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सतना। क्या नामी शैक्षणिक संस्थान और सामान्य कॉलेज में पढऩे का कोई अंतर प्रतियोगी परीक्षा में पड़ता है? अवसाद से कैसे बचा जा सकता है? प्रतियोगी परीक्षाओं में भाषा का असर क्या पड़ता है? कौन सी मैग्जीन और अखबार पढऩे चाहिए? प्री और मेंस की तैयारी में अंतर क्या है? कैसे तैयारी की जा सकती है? दरअसल, ये सवाल किसी परीक्षा हाल के नहीं थे। बल्कि, जिले के दो आइएएस निगमायुक्त प्रतिभा पाल व जिपं सीइओ साकेत मालवीय के सामने इंदिरा कॉलेज में विद्यार्थियों द्वारा किए गए। मौका था राज्य एवं लोक सेवा आयोग परीक्षा की तैयारी करने वालों को नि:शुल्क कोचिंग देने का। रविवार को इसका शुभारंभ किया गया। इसे दिशा नाम दिया गया है। इसमें आइएएस अधिकारी हर रविवार विद्यार्थियों को तैयारी कराने के साथ-साथ टिप्स देंगे।
अपने तरह का अलग और नया प्रयोग
पूरे विंध्य में यह अपने तरह का अलग और नया प्रयोग है। जब जिले के दो आइएएस अफसरों ने प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं का उन्मुखीकरण (ओरिएन्टेशन) किया। राज्य एवं लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं सहित एसएससी, बैंक की तैयारी कर रहे युवाओं से सीधा संवाद किया। उनके प्रश्नों के जवाब भी दिए। भारतीय प्रशासनिक सेवा के अफसर निगमायुक्त प्रतिभा पाल और जिपं सीइओ साकेत मालवीय ने दो घंटे की क्लास में परीक्षाओं की बेहतर तैयारी और अच्छी मार्र्किंग के टिप्स दिए। बताया गया है कि स्नातक उत्तीर्ण किसी भी संस्थान और कोचिंग के युवा नि:शुल्क भाग ले सकते हैं और अपनी कठिनाइयों का निदान पा सकेंगे। अगले रविवार से दोनों अधिकारी विषय एवं पाठ्यक्रम आधारित क्लास लेंगे।
ऐसे हुई शुरुआत
अक्सर यह देखने में आ रहा था कि सिविल सेवा परीक्षा सहित अन्य परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा अक्सर आइएएस अधिकारियों के यहां परीक्षा की तैयारी संबंधी टिप्स लेने जाते थे। इस पर निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने निर्णय लिया कि अलग-अलग युवाओं को टिप्स देने से बेहतर है कि इन सभी के लिए हर रविवार एक प्रशिक्षण क्लास ही आयोजित कर ली जाए। उन्होंने अन्य अधिकारियों से चर्चा की। इसके बाद इंदिरा कन्या महाविद्यालय के जनभागीदारी अध्यक्ष कामता पाण्डेय से विचार साझा किए। इस नवाचार को कन्या महाविद्यालय के कैरियर मार्गदर्शन प्रकोष्ठ ने इस पहल को जमीनी रूप देने का बीड़ा उठाया। नगर निगम और इंदिरा कन्या महाविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में रविवार 13 मई से इस अभिनव प्रशिक्षण कार्यक्रम 'दिशा' की शुरुआत हो गई।
निगमायुक्त ने बताए सफलता के गुर
पहली क्लास निगमायुक्त प्रतिभा पाल ने ली। उन्होंने सिविल सर्विसेस सहित अन्य परीक्षाओं की तैयारी किस तरह की जाए, इस पर व्यापक जानकारी दी। बताया कि कई बार युवा तैयारी सही ढंग से नहीं कर पाने के कारण अपेक्षित परिणाम से वंचित रह जाते हैं। अक्सर भारी भरकम किताबें, नोट्स और स्टडी मटेरियल मे उलझे रहते हैं और कई बार अवसाद के शिकार भी हो जाते हैं। इसके लिए जरूरी है कि सबसे पहले सिलेबस का अध्ययन करें और उसी के अनुरूप तैयारी करें। इसके साथ ही विगत वर्षों के प्रश्र-पत्रों को भी देखें जिससे प्रश्रों का टैम्परामेंट भी पता चलेगा। इसके उन्होंने कई उदाहरण भी दिए। बताया कि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिये