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Flashback 2018: गांव की गलियों से निकलकर ग्लैमर की दुनिया में विंध्य के युवाओं ने जमाई धाक, रंगमंच से रुपहले पर्दे तक किया सफर

कला में कमाल कर रहे विंध्य के ये युवा: गांव की गलियों से निकलकर ग्लैमर की दुनिया तक

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glamor ki duniya me Vindhya ke yuvao ki dhak

glamor ki duniya me Vindhya ke yuvao ki dhak

सतना। कला का क्षेत्र सागर की तरह है। इसमें अनगिनत विषय समाहित हैं। भारतीय परंपरा में कला उन सारी क्रियाओं को कहते हैं जिनमें कौशल अपेक्षित है। यानी कला में कौशल महत्वपूर्ण है। इसी कौशल के दम पर विंध्य के युवा गांव की गलियों से निकलकर रंगमंच के रास्ते होते हुए मायानगरी अपनी धाक जमा रहे हैं। टीवी और फिल्म इंडस्ट्री में ये युवा न केवल अभिनय, बल्कि गायन, संगीत, फिल्म लेखन जैसी कई विधाओं में लोहा मनवाकर प्रसिद्धि और पैसा कमाने के साथ विंध्य का नाम रोशन कर रहे हैं। इनका संघर्ष हर युवा को सफलता के लिए प्रेरित करता है।

ग्लैमर की दुनिया चकाचौंध भरी
ग्लैमर की दुनिया चकाचौंध भरी है, इसमें जाने का सपना अधिकतर युवा देखते हैं। वजह, इस क्षेत्र में नाम, प्रसिद्धि और भरपूर पैसा है। टीवी और फिल्म इंडस्ट्री में प्रवेश पाने के लिए हजारों युवा हर साल मायानगरी मुंबई का रुख करते हैं, पर सफल वे ही होते हैं जो ईमानदारी, मेहनत, लगन और संघर्ष की राह पर चलते हैं। रीवा के सेमरिया तहसील के एक छोटे से गांव चकदही के विवेक त्रिपाठी और विवेक मिश्रा आज इसकी मिसाल बने हुए हैं। दोनों युवा इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने भोपाल गए थे। वहीं से रंगमंच की दुनिया में कदम रखा और अपने शौक व सपने को साकार करने पहुंच गए मायानगरी। आज दोनों छोटे पर्दे से लेकर बड़े पर्दे तक पर धाक जमाए हुए हैं। इसी तरह त्योंथर के हिनौती के ऋषि सिंह सोनी टेलीविजन पर प्रसारित पोरस और कलर्स पर महाकाली में अपनी अदाकारी और कलाकारी का कमाल दिखा रहे हैं। सिरमौर के बड़ोखर हिनौती के विपिन सिंह के संघर्ष की कहानी किसी फिल्म जैसी ही है। वेटर की नौकरी से टीवी सीरियल और अब फिल्मी दुनिया में मुकाम बना रहे हैं। चाकघाट के कुमुद मिश्रा दो दशक से मुंबई में नाम और दाम कमा रहे हैं। रीवा मेडिकल कॉलेज के डीन रहे जीपी द्विवेदी के बेटे अर्जुन द्विवेदी तो डॉक्टरी की पढ़ाई छोड़ मुंबई पहुंच गए। वे अब टीवी के बाद बड़े पर्दे पर भी नजर आने लगे हैं। इन युवाओं का मायानगरी में कोई भी 'गॉड फादर' नहीं था, पर कभी भी अपनी असफलता से घबराये नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर आज सफलता की एक नहीं कहानी रच रहे हैं।

