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MP में फेल्सीफेरम मलेरिया का प्रकोप, अब तक 3 की मौत, 20 पॉजिटिव आने के बाद भी नहीं जागे जिम्मेदार

बांका, लोटनी, पिपरावन, कजरा, बरुआ, टिकरा दो दर्जन से अधिक पॉजिटिव

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falciparum malaria treatment in hindi

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सतना। तीन मौत और दो दर्जन ग्रामीणों के फेल्सीफेरम मलेरिया पॉजिटिव आने के बाद स्वास्थ्य महकमे के जिम्मेदार नींद से जागे हैं। पीडि़तों की संख्या में तेजी से इजाफा होने के बाद भी कीटनाशक का छिड़काव नहीं किया जा रहा है। महज स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित कर जिम्मेदार खानापूर्ति करने में जुटे हुए हैं। लापरवाही का आलम यह है कि संचालनालय से पायरेथ्रम कीटनाशक छिड़काव की अनुमति तक नहीं ली गयी है। मझगवा क्षेत्र में संक्रमण काल आरंभ होने के साथ ही मलेरिया का प्रकोप है।

अगस्त-अक्टूबर 2018 में ही आधा सैकड़ा से अधिक मलेरिया पॉजिटिव सामने आ चुके थे। लेकिन जिम्मेदारों के द्वारा बैक्टरजनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के नाम पर सिर्फ कागजी खानापूर्ति की जाती रही। कीटनाशक छिड़काव तक नहीं किया गया। लापरवाही के चलते बांका गांव में एक बार फिर खतरनाक फेल्सीफेरियम मलेरिया ने पांव पसार लिए हैं। आधा दर्जन गांव में आधा सैकड़ा से अधिक लोग बुखार से पीडि़त हैं।

ग्रामीणों में दहशत का महौल
गांव की सरपंच उमा सिंह की मानें तो बुखार के बाद तीन लोगों निशा पिता राजा भइया, किरण सिंह पति राजेंद्र सिंह और पुष्पेंद्र प्रताप पिता सरमन सिंह की मौत हो चुकी है। आधा दर्जन से अधिक पीडि़तों की हालत गंभीर है। जिन्हें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। औचक मौत और बीमार होने से ग्रामीण डरे हुए हैं।

दो दर्जन फेल्सीफीरम पॉजिटिव

इसके अलावा बुधवार को लगाए गए शिविर में विपिन सिंह, रंजना सिंह, सुदीप सिंह, रुपेंद्र सिंह, रमकली, जयप्रकाश, इंद्रजीत सिंह सभी निवासी लोटनी, नीरज सिंह, बैतलिया, सुनीता, प्रतिमा रवि सिंह निवासी पिपरावन, पंकज सिंह, मदनमोहन, सुमन, गुडिया, चूड़ामणि, रज्ज सिंह, जय प्रकाश फूलवती सहित दो दर्जन फेल्सीफीरम पॉजिटिव पाए गए हैं।

पायरेथ्रम छिड़काव की नहीं ली अनुमति
जिला मलेरिया और स्वास्थ्य महकमे का बैक्टरजनित रोग नियंत्रण अभियान महज स्वास्थ्य परीक्षण शिविर के आयोजन तक सिमट कर रह गया है। अगस्त और सितंबर माह में आधा सैकड़ा से अधिक मलेरिया पीडि़त सामने आने के बाद भी जिला मलेरिया महकमे द्वारा संचालनालय से पायरेथ्रम छिड़काव की स्वीकृति नहीं ली गयी। इसका खमियाजा पीडि़तों को भुगतना पड़ रहा है।