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MP की इस ग्राम पंचायत में प्रधान पति का था दखल, फिर CEO ने सरपंच पत्नी को दी ये सजा

मनमानी पर धारा ४० की कार्रवाई, आगामी छह वर्षों तक ग्राम पंचायत के सभी पदों पर निर्वाचन लडऩे हेतु किया गया अयोग्य घोषित

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Gram panchayat itha in sidhi

Gram panchayat itha in sidhi

सीधी। जिले की जनपद पंचायत रामपुर नैकिन अंतर्गत ग्राम पंचायत इटहा की महिला सरपंच को पति द्वारा ग्राम पंचायत में हस्तक्षेप करना महंगा पड़ गया। पति द्वारा पंचायत में हस्तक्षेप करने सहित अनियमितताओं को लेकर की गई शिकायतों की जांच उपरांत मामला सिद्ध होने पर मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत ने महिला सरपंच गीता जायसवाल पर पंचायत अधिनियम की धारा 40 की कार्रवाई करते हुए पद से पृथक कर दिया। साथ ही आगामी छह वर्षों तक ग्राम पंचायत के सभी पदों पर निर्वाचन लडऩे हेतु अयोग्य घोषित कर दिया है।

न्यायालय मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत सीधी द्वारा जारी आदेश में उल्लेखित किया गया है कि सीईओ जनपद पंचायत रामपुर नैकिन द्वारा प्रतिवेदित किया गया था कि इंदिरा आवास योजना अंतर्गत छह हितग्राहियों की प्रथम किस्त की राशि २० लाख दो हजार आहरित कर सरपंच पति रामनिवास जायसवाल द्वारा संबंधित हितग्राहियों से यह कहा गया कि आवास का निर्माण ग्राम पंचायत द्वारा कराया जाएगा।

आप लोग राशि उन्हें दे दें और राशि हितग्राहियों से ले ली गई। हितग्राहियों द्वारा राशि वापस करने अथवा आवास का निर्माण कार्य पूर्ण कराने हेतु कई बार बोला गया, किंतु सरपंच पति द्वारा न ही राशि वापस की गई और न ही निर्माण कार्य पूरा कराया गया। समन्वयक अधिकारी के प्रतिवेदन में यह भी उल्लेखित किया गया कि शौचालय निर्माण की भी राशि का भुगतान हितग्राहियों का किया जाना लंबित है।

श्रमिकों की मजदूरी रोकी
ग्रेवल रोड में कार्यरत मजदूरों की मजदूरी लगभग तीन लाख रुपए लंबित है। इसके भुगतान की कार्रवाई सरपंच द्वारा नहीं की जा रही है। सीईओ रामपुर नैकिन द्वारा प्रतिवेदित किया गया कि सरपंच गीता जायसवाल द्वारा वित्तीय वर्ष २०१७-१८ में कलवर्ट/पुलिया निर्माण कराया गया। उक्त कार्य का ईपीओ अपने पति रामनिवास जायसवाल को तीन पुलिया का बारह लाख रुपए भुगतान किया गया जो कि नियम के विरुद्ध है।

तीन माह चली सुनवाई
सीईओ रामपुर नैकिन द्वारा उक्त कारणों से गीता जायसवाल के विरुद्ध मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम की धारा ४० के तहत कार्रवाई प्रस्तावित की गई। जिस पर जिला पंचायत द्वारा महिला सरपंच को कारण बताओ नोटिस जारी कर २१ जून तक जवाब चाहा गया था, लेकिन नोटिस तामील होने के बावजूद सरपंच न तो उपस्थित हुई और न ही अपना जवाब प्रस्तुत किया गया।

अधिनियम १९९३ की धारा ४० के तहत दंडनीय

इससे यह माना गया कि लगाए गए आरोप सत्य हैं। इससे वह कोई जवाब देना नहीं चाहती। अनावेदिका का यह कृत्य मप्र पंचायत राज एवं ग्राम स्वराज अधिनियम १९९३ की धारा ४० के तहत दंडनीय है। उसके द्वारा अपने पति को बारह लाख रुपए का भुगतान किया गया है, इंदिरा आवास योजना की आहरित राशि उसके पति द्वारा न तो कार्य कराया जाना और न ही राशि वापस करना यह स्पष्ट करता है।

ग्राम पंचायत के कार्यों मे पूर्ण हस्तक्षेप

ग्राम पंचायत अंतर्गत पंचायत का पूर्ण कार्य महिला सरपंच के पति ने किया जाता है, उसके पति का ग्राम पंचायत के कार्यों मे पूर्ण हस्तक्षेप है, ऐसे स्थिति में महिला सरपंच गीता जायसवाल अपने पद पर बने रहने योग्य नहीं पाई जाती, अत: गीता जायसवाल को पद से पृथक करते हुए ग्राम पंचायत के समस्त पदों पर छ: वर्षों तक निर्वाचन लडऩे हेतु अयोग्य घोषित किया गया है।

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