बता दें कि पिता, केवल एक रिश्ता नहीं है बल्कि संतान की ताकत है। वो सिर्फ ऊंगली पकड़ कर चलना नहीं सिखाते, बल्कि अपना सुख चैन खो कर बच्चों को यथासंभव खुशी दिलाते हैं। वह वे वट वृक्ष हैं जिसके शीतल छांव में पूरा परिवार सुख से रहता है। बचपन से लेकर आत्मनिर्भर तक बनाने की यात्रा में सभी लोगों को अपने पिता का पूरा सहयोग मिलता है। जीवन में पिता की अहमियत कोई उनसे पूछे जिनके सर पर पिता का साया नहीं होता। फादर्स डे पर शहर के युवा पर्वतारोही से पत्रिका टीम ने जीवन में पिता की भूमिका पर बातचीत की तो उन्होंने अपने राय, अनुभव को सुनाया है।