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बॉलीवुड के होली गीतों ने ली फाग की जगह, अब न ढोलक, न झांझ, सिर्फ DJ का शोरगुल

बघेली होली: अवध संस्कृति की छाप छोडऩे वाली इस होली में कभी एक नहीं बल्कि पूरे सात दिन तक घर-घर होली फागों की धूम रहा करती थी।

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सतना

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Suresh Mishra

Feb 24, 2018

holi khele raghuveera song free

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सतना। बघेली होली का अपना अलग ही मजा रहा है। अवध संस्कृति की छाप छोडऩे वाली इस होली में कभी एक नहीं बल्कि पूरे सात दिन तक घर-घर होली फागों की धूम रहा करती थी। विविध जाति-धर्म के लोगों की बिंदास टोली होली में घर-घर जाकर फाग सुनाया करती थी।

दिनभर ढोलक, मंजीरे, नगाड़े और झांझ की गूंज कानों में सुनाई देती रहती थी। अब समय बदला और इसी के साथ रीति रिवाज भी बदल गया। आधुनिकीकरण और शहरीकरण ने इन त्योहारों पर ग्रहण सा लगा दिया है। अब तो दूर-दूर तक फाग की गूंज नहीं सुनाई पड़ती।

पुराने लोगों ने मन मार लिया

ढोलक और झांझ की जगह अब डीजे का शोरगुल दिनभर सुनाई देता है। फागों की जगह बॉलीवुड गीतों ने ले ली। पुराने लोगों ने मन मार लिया और यंग जनरेशन ने इसे ही सबकुछ मान लिया। अब तो न फाग है न खुशियां और नहीं भाईचारे का रिश्ता।

suresh mishra IMAGE CREDIT: patrika

फाग ले आते थे पास
समाजसेवी सुनीता सिंह का कहना है, फाग गीत तो लोगों को पास लाने का पुराने जमाने का सबसे बढि़या तरीका होता था। होली आते ही युवा, बुजुर्गों की टोली हाथ में ढोलक-मंजीरे और झांझ लेकर घर घर जाती थी। वहां गांव के लोग एकत्रित होते थे। आपस में गले मिलते थे। न कोई जाति देखता न धर्म। सभी एक साथ बघेली फाग गाते थे। ये गीत तो लोगों को एक करने और भाईचारे का संदेश देने का माध्यम होते थे।

मनोरंजन का एकमात्र साधन
समाजसेवी किरन सिंह कहती हैं कि पहले मनोरंजन का एकमात्र साधन ढोलक, मंजीरे और युवाओं की टोली होती थी। जो अपने साथ-साथ होली में फागों को गाकर जमकर मस्ती करती थी। युवा हर घर जाते और वहां फाग सुनाते। अब एेसा नहीं है। मनोरंजन के कई साधन हो चुके हैं। लोगों का दिमाग बंट गया है। लोग टीवी, साउंड, डीजे इन सब में होली गीत सुनना पसंद कर रहे हैं।

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यह लोक गीत हमारे बघेलखंड का गीत

यही वजह है कि इस पुराने मनोरंजन साधन की ओर युवाओं का रुख नहीं हो पाता। आपको याद है, आज भी सबसे पहले जब होली गीत सुनाई देता है तो उसमें सबसे प्रचलित और मशहूर गीत होली खेले रघुवीरा को बिना सुने कोई रह ही नहीं सकता। यह लोक गीत हमारे बघेलखंड का गीत है। हमारी अवधि भाषा में गाया गया गीत है।इस पर हम सबको गर्व होना चाहिए।

डीजे ने छीन ली फागुआ की परंपरा
समय बदलता गया और पुराने लोगों ने ध्यान नहीं दिया। गांव, कस्बे के लोग अब शहर में जाकर रहने लगे और वहीं की संस्कृति अपनाने लगे। जब से ये साउंड सिस्टम और डीजे चलन में आया है युवाओं का लगाव फागुआ गीतों से हट गया। सुबह से कानफोड़ू डीजे में बॉलीवुड होली गीत गंूजते हैं और युवा शराब और भांग के नशे में डूबे बेसुध होकर सड़कों पर हुड़दंग मचाते हैं।

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यह थी विशेषता
बघेलखंड के लोकगीतों में फ ाग दो टोलियों में गाया जाता था। एक टोली पुरुषों की होती थी, दूसरी महिलाओं की। पुरुष जहां ढोलक-नगडिय़ा, झांझ-मजीरे के साथ मस्ती में ऊंचे स्वरों में समूचे गांव में घर-घर जाकर फाग गीत गाते थे वही महिलाओं की टोली घरों के आंगन में फ गुआ गाती थी।

