
शहर में आधा दर्जन कोल्ड स्टोरेज, लाइसेंस एक के पास भी नहीं
सतना. प्रति वर्ष पांच लाख मीट्रिक टन खाद्यान्न एवं एक लाख मीट्रिक टन फल-सब्जियों का उत्पादन करने वाले जिले के किसानों की उपज को सुरक्षित रखने के लिए जिला प्रशासन शहर में एक कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था नहीं कर पाया। मंडी में भाव कम मिलने पर उपज को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था न होने के कारण कृषक औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं। किसानों ने बताया, जिले में एक भी सरकारी व लाइसेंसी कोल्ड स्टोरेज नहीं हैं, जहां वे अपनी उपज सुरक्षित रख सकें। इस संबंध में जब मंडी प्रशासन से जानकारी ली गई तो मंडी समिति के अधिकारी शहर में निजी कोल्ड स्टोरेज संचालित होने की बात तो स्वीकारते रहे पर लाइसेंस की बात को अनसुना करते रहे। लाइसेंस शाखा से जानकारी लेने पर चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ कि शहर में लगभग आधा दर्जन कोल्ड स्टोरेज संचालित हैं। लेकिन, इनमें से किसी के पास भी संचालन का लाइसेंस नहीं है।
निजी उपयोग के नाम पर अवैध भंडारण
शहर में अकेले औद्योगिक क्षेत्र में तीन कोल्ड स्टोरेज संचालित हैं। तीनों कोल्ड स्टोरेज का निजी उपयोग बता कर व्यापारी इनमें खाद्यान्न एवं फल-सब्जी का अवैध भंडारण कर मंडी प्रशासन को राजस्व की चपत लगा रहे हैं। उधर, लाइसेंसी न होने के नाम पर मंडी प्रशासन इन पर किसी प्रकार की कार्रवाई भी नहीं कर पा रहा। मंडी सूत्रों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र स्थित सीताराम कोल्ड स्टोरेज में सतना ही नहीं रीवा, सीधी-सिंगरौली से आने वाले अनाज एवं महुए का भंडारण किया जा रहा। लेकिन, इसके संचालन का लाइसेंस नहीं है। शहर में बिना लाइसेंस संचालित कोल्ड स्टोरेज में अवैध रूप से अनाज एवं फल-सब्जी का स्टाक कर किसानों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
किसानों को नहीं मिल रहा लाभ
किसानों का कहना है कि शहर में जो कोल्ड स्टोरेज संचालित हैं उनके गैर लाइसेंसी होने के कारण मंडी प्रशासन का कोई नियंत्रण नहीं है। अवैध रूप से संचालित कोल्ड स्टोरेज में अनाज व फल-सब्जी रखने पर संचालक द्वारा किसानों से मनमानी किराया वसूला जाता है। इतना ही नहीं प्रशासनिक नियंत्रण न होने के कारण स्टोरेज संचालक किसानों द्वारा भंडारित अनाज व फल खराब होने पर क्षति पूर्ति की कोई गारंटी नहीं ली जाती। इसलिए किसान इन कोल्ड स्टोरेज का लाभ नहीं ले पा रहे हैं।
हर साल करोड़ों रुपए का नुकसान
सरकारी व लाइसेंसी कोल्ड स्टोरेज न होने के कारण किसान अपनी उपज का भंडारण नहीं कर पा रहे। जिले में अकेले ५० हजार मीट्रक टन प्याज एवं १० हजार मीट्रिक टन आलू की पैदावार होती है। लेकिन, इसके सुरक्षित भंडारण के लिए जगह न होने के कारण किसान गर्मी में ही अपनी उपज लागत से कम मूल्य पर बेचने को मजबूर हैं। इतना ही नहीं कोल्ड स्टोरेज की व्यवस्था न होने के कारण मैहर के करैला एवं टमाटर उत्पादक किसानों को भी उपज का उचित दाम नहीं मिल पा रहा। उद्यानिकी विभाग के अधिकारियों का कहना है कि जिले में यदि ब्लाक स्तर पर सर्वसुविधायुक्त कोल्ड स्टोरेज की स्थापना की जाए तो मंडी प्रशासन की आय भी बढ़ेगी और किसानों को उनकी उपज का उचित दाम भी मिलेगा। कोल्ड स्टोरेज बनने से जिले के ५० हजार से अधिक किसान इसका लाभ ले सकते हैं।
मंडी से किसी भी कोल्ड स्टोरेज संचालक ने लाइसेंस नहीं लिया है। इसलिए शहर में कुल कितने कोल्ड स्टोरेज संचालित हैं इसकी जानकारी मंडी रिकॉर्ड में नहीं है। कोल्ड स्टोरेज को लाइसेंस देने संबंधी मंडी बोर्ड के कोई स्पष्ट दिशा-निर्देश नहीं हैं। इसलिए इन पर कोई कार्रवाई भी नहीं की गई। हम मंडी बोर्ड से इस संबंध में जानकारी लेकर अगला कदम उठाएंगे।
जे.एन. गर्ग, प्रभारी सचिव, कृषि उपज मंडी सतना
फैक्ट फाइल
2.32 लाख किसान जिले में
5 लाख एमटी अनाज का उत्पादन प्रतिवर्ष
50 हजार एमटी प्याज का उत्पादन
10 हजार एमटी आलू का उत्पादन
20 हजार एमटी करैल व टमाटर का उत्पादन
Published on:
03 Nov 2019 01:36 am
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