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दमोह में 100 साल पुराने बेल वृक्ष को बचाने के लिए सेन परिवार ने बदला घर का नक्शा

Damoh Inspiring Story:100 वर्ष पुराने बेल वृक्ष को बचाने के लिए परिवार ने मकान की छत में विशेष स्थान छोड़ा, पर्यावरण को बचाने सेन परिवार की अनूठी पहल।

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Damoh

family saves 100 year old bel tree by changing house design

100 Year old Bel Tree: मध्यप्रदेश के दमोह जिले के हटा में रहने वाले एक परिवार ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर ऐसी अनूठी पहल की है जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है। दरअसल इस परिवार ने घर में मौजूद 100 वर्ष पुराने बेल के पेड़ को बचाने के लिए अपने नए बनने वाले मकान का पूरा नक्शा ही बदल दिया। अब पक्का घर भी बन गया है और बेल का वृक्ष भी पहले की ही तरह हरा-भरा है और सुरक्षित खड़ा हुआ है।

हटा नगर के बालाजी वार्ड में रहने वाले राजेश सेन के परिवार ने 100 वर्ष पुराने बेल वृक्ष को बचाने के लिए मकान निर्माण का पूरा स्वरूप बदल दिया। परिवार ने वृक्ष को काटने के बजाय मकान की छत की स्लैब के बीचों बीच से उसे सुरक्षित स्थान देते हुए निर्माण कार्य कराया, जिससे आज भी यह बेल वृक्ष सुरक्षित खड़ा है।

वृक्ष को पूर्वजों की अमूल्य धरोहर मानता है परिवार

राजेश सेन, पत्नी वंदना सेन ने बताया की यह बेल वृक्ष उनके पूर्वजों द्वारा लगाया गया था और यह उनके परिवार की अमूल्य धरोहर है। लगभग चार वर्ष पहले जब नए मकान का निर्माण कराया जा रहा था, तब यह वृक्ष रसोई के बीच में आ रहा था। निर्माण कार्य से जुड़े लोगों ने वृक्ष को हटाने की सलाह दी, लेकिन परिवार ने साफ शब्दों में कहा कि यह पेड़ उनके लिए प्रिय है और इसे किसी भी स्थिति में नहीं काटा जाएगा।

स्लैब में छोड़ा गया था स्थान

राकेश सेन, पत्नी मालती सेन ने बताया कि मकान का निर्माण इस प्रकार किया गया कि बेल वृक्ष को कोई नुकसान न पहुंचे। छत की स्लैब के बीच से वृक्ष के लिए विशेष स्थान छोड़ा गया और उसे पूरी तरह सुरक्षित रखा गया। आज यह वृक्ष घर के बीचों-बीच खड़ा होकर पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति प्रेम का संदेश दे रहा है। परिवार के सभी सदस्य प्रतिदिन सुबह और शाम विधि-विधान से बेल वृक्ष की पूजा अर्चना करते हैं।

पर्यावरण बचाने मिसाल बना परिवार

आज जब विकास के नाम पर बड़ी संख्या में वृक्षों की कटाई हो रही है, ऐसे समय में बालाजी वार्ड का यह परिवार समाज के सामने एक सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है। यह पहल बताती है कि यदि मन में प्रकृति के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता हो, तो विकास और पर्यावरण संरक्षण दोनों को साथ लेकर चला जा सकता है। यह बेल वृक्ष केवल एक पेड़ नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को प्रकृति से प्रेम और पर्यावरण संरक्षण का संदेश देने वाली जीवंत विरासत बन चुका है।