
Government College participation President in satna Madhya Pradesh
सतना। सतना सहित प्रदेशभर के १५३ महाविद्यालयों में जनभागीदारी अध्यक्ष की नियुक्ति मप्र शासन से की गई है। इसमें सतना के एक दर्जन महाविद्यालय भी शामिल हैं। लेकिन, इस नियुक्ति के साथ नियम टूटने का विवाद भी खड़ा हो गया है। कारण है कि नियमत: उस व्यक्ति को ही जनभागीदारी अध्यक्ष बनाया जा सकता था, जो संबंधित महाविद्यालय को कम से कम एक लाख का दान किया हो। लेकिन, सतना में बनाए गए जनभागीदारी अध्यक्षों में कोई ऐसा नहीं है, जिसने संबंधित संस्थान को दान किया है।
शासन ने नियमों में परिवर्तन
दरअसल, वर्ष २०१० के बाद ही मप्र शासन ने नियमों में परिवर्तन किया था। इसके लिए गजट नोटिफिकेशन भी जारी किया गया था। इसमें अध्यक्ष के लिए योग्यता सहित दान की सीमा तय की थी। नोटिफिकेशन में साफ तौर पर लिखा गया था कि अध्यक्ष की न्यूनतम योग्यता स्नातक होनी चाहिए।
नियम टूटता नजर आ रहा है
साथ ही वह संबंधित कॉलेज को एक लाख का दान किया हो। ऐसे गणमान्य नागरिक को अध्यक्ष बनाया जा सकता है। इसके अलावा चुने हुए जनप्रतिनिधि भी अध्यक्ष बनाए जा सकते हैं। अब हाल ही में जारी सूची पर नजर डालें तो नियम टूटता नजर आ रहा है।
महाविद्यालय में ये बने हैं अध्यक्ष
- शासकीय डिग्री महाविद्यालय सतना नरेंद्र त्रिपाठी।
- शासकीय गर्ल महाविद्यालय कामता पांडेय
- शासकीय महाविद्यालय अमरपाटन रामगोपाल मिश्रा
- शासकीय महा. जैतवारा लक्ष्मीकांत द्विवेदी
- शासकीय पुरुषोत्तम संस्कृत महाविद्यालय खजुरीताल डॉ. पंकज सिंह परिहार
- शासकीय विवेकानंद महा मैहर दिलीप त्रिपाठी
- शास महा नागौद सरोज गुर्जर
- शासकीय महाविद्यालय रामनगर नरेंद्र तिवारी
- शास महा रामपुर बाघेलान विजय नारायण त्रिपाठी
- शास महा मझगवां राजेंद्र प्रसाद उपाध्याय
- शासकीय महाविद्यालय उचेहरा अशोक द्विवेदी
- शासकीय महा. अमदरा कमलेश सुहाने
- शास महा बदेरा रामबली गुप्ता
- शास संगीत महा मैहर रामकृपाल पटेल
अब दूसरा पत्र जारी
अब उच्च शिक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों का दावा है कि जनभागीदारी अध्यक्ष बनाए जाने के पत्र भेजने के अलावा दूसरा पत्र भी जारी किया गया है। इसमें इस बात का जिक्र किया गया है कि नवनियुक्त अध्यक्ष कॉलेज को एक लाख का दान करे। हालांकि ये पत्र नियुक्त किए गए अध्यक्षों व संबंधित कॉलेज के पास नहीं पहुंचा है। इस पत्र के जारी करने के बाद भी नियम टूटता है। क्योंकि, दान नियुक्ति से पहले जारी होना चाहिए।
ये लिखा है नोटिफिकेशन में
समिति के कार्यकलापों का प्रबंधन सामान्य परिषद् के निर्देश एवं नियंत्रण में किया जाएगा। यह समिति सर्वोच्च सभा होगी एवं इस सभा का अध्यक्ष राज्य शासन द्वारा नियुक्त किया जाएगा। राज्य शासन संबंधित नगर निकाय, जनपद निकाय एवं जिला पंचायत के सदस्य, विधायक अथवा सांसद या गणमान्य नागरिक में से वह गणमान्य नागरिक जो न्यूनतम स्नातक उपाधि प्राप्त हो तथा कम से कम एक लाख रुपए महाविद्यालय को दान के रूप में दिया हो, अध्यक्ष नियुक्त किया जाएगा। सामान्य परिषद का उपाध्यक्ष कलेक्टर अथवा उसका प्रतिनिधि, जो डिप्टी कलेक्टर स्तर से कम न हो, होगा। सामान्य परिषद विधायक, सांसद अथवा उनके नामजद प्रतिनिधि सदस्य होंगे।
अध्यक्षों की नियुक्ति शासन स्तर से हुई है। नियम टूृटने के संबंध में मैं नहीं बोल सकता।
नरेश पाल, कलेक्टर, सतना
नियुक्त अध्यक्ष पूर्व में महाविद्यालय को दान नहीं दिए हैं। नियुक्ति प्रक्रिया शासन स्तर से हैं।
डॉ. सत्येंद्र शर्मा, प्राचार्य, लीड कॉलेज
शासन स्तर से नियुक्ति है। अगर ऐसा नियम है, तो अध्यक्ष अपनी तरफ से महाविद्यालय को दान कराएंगे या करेंगे।
कामता पांडेय, नवनियुक्त जनभागीदारी अध्यक्ष
एक लाख का दान अनिवार्य शर्त रखी गई थी। ये दान पहले होना चाहिए, उसके बाद नियुक्ति होनी चाहिए। मेरे अध्यक्ष रहते ही परिवर्तन हुआ था।
सुशील सिंह, पूर्व जनभागीदारी अध्यक्ष
Published on:
02 Sept 2017 01:47 pm
बड़ी खबरें
View Allसतना
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
