
Guru Purnima 2019: shri paramhans ashram dharkundi news in hindi
सतना। परमहंस आश्रम धारकुंडी में गुरु पूर्णिमा के दिन भक्तों की आस्था उमड़ पड़ी। स्वामी सच्चिदानंद महाराज की एक झलक पाने के लिए मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के हजारों भक्त टूट पड़े। आश्रम में सुबह 6 बजे से दर्शन पूजन का शिलशिला शुरू हो गया। दोपहर 12 बजे से विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। जहां हजारों भक्तों ने स्वामी सच्चिदानंद महाराज के दर्शन के बाद बारी-बारी से प्रसाद ग्रहण किए। प्रसाद का सिलसिला दोपहर से शुरू होकर देर शाम तक चलता रहा। फिर रात में रुकने वाले भक्तों के लिए अलग से प्रसाद बनाया जाता है।
बता दें कि, धारकुंडी में प्रकृति और अध्यात्म का अनुपम मिलन देखने को मिलता है। सतपुड़ा के पठार की विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं में स्थित धारकुंडी में प्रकृति की अनुपम छटा देखने को मिलती है। पर्वत की कंदराओं में साधना स्थल, दुर्लभ शैल चित्र, पहा़ड़ों से अनवरत बहती जल की धारा, गहरी खाईयां और चारों ओर से घिरे जंगल के बीच महाराज सच्चिदानंद जी के परमहंस आश्रम ने यहां पर्यटन और अध्यात्म को एक सूत्र में पिरो कर रख दिया है। यहां बहुमूल्य औषधियां और जीवाश्म भी पाए जाते हैं।
ये है महत्व
गौरतलब है कि, जिला मुख्यालय से लगभग 60 किमी. दूर स्थित धारकुण्डी आश्रम में प्रकृति और अध्यात्म का संगम देखने को मिलता है। धारकुंडी आश्रम विंध्यांचल पर्वत श्रंखला के बीच घनघोर जंगल में बना हुआ है। यहां स्वामी सच्चिदानंद महाराज अध्यात्म चिंतनरत रहते हैं। वैसे तो प्रतिदिन श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। लेकिन गुरु पूर्णिमा पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते है।
दो दिन पहले से पहुंच जाते हे भक्त
मंगलवार को गुरु पूर्णिमा पर्व पर मध्यप्रदेश-उत्तरप्रदेश सहित देशभर से 30 से 40 हजार के ऊपर श्रद्धालु पहुंचे। गुरु पूर्णिमा पर दीक्षा महोत्सव के साथ भव्य मेला भी आयोजित किया गया। इसके लिए भक्तगण दो दिन पहले से ही पहुंच गए थे। उनके खाने-पीने व ठहरने की व्यवस्था आश्रम की ओर से ही की जाती है। सुरक्षा व्यवस्था का जिम्मा स्थानीय प्रशासन व पुलिस द्वारा किया गया था।
पहले बनाओ प्रसाद, फिर चखाओ और चखो
बता दें कि, सन 1990 के बाद उस समय ये आश्रम चर्चा में आया जब स्थानीय ग्रामीणों का आना-जाना तेजी के साथ शुरू हुआ। धीरे-धीरे ग्रामीण स्वामी सच्चिदानंद महाराज के भक्त हो गए। कुछ दिन बाद भक्ता की संख्या बढऩे लगी। वर्ष 2003 के बाद बड़े स्तर पर ग्रामीण आयोजन करने लगे। गुरु पूर्णिमा और हर रविवार को विशाल भंडारे होने लगे। स्वामी जी के भक्त बतातें है कि पहले आश्रम में प्रसाद बनाओ फिर ग्रामीणों को चखाओ और चखो तब असली पूण्य मिलता है।
अघ्रमर्षण कुंड
पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र परमहंस आश्रम का जिक्र शास्त्रों में भी है। यहां स्थित अघ्रमर्षण कुंड महाभारत काल से अब तक अपनी सत्यता के लिए चर्चित है। मान्यता है कि कौरव युद्ध के बाद लगे पापों से मुक्ति के लिए दक्ष और युधिष्ठिर ने इसका सहारा लिया था।
Published on:
16 Jul 2019 06:56 pm
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