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यारा की दोस्ती पर सबकुछ कुर्बान

फ्रेंडशिप डे स्पेशल : दोस्त एक एेसा शब्द है जिसके आगे सारी दुनियां छोटी नजर आती है

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सतना

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Jyoti Gupta

Aug 04, 2019

Friendship Day Special

Friendship Day Special

सतना. दोस्त एक एेसा शब्द है जिसके आगे सारी दुनियां छोटी नजर आती है। यह ऐसा रिश्ता है, जिसमें हम एक साथ कई सारे रिश्ते पाते हैं। एक अच्छा और सच्चा दोस्त हर मुश्किल के वक्त पर पिता की तरह गाइड करता है, तो दिल टूटने पर मां की तरह आगे बढऩे में मदद करता है। भाई की तरह परेशान करने वाले लोगों से बचाता है तो वहीं, बहन की तरह जरुरत के समय यानी डांट पडऩे से बचाता है। कभी एक टीचर या प्रोफेशनल काउंसलर की तरह कॅरियर प्रॉब्लम्स को सॉल्व करने में मदद करता है। इन सब चीजों के बाद भी आपका सच्चा दोस्त आपकी सेहत का भी ख्याल रखता है। आज फ्रेंड्शिप डे है, आइए जानते हैं शहर के कुछ एेसे लोगों के बारे में जो दोस्ती के लिए सब कुछ कुर्बान करने के लिए तैयार रहते हैं।

40 साल की दोस्ती आज भी सुरक्षित

गल्ला व्यवसायी 68 वर्षीय लखन केशरवानी और जगदीश गुप्ता की दोस्ती जगजाहिर है। ये बचपन वाले दोस्त नहीं हैं बल्कि प्रतिस्पर्धी वाले दोस्त हैं। लखन बताते हैं कि आज से 40 साल पहले जब उन्होंने गल्ला का काम शुरू किया था तभी दोनों की मुलाकात मंडी में हुई। दोनों की दुकान अगल-बगल रही। दोनों के बीच में कड़ी स्पर्धा भी रही बिजनेस बढ़ाने की। कई बार झगड़े भी हुए । पर एक दिन दोनों ने आपस में सुलह करने की ठानी और आपस में बातचीत भी की। दोनों को लगा कि विचार और सोच एक जैसे हैं। इससे एक-दूसरे से नजदीकियां भी बढऩे लगी। महज दो साल में दोनों की अच्छी दोस्ती हो गई। अब दोनों एक दूसरे के विपरीत परिस्थितियों में साथ तो देते हैं । साथ ही घर के मांगलिक और पारिवारिक कार्यों में भी दखल रखते हैं। दोनों ने एक-दूसरे की बेटियों की शादियों में हेल्प की।

मिले, बिछड़े फिर मिले और साथ में कर लिया व्यवसाय

शहर के 27 वर्षीय विकास पांडेय और 28 वर्षीय विनीत दोनों पक्के वाले दोस्त हैं। विकास कहते हैं कि विनीत उनका चाइल्डहुड दोस्त है। एक से आठवीं तक दोनों ने साथ में पढ़ा। शैतानी की। एक-दूसरों को पीटने से बचाया। फिर कक्षा आठवीं के बाद दोनों अलग हो गए। विकास रीवा जाकर पढ़ाई करने लगे और विनीत सतना में। हम दोनों एक-दूसरे से बराबर मिलते रहे। यही नहीं कॅरियर और बिजनेस को लेकर आपस में डिस्कशन भी करते रहे। विनीत के कहने पर पांच साल पहले मैं जॉब छोड़कर सतना आ गया है। बिरला रोड पर टेडर्स और आटोपाटर््स की शॉप डाल दी। दोनों ने एक साथ नई बस्ती में घर भी बनवाया है। विकास कहते हैं कि इन पांच सालों में कई बार लोगों ने हम दोनों के बीच में मिस अंडरस्टैंडिंग करने की कोशिश की। पर अपनी दोस्ती तो बचपन वाली है एेसे कैसे टूट जाएगी। यारा के लिए तो सबकुछ कुर्बान।

दोनों की शैतानी ने बना दिया एक-दूसरे का बेस्ट फ्रेंड

सतना निवासी मुदित जैन और सोहावल निवासी राही अग्रवाल दोनों के बीच पक्की वाली दोस्ती है। दोनों का प्रोफेशन अलग अलग एक डॉक्टर और एक इंजीनियर फिर दोनों की दोस्ती सभी के लिए मिसाल है। डॉ. मुदित जैन बताते हैं कि दोनों कक्षा पाचवीं में एक-दूसरे मिले। दोनो बहुत शैतान थे। स्कूल के सारे टीचर हम दोनों से परेशान रहते। जब उसकी शिकायत घर में की जाती तो मैं उसे बचाता। जब मेरी शिकायत घर में की जाती तो वो मुझे बचाता। इन शैतानियों की वजह से हम दोनों एक दूसरे के नजदीक आए। स्कूल के बाद दोनों का कॉलेज भी अलग होगा। मैंने डॉक्टर की तैयारी की और उसने इंजीनियर बनने की ठानी। दोनों का सपना भी पूरा हो गया। कॅरियर की राह में यहां तक पहुंचने में हम दोनों ने एक दूसरे का मार्गदर्शन किया। अब वह बेंगलूरु में रहता है और मैं सतना में। हर दिन हम दोनों फोन से एक-दूसरे से बात करते हैं।