
हरितालिका तीज व्रत अनुष्ठान
सतना. अखंड सौभाग्य की कामना से रखा जाने वाला अति कठिन Hartalika Teej Vrat 2021 इस बार नौ सितंब दिन गुरुवार को पड़ रहा है। लेकिन सबसे खास ये है कि करीब डेढ दशक बाद इस व्रत अनुष्ठान के मौके पर ऐसा विलक्षण योग बन रहा है जो व्रती की हर मुराद पूरी करेगा।
हरतालिका तीज व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया को मनाया जाता है। इस व्रत अनुष्ठान में भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा की जाती है। इसके लिए आदि देव शंकर, देवी पार्वती और मां गौरी के गोद में पुत्र गणेश की मृणमयी प्रतिमा (कच्ची मिट्टी से बनी प्रतिमा) की पूजा होती है। पूजन के लिए आकर्षक ढंग से पूजन स्थल को सजाया जाता है। केले के पत्ते से पूजा मंडप सजाया जाता है। पूजा शाम के वक्त होती है। पूजन के बाद रात्रि पर्यंत भजन-कीर्तन का दौर चलता है।
वैसे यह व्रत काफी कठिन माना जाता है, क्योंकि इसमें व्रती 24 घंटे का निराजल उपवास रखती हैं, तभी तो इस खर तीज व्रत भी कहा जाता है। व्रती सुबह दैनिक क्रिया और स्नानादि से निवृत्त हो कर पूजन की तैयारी में जुट जाती हैं। शाम को प्रदोष काल जिसे गोधूलि बेला भी कहते हैं में पूजन-अर्चन होगा। फिर अगले दिन चौथ तिथि में ही व्रत का पारण किया जाएगा। यह अति शुभ फलदायी व्रत माना गया है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार हरतालिका तीज पर इस बार 14 साल बाद चित्रा नक्षत्र के कारण रवियोग बन रहा है, जो 9 सितंबर दोपहर 2.30 बजे से अगले दिन 10 सितंबर 12.57 बजे तक रहेगा। हरतालिका तीज का सबसे शुभ काल शाम 5.16 बजे से शाम को 6.45 बजे तक है। इसमें भी अति शुभ काल जिसे अभिजित काल 6.45 से से 8.12 बजे तक है। हरतालिका व्रत के पूजन के वक्त रवियोग रहेगा।
ज्योतिषाचार्य बताते हैं कि रवियोग में पड़ने वाले हरितालिका तीज व्रत कुंवारी कन्याओं के लिए शुभ है। ऐसे बेटियां जिनकी शादी तय नहीं हो रही, अनचाही बाधाएं आ रही हैं और विलंब हो रहा है, वो अगर इस व्रत को करे तो उनका विवाह जल्द हो सकेगा। धार्मिक मान्यता है कि हरतालिका तीज व्रत का पूजन रवियोग में करने से सभी मुरादें पूरी होती हैं।
हरतालिका तीज पर पूजन के दौरान महिलाएं काले, नीले और बैंगनी रंग के वस्त्र न पहनें। लाल, महरूम, गुलाबी, पीले और हरे रंग के वस्त्रों को पहनकर पूजा करें। पूजन पूर्व या उत्तर दिशा की और मुख करने से मां पार्वती और भगवान शिव प्रसन्न होंगे। दुर्लभ संयोग ये भी है कि इस बार यह पर्व गुरुवार को पड़ रहा है, ऐसे में माता पार्वती और भोलेनाथ के साथ लक्ष्मीनारायण की भी कृपा प्राप्त होगी।
Updated on:
07 Sept 2021 10:50 am
Published on:
06 Sept 2021 07:18 pm
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