एनसीईआरटी की किताबें काफी महत्वपूर्ण होती है। राज्य एवं लोक सेवा आयोग की तैयारी कर रहे युवाओं की इनकी ६वीं से १२वीं तक की किताबों का अध्ययन जरूर करना चाहिए। ये काफी मददगार होती है। अगला बिन्दु बताया टाइम फे्रम का। कहा, बिना परिणाम की चिंता किए पढ़ाई का टाइम फे्रम बना कर अच्छा और ध्यान से पढऩा काफी मायने रखता है। इन परीक्षाओं के लिये धैर्य बहुत जरूरी है। इसके साथ ही तैयारी के दौरान परिवार और सामाजिक प्रतिबद्धताएं भी छोडऩी होगी वरना कई बार अवसाद के शिकार भी हो सकते हैं। लेकिन तैयारी के दौरान सिर्फ तैयारी ही की जाए। उस दौरान खेल, पारिवारिक और सामाजिक गतिविधियों से दूर रखना होगा। अन्यथा लगेगा कि तैयारी तो कर रहे हैं लेकिन हकीकत यह होगी कि आप तैयारी पूरी तरह से नहीं कर रहे होंगे। अंतिम बिन्दु बताया मैच्योरिटी, जिसमें तैयारी को फिनिशिंग पर ले जाना होता है। उन्होंने कहा कि एक ही परीक्षा की तैयारी कर रहे दो तीन लोगों का ग्रुप बनाकर तैयारी करने में ज्यादा जल्दी और बेहतर परिणाम आते हैं। ग्रुप के आपसी सवाल जवाब से चींजे क्लियर होती है वहीं स्टडी मटेरियल भी ज्यादा उपलब्ध हो पाता है।
जिपं सीइओ ने बताया स्मार्ट स्टडी का तरीका
जिपं सीइओ साकेत मालवीय ने अपने अनुभवों को साझा करते हुए बेहतर स्टडी का तरीका बताया। कहा, परीक्षा के लिए बड़े शहरों से होना जरूरी नहीं है। ककई बार युवा इससे पशोपेश में रहते कि मेरा सलेक्शन होगा या नहीं। इससे वे पढ़ाई से ज्यादा अन्य बिन्दुओं पर ध्यान देने लगते हैं, जो कि नहीं होना चाहिए। सिविल सर्विसेज एग्जाम के सलेक्टेड लोगों से मिलना और उनसे समझना काफी कुछ परेशानियों का निदान कर देता है। लिहाजा यहां इस संबंध में काफी सहायता मिलेगी। अन्य कई सक्सेसमंत्र बताते हुए कालेज प्रबंधन से अपेक्षा की, अगली बार से मंचीय सेटअप नहीं बल्कि क्लासरूम का सेटअप मिले तो युवाओं से ज्यादा बेहतर इन्टरेक्शन हो सकेगा।
यूं आए सवाल
दो अधिकारियों की क्लास के बाद सवाल जवाब का सत्र चला। युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षा तैयारी से संबंधी कई प्रश्न पूछे। जिनका जवाब भी वहीं दिया गया। एक सवाल रहा कि क्या नामी शैक्षणिक संस्थान और एक सामान्य कालेज में पढऩे का कोई अन्तर प्रतियोगी परीक्षा में पड़ता है? जिस पर बताया गया कि यह तो होता ही है, कई कालेज और विवि ऐसे होते हैं कि कुछ भी लिखों बेहतर परिणाम आते हैं तो कुछ में बेहतर होने पर ही अच्छा रिजल्ट मिलता है। ऐसे में विद्यार्थी का स्तरीय विकास भी उस अनुरूप होता है। लेकिन अंतिम सत्य है कि विद्यार्थी की खुद की पढ़ाई और लगन।
क्या भाषा प्रतियोगी परीक्षाओं में मायने रखती है
अन्य जो सवाल पूछे गए उसमें अवसाद से कैसे बचें, क्या भाषा प्रतियोगी परीक्षाओं में मायने रखती है, कौन सी मैगजीन और पेपर पढऩे चाहिए, प्री और मेन्स की तैयारी में अन्तर और कैसे तैयारी करें, इतिहास की तैयारी कैसे की जाए। इस दौरान जनभागीदारी अध्यक्ष कामता पाण्डेय ने इस प्रशिक्षण के उद्येश्यों की जानकारी दी तो महाविद्यालय की प्राचार्य नीलम रिछारिया ने इसका महत्व प्रतिपादित किया। राजनिधि सिंह ने मंच संचालन का दायित्व निभाया। वालेटिंयर के रूप में अभिषेक तिवारी अंशु सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
Published on:
14 May 2018 11:39 am
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