
Fish And Meat Market, Jawahar Nagar, Satna, Madhya Pradesh
सतना। विंध्य की औद्योगिक राजधानी सतना में हर गली-मोहल्ले में मांस की अवैध दुकानें खुल गई है। सच्चाई यह है कि शहर के एक भी मांस विक्रेता के पास लाइसेंस नहीं है। इसके बावजूद व्यवसाय धड़ल्ले से जारी है। रहवासी क्षेत्रों में पशुओं के कत्लगाह खुले होने से लोगों का जीना दूभर हो रहा है। लेकिन, कोई सुनवाई नहीं हो रही। शहर के रहवासी क्षेत्र में गली कूचों में खुली अवैध मांस दुकानों को हटाने के लिए निगम द्वारा नजीराबाद में 30 लाख की लागत से मीट मार्केट का निर्माण कराया था।
लेकिन, निगम प्रशासन की मांस कारोबारियों पर मेहरबानी के चलते सात साल बाद भी शहर का अवैध मांस बाजार वहां शिफ्ट नहीं हो पाया। आलम यह है कि 30 लाख के मीट मार्केट में ताला लटक रहा है। मांस दुकानें आज भी सड़क पर सज रही हैं।
परिषद के प्रस्ताव कूड़ेदान में
नजीराबाद में मीट मार्केट बनने के बाद शहर में सड़क किनारे खुलीं मांस दुकानों को मीट मार्केट में शिफ्ट करने परिषद में तीन बार प्रस्ताव पास हो चुका है। मीट मार्केट की दुकानों को आवंटित करने बार-बार टेंडर जारी होने के बाद भी मीट दुकानदार इन्हें लेने आगे नहीं आ रहे। मामले को गंभीरता से लेते हुए परिषद सदस्यों ने प्रस्ताव पास किया था कि जो मीट कारोबारी मछली बाजार में दुकान न ले और बाजार में औध रूप से मांस का कारोबार करे, उस पर 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाए। लेकिन, तीन बार प्रस्ताव पास होने के बाद भी निगम प्रशासन परिषद के प्रस्ताव पर आज तक अमल नहीं कर पाया।
यहां खुलीं मीट दुकानें
सिंधी कैम्प, ईदगाह चौक भैंसाखाना, राजेंद्र नगर खूंथी, धवारी, टिकुरिया टोला तथा बिरला मार्केट में सड़क किनारे मांस की दुकानें खुली हैं। इनमें धड़ल्ले से पशुवध कर मीट की बिक्री की जा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि किसी भी व्यापारी के पास लाइसेंस नहीं है। इसके बावजूद निगम प्रशासन द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही।
गुमटियों में बेच रहे मटन
राजेंद्र नगर, खूंथी तथा धवारी चौराहे के आसपास गुमटियां रखकर मांस विक्रय किया जा रहा है। मीट व्यापारी पशुवध से निकलने वाला अपशिष्ट भी वहीं फेंक देते हैं। इस अपशिष्ट की गंदगी से स्थानीय रहवासी एवं सड़क से गुजरने वाले लोगोंं का जीना दूभर हो रहा है।
Published on:
27 Dec 2018 02:40 pm
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