1- विवेक त्रिपाठी
सेमरिया के चकदही केे रामस्नेही के बेटे विवेक त्रिपाठी ने भोपाल से इंजीनिरिंग के बाद फिल्मी दुनिया में कदम रखा। एंड टीवी सीरियल 'बढ़ो बहू' से शुरू सफर आज एक मुकाम पर पहुंच गया है। वे छोटे से लेकर बड़े पर्दे तक पर धाक जमाए हैं। कलर्स पर आने वाले श्रीमद् भागवत सीरियल में शनि देव बने हैं। विवेक वारिस सहित 20 से ज्यादा सीरियलों में काम कर चुके हैं। गालिब मूवी में सिकंदर के रोल में हैं। इसकी शूटिंग जम्मू कश्मीर में हुई। उनकी दूसरी मूवी 'पंडित दीनदयाल एक युग पुरुष' भी जल्द आने वाली है।

एक्टिंग की शुरुआत
विवेक पढ़ाई करने भोपाल गए और वहां पराग थियेटर में तीन साल एक्टिंग का गुर सीखा। 2016 में मुंबई का रुख किया। जहां उनकी भेंट डायरेक्टर धीरज से हुई। लगातार ऑडिशन देने के बाद फिल्म गालिब और पं. दीनदयाल युग पुरुष के लिए चयन हुआ। विवेक कहते हैं कि गांव का हर बच्चा कुछ भी बड़ा कर सकता है। मन से हीन भावना निकाल फेंकिए ओर आत्मविश्वास के साथ लक्ष्य की तरफ बढि़ए सफालता जरूर मिलेगी।

2- ऋषि सिंह
कलर्स और सोनी टीवी के बाद रीवा के ऋषि ने अब फिल्मों की तरफ कदम बढ़ा दिया है। टीवी सीरियल के साथ वे अजीत वर्मा की 'दाखिला' फिल्म में काम कर रहे हैं। ऋषि प्रसिद्ध सीरियल पोरस में सेनापति का रोल निभा रहे हैं वहीं महाकाली के अग्निदेव का किरदार अदाकर दर्शकों को बांधे हुए हैं। रीवा के त्योंथर के छोटे से गांव हिनौती के सुरेश सिंह परिहार के बेटे ऋषि सिंह (22) ने विराट के उमरगांव में अपनी धमक से बड़े-बड़े कलाकारों का ध्यान आकृष्ट किया है।

गांव से निकले
ऋषि की शिक्षा सरस्वती स्कूल हिनौती में हुई। 12वीं गांव की स्कूल से पास करने के बाद इंदौर से बीकॉम ऑनर्स किया। साइन एकेडमी इंदौर में दाखिला लेकर अभिनय के गुर सीखे। बचपन से नाटक में रूचि थी जिससे जल्द दक्ष हो गए। पोरस का ऑडिशन दिया और सफलता मिल गई। ऋषि का कहना है कियुवाओं में बड़ी ऊर्जा है, लेकिन हौसला एवं आत्मविश्वास की कमी से पिछड़ जाते हैं। काम के प्रति ललक है तो आगे बढ़तें जाएं।

3- विवेक मिश्रा
रीवा के चकदही के विवेक मिश्रा भी मायानगरी में नाम कमा रहे हैं। दूरदर्शन के नाटक 'मंदा हर युग' से शुरुआत करने वाले विवेक मूवी 'दीनदयाल एक युग पुरुष' और 'डार्लिंग' में अभिनय कर चुके हैं। टीवी सीरियल क्राइम पेट्रोल, सावधान इंडिया, प्यार तूने क्या किया, चीख, अंजान, निमिकी मुखिया, बारिश सहित 45 एपिसोड में विवेक काम कर चुके हैं। अभी दो फिल्म सितमगर और मोक्ष में भी विवेक को ऑफर हैं।

