।तकनीकी दखल के बावजूद कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जो लगातार अपनी परंपरा एवं पहचान बनाए हैं। इनमें से एक है
फाइन आर्ट
यानि ललित कला। आमतौर पर लोगों का मानना है कि ललित कला की उपयोगिता खत्म होती जा रही है, जबकि ऐसा नहीं है। आज भी यह क्षेत्र तेजी से विकसित हो रहा है। अच्छी पेंटिंग्स लाखों, करोड़ों में बिक रही हैं। कलाकारों को उसका पूरा फ ायदा भी मिल रहा है। इस तरह अच्छे कलाकार को पैसे तो मिलते ही हैं, बेशुमार शोहरत भी मिलती है।
12वीं के बाद खुलेंगे दरवाजे
फाइन
आर्ट से संबंधित कई तरह के पाठ्यक्रम मौजूद हैं। न्यूनतम योग्यता 12वीं तय की गई है। अधिकांश संस्थान 10वीं के बाद ही कई तरह के डिप्लोमा एवं सर्टिफिकेट कोर्स कराते हैं, पर वह अधिक कारगर नहीं होते। 12वीं के बाद जब छात्र के अंदर कला को समझने का कौशल विकसित होता है तो उसे इस क्षेत्र में कदम रखना चाहिए। बैचलर ऑफ फाइन आर्ट (बीएफए) में एडमिशन 12वीं के बाद मिलता है। यह चार वर्ष का पाठ्यक्रम होता है। बैचलर कोर्स में प्रवेश परीक्षा के बाद दाखिला मिलता है। कई संस्थान मेरिट के आधार पर दाखिला देते हैं। बीएफ ए के बाद मास्टर डिग्री के रूप में 2 वर्षीय मास्टर ऑफ
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आर्ट (एमएफ ए) किया जाता है। यदि मास्टर कोर्स में 50 प्रतिशत अंक हैं तो पीएचडी का रास्ता भी खुल जाता है।
कई तरह के गुण आवश्यक
यह क्षेत्र ऐसा है जो परिश्रम एवं समय मांगता है। अचानक कोई अच्छा कलाकार नहीं बन सकता। इसमें यह देखा जाता है कि छात्र अपनी भावनाओं एवं कल्पनाओं को किस हद तक कैनवास एवं कागज पर उकेर पा रहा है। कल्पनाशील व अपनी सोच से कुछ नया गढऩे का गुण होना आवश्यक है। इसमें महारथ हासिल करने के लिए क्रिएटिव माइंड होना चाहिए। ताकि आप अपने आर्ट में वह रंग भर दें कि लोगों को वह आकर्षित कर सके।
कॉफी लंबा-चौड़ा क्षेत्र है यह
फाइन
आर्ट कोई नया पाठयक्रम नहीं है। लंबे समय से भारत में इसकी उपयोगिता देखी जा रही है। आज-कल इस क्षेत्र में
कॉफी
प्रयोग देखने को मिल रहे हैं, जिसका सकारात्मक
फायदा
इस क्षेत्र में कदम रखने वालों को मिल रहा है। यही कारण है कि इसमें रोजगार की संभावना सदैव बनी रहती है। पाठ्यक्रम के पश्चात कई तरह के विकल्प जैसे पत्र-पत्रिकाओं व विज्ञापन एजेंसियों में विजुअलाइजर, स्कूल-कॉलेज में आर्ट टीचर, बोर्ड डायरेक्टर आदि सामने आते हैं।
कमाई बहुत है इस क्षेत्र में
यदि छात्र नौकरी करना चाहते हैं तो उनके लिए कई विकल्प हैं, जहां उन्हें 10 से 15 हजार की नौकरी आसानी से मिल जाती है। अनुभवी लोग अपने कारोबार के दम पर मोटी रकम वसूल रहे हैं। लेकिन इसके लिए एक लंबे अनुभव एवं बाजार की जरूरत पड़ती है। जैसे-जैसे भारत में आर्ट एग्जिबिशन एवं कला से संबंधित अन्य गैलरी का चलन बढ़ रहा है। वैसे ही कमाई, खासकर खुद का रोजगार करने वाले एवं फ्रीलांसरों की कमाई बढ़ती जा रही है।
आर्थिक रूप से कमजोर छात्र कैसे कर सकते हैं कोर्स
छात्र यदि इसमें भविष्य बनाने के इच्छुक हैं तो उनके सामने धन आड़े नहीं आता। कई प्रमुख राष्ट्रीयकृत बैंक छात्रों को एजुकेशन लोन उपलब्ध कराते हैं। विदेश जाकर पढऩे का सवाल है तो वहां पर कई ऐसी फेलोशिप मिलती है, जो छात्रों का खर्च उठाने में सक्षम हैं।