वर्तमान में सरकार खेती को लाभ का धंधा बनाने के लिए जो योजनाएं चला रही है उनसे सिर्फ उत्पादन बढ़ा है। देश में वस्तुओं के दाम बढ़ते जा रहे हैं, इससे खेती की लागत भी बढ़ रही है। लेकिन, लागत के अनुसार किसानों को उनकी उपज का भाव नहीं मिल रहा। यही वजह है कि अनाज की बंपर पैदावार करने के बाद भी किसानों की हालत खस्ता है। हर साल सैकड़ों क्विंटल उपज बेचने के बाद भी सोसाइटी का कर्ज नहीं चुका पा रहे। कृषि विशेषज्ञों का कहना है, जब तक खेती को उद्योग का दर्जा नहीं मिलेगा और अनाज का मूल्य तय नहीं होगा, किसानों के लिए चलाई जा रही सरकारी योजनाएं फ्लॉप होती रहेंगी।