स्ट्रगल के बिना सक्सेज नहीं
शासकीय हायर सेकंडरी सेमरिया से स्कूल की पढ़ाई और भोपाल से इंजीनियरिंग करने के बाद विवेक रंगमंच से जुड़ गए। तीन साल भोपाल में रंगमंच से जुड़े रहे। बीई पूरी करने के बाद वे कलाकार बनने की चाहत लिए मुंबई पहुंचे। विवेक बताते हैं कि छह महीने स्ट्रगल करने के बाद उनको दूरदर्शन में नाटक मंदा हर युग में काम मिला। जिसमें उन्होंने छह माह काम किया। मंदा हर युग के राइटर धीरज मिश्रा को काम अच्छा लगने पर कई टीवी सीरियल एवं फिल्म मेंं काम का ऑफर मिल गया। वे फेमस कलाकार अनिता राज और इमरान हशमी के साथ काम चुके हैं। विवेक बताते हैं कि काम चाहे वेटर का मिले ईमानदारी से करना चाहिए। मेहनत और लगन से किया गया कार्य आगे की सफलता का आधार बनता है।

4- वेटर की नौकरी से एक्टिंग का सफर
रीवा जिले के सिरमौर तहसील अंतर्गत ग्राम बड़ोखर हिनौती निवासी विपिन सिंह पर एक्टिंग का नशा ऐसा छाया कि 12वीं की पढ़ाई पूरी करने के बाद मुम्बई पहुंच गए। वहां एक होटल में वेटर की नौकरी शुरू कर दी। उसी दौरान उनकी फिल्मी कलाकार देवदीप सिंह दवे झारखण्ड से मुलाकात हुई। उनके प्रयास से 2014 में विपिन ने फिल्मी दुनिया में कदम रखा। उनको पहली बार टीवी सीरियल राधा कृष्णा में कृष्ण के सखा गोरक्षक की भूमिका मिली। कलर्स चैनल पर प्रसारित होने वाले धारावाहिकों में विपिन बेहतर छाप छोड़ रहे हैं।

मेहनत से मिला मुकाम
विपिन बताते हैं, शाहपुर निवासी नाना को छोड़कर परिवार के अन्य लोगों ने इस कदम का विरोध किया। उनका कहना था कि पहले पढ़ाई पूरी करो फिर जाओ। मेरी नजर से कोई काम छोटा-बड़ा नहीं होता। जरूरत है लगन और मेहनत की। हमने तो होटल तक में नौकरी की। अभी क्रॉइम पेट्रोल, सावधान इंडिया, सूर्यपुत्र कर्ण में काम कर चुके हैं। राधा-कृष्णा, सीरियल तंत्र और लाल किला में भी नजर आ रहे हैं।

5- उम्र की मोहताज नहीं सफलता
सदी के महानायक अभिताभ बच्चन के टीवी शो-कौन बनेगा करोड़पति में रीवा के मृदुल निगम ने धमाकेदार उपस्थिति दर्ज कराकर विंध्य को गौरवान्वित कर दिया। मृदुल बताते हैं, शो काफी पसंद था। पढ़ाई और खेल छोड़कर कई-कई बार देखते थे। इससे मन में कौन बनेगा करोड़पति में शामिल होने और अभिताभ बच्चन से मिलने की ललक पैदा हुई। बीसी के किड्स स्पेशल में फास्टर फिंगर में सही जवाब देकर हॉट सीट पर पहुंचे। वहां अमिताभ बच्चन को न सिर्फ चाय बनानी सिखाई बल्कि बिग-बी को फ्रेंडशिप बैंड भी बांधी।

छोटे बड़े में नहीं करें भेदभाव
मृदुल बताते हैं, मां कीर्ति निगम ने रजिस्ट्रेशन कराया। जिस हॉट शीट पर बैठा था उसमें 17 सवालों के जवाब देने थे। हालांकि 10 सवालों का सही जवाब दिया। मुझे स्वयं विश्वास नहीं था कि वे टीवी पर हैं। अभिताभजी ने पूरे परिवार को स्नेह दिया। उनसे यह बड़ी सीख मिलती है कि हम सबको सभी का आदर करना चाहिए, छोटा हो बड़ा। जीवनभर उनसे मिलना और उनको फे्रंडशिप बैंड बांधना हमेशा याद रहेगा।