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मासूम पर जीबीएस वायरस का अटैक, एयर एम्बुलेंस से ले गए दिल्ली, सतना-जबलपुर के डॉक्टरों ने खड़े किए हाथ

एम्स में नहीं मिली जगह तो सफदरजंग हॉस्पिटल दिल्ली में कराया भर्ती

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gbs virus attack kaise hota hai

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सतना। शहर के लालता चौक निवासी रितेश का पांच वर्षीय बेटा आराध्य सात दिन पहले अचानक जीबीएस वायरस की चपेट में आ गया। पैर से शुरू हुई तकलीफ पूरे शरीर में पहुंच गई। धीरे-धीरे शरीर में अकडऩ आ गई। परिजन आनन-फानन उसे लेकर शहर के शिशु रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचे। उन्होंने मासूम की हालत देख बड़े हॉस्पिटल में इलाज कराने का परामर्श दिया। परिजन जबलपुर ले गए, वहां भी न्यूरोलॉजिस्ट ने हाथ खड़े कर दिए। इसके बाद एयर एम्बुलेंस से दिल्ली लेकर गए।

यहां अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स नई दिल्जी में जगह नहीं मिलने पर सफदरजंग हॉस्पिटल में एडमिट कराया। परिजन सागर गुप्ता ने बताया कि परिवार में तरह हंसी-खुशी का माहौल था। ६ दिसंबर की सुबह आराध्य ने पैर में तकलीफ उसने पिता रितेश को बताई।

देखते ही शरीर में अकडऩ जैसी स्थिति बन गई। हाथ-पैर सहित शरीर के सभी अंगों ने हिलना डुलना बंद कर दिया। माता-पिता सतना में शिशु रोग विशेषज्ञ के पास पहुंचे। उन्होंने बिगड़ती हालत को देख जबलपुर ले जाने की सलाह दी। यहां भी न्यूरोलॉजिस्ट ने जांच के बाद बच्चे की बिगड़ती हालत को देखकर दिल्ली या कहीं और इलाज करने की सलाह दी।

मुश्किल से मिली एयर एम्बुलेंस
जबलपुर में न्यूरोलॉजिस्ट के हाथ खड़े करने के बाद माता-पिता सहित परिजन परेशान होने लगे। एयर एम्बुलेंस से दिल्ली ले जाने की तैयारी की गई पर बच्चे की स्थिति को देखते हुए एयर एम्बुलेंस ने भी स्पष्ट इनकार कर दिया। रीवा विधायक राजेंद्र शुक्ला के हस्तक्षेप के बाद मुश्किल से एयर एम्बुलेंस का प्रबंध हो पाया।

एम्स में नहीं मिली मासूम को जगह
परिजन मासूम को लेकर एम्स दिल्ली पहुंचे, लेकिन शिशु रोग गहन चिकित्सा इकाई फुल थी। ऐसे में प्रबंधन ने आराध्य को दाखिल करने से साफ इंकार कर दिया। परिजनों ने मजबूरी में सफदरजंग हॉस्पिटल दिल्ली में दाखिल कराया। उसे वेंटीलेटर पर रखा गया है। शरीर ने काम करना बंद कर दिया है। केवल आवाज सुन पा रहा है।

1-जीबीएस
गुलियन बैरे सिंड्रोम एक ऐसा विकार है, जो गंदगी के कारण होता है। इसके वायरस मच्छर हो सकते हैं। जीबीएस वायरस का अटैक होने के बाद रोगी के शरीर में सिहरन या दर्द होता है। मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं। इसकी शुरुआत हाथ-पैर से होती है। मस्तिष्क भी इस वजह से शरीर से बहुत कम संवेदी संकेतों को ग्रहण कर पाता है। रोगी को गर्मी, दर्द और दूसरी अनुभूतियां यानी सेंसेशन को महसूस करने की क्षमता प्रभावित हो जाती है।

2-लक्षण
जीबीएस वायरस का अटैक होने पर हथेली और पैर के पंजों में झुनझुनी सी महसूस होती है। धीरे-धीरे यह झुनझुनी बढ़ती जाती है। इसके बाद पैर और हाथ काम करना बंद कर देते हैं। लक्षण पैरों से शुरू होकर ऊपर की ओर जाते हैं। यानी पहले हाथ और फिर उसके बाद अंगुलियों को प्रभावित करते हैं। हाथ-पैर में सुन्नपन, सिहरन अंगुलियों में सुई की चुभन महसूस होना, दर्द होना आदि लक्षण दिखाई देने लगते हैं। रोगी को चलने में भी परेशानी होने लगती है। कारण लकवा भी हो जाता है।