विवेदी पैसा उठा रहे थे तो गाना-बजाना करने वाली टीम के एक सदस्य ने दोनों को देख लिया था। सदस्य ने परेड के दौरान दोनों आरोपियों को पहचाना।

आरोपियों की न्यायिक अभिरक्षा बढ़ी
अभियोजन प्रवक्ता ने बताया, आरोपियो का विशेष न्यायालय में वारंट पेश किया गया। न्यायालय ने सभी आरोपियों को २९ अप्रेल तक की न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया।

२९ के पहले पेश किया जा सकता है चालान
मामले की अन्वेषण की प्रक्रिया अंतिम चरण में है। सूत्रों की मानें तो २९ के पहले न्यायालय में चालान पेश किया जा सकता है।