ये हैं लोकप्रिय फाग
- प्रथम गनेश मनाऊ , प्रथम गनेश मनाऊ।
- गोविंदगढ़ के अजब तलाब, महल, जन्नू के सगले बरतिहा सोचे, रघुवर नहीं आएं।
- हर लाबा है नार बिरानी छैल, हर लाबा है नार बिरानी।
- पिया अइहा तू क उन महीना मा, तोरी सूरत लिखी है, नगीना मा।
- कजरी वन वाले भोरा रे, केखा व्याही सिया जानकी, केखा ब्याहे गौरा रे।

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ये है होली के गाने
1. फिल्म- सिलसिला (1981): अमिताभ बच्चन, रेखा और जया बच्चन स्टारर इस फिल्म का रंग बरसे गाने के बगैर तो होली अधूरी है। जब तक ये गाना न बजे तब तक होली का रंग नहीं जमता।
2- फिल्म- ये जवानी है दिवानी (2013): फिल्म में रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण का गाना बलम पिचकारी काफी हिट रहा।
3- फिल्म- कटी पतंग (1970): आज ना छोड़ेंगे बस हमजोली, खेलेंगे हम होली राजेश खन्ना और आशा पारेख स्टारर इस गाने में होली का हुड़दंग खूब नजर आया.
4- फिल्म- मशाल (1984): ओ होली आई होली आई देखो होली आईरे, दिलीप कुमार , वहीदा रहमान, अनिल कपूर और रती अग्निहोत्री ने इस गाने में जमकर होली खेली है। होली के मौके के लिए ये गाना भी एकदम परफेक्ट है।
5- फिल्म- शोले (1975): होली के दिन दिल खिल जाते हैं, रंगों में रंग मिल जाते हैं। गिले शिकवे भूल के दोस्तों, दुश्मन भी गले मिल जाते हैं। बिग बी, धर्मेंद्र , जया बच्चन और हेमा मालिनी स्टारर सुपरहिट फिल्म शोले का ये गाना होली की मस्ती को और बढ़ा देता है।
6- 'होली आई रे कन्हाई' फिल्म- मदर इंडिया (1957)
होली के गानों की बात हो और महबूब खान की फिल्म 'मदर इंडिया' के गाने 'होली आई रे कन्हाईÓ का जिक्र ना हो, ऐसा हो ही नहीं सकता। इस गाने को सुनील दत्त, नरगिस, राजकुमार, हीरालाल और अन्य कलाकारों के साथ फिल्माया गया था। इस गाने की धुन और बोल आज भी लोगों को अच्छे लगते हैं।
7- 'अरे जा रे हट नटखट' फिल्म- नवरंग (1959)
वी शांताराम की फिल्म 'नवरंग' में भी होली का एक बेहद खूबसूरत गीत था, 'अरे जा रे नटखट ना खोल मेरा घूंघट। इसमें संध्या ने पर्दे पर नायक और नायिका दोनों का किरदार इतनी खूबसूरती से निभाया था कि आज भी यह गीत जब भी बजता है, तो सारा नजारा आंखों के सामने आ जाता है।
8- 'तन रंग लो जी, अजी मन रंग लोÓ फिल्म- कोहिनूर (1960)
दिलीप कुमार और मीना कुमारी पर 'कोहिनूरÓ फिल्म में फिल्माया गया सॉन्ग 'तन रंग लो जी, आज मन रंग लो' से होली को एक नई अभिव्यक्ति मिली।
9- लेट्स प्ले होली
अक्षय कुमार और प्रियंका चोपड़ा पर फिल्माया गया ये गाना भी होली पर काफी सुनने को मिलता है। गाने में अक्षय कुमार और प्रियंका होली खेलते हुए नजर आते हैं। गाने के बोल हैं 'डू मी अ फेवर, लेट्स प्ले होली'। ये सॉन्ग भी युवाओं की प्लेलिस्ट में टॉप पर मिलता है।
10- अंग से अंग लगाना, सनम हमें ऐसे रंग लगाना
फिल्म डर में फिल्माया गया ये सॉन्ग भी होली के जश्न में रंग भर देगा। होली के मौके पर गुलाल उड़ाने और डांस करने के हिसाब से ये गाना बेस्ट है। फिल्म में शाहरुख का होली खेलने का तरीका बिल्कुल अलग था।