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कुपोषण से लड़ाई के लिए भारत सरकार ने ‘एआई’ पर लगाया दांव, एमपी के 12 जिलों में पायलट प्रोजेक्ट

बच्चों के पोषण और शारीरिक विकास की निगरानी अब हाईटेक होने जा रही है। भारत सरकार पोषण 2.0 के तहत AI आधारित तकनीकि विकसित कर रही। जो फोटो से बच्चों का वजन व लंबाई बताएगी।

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सतना। बच्चों के पोषण और शारीरिक विकास की निगरानी अब तकनीक के भरोसे होने जा रही है। भारत सरकार ‘पोषण 2.0’ के तहत ऐसी एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) आधारित प्रणाली विकसित कर रही है, जो मोबाइल फोन के जरिए 0 से 6 साल तक के बच्चों की लंबाई, वजन जैसे शारीरिक माप दर्ज करेगी। इस तकनीक के परीक्षण के लिए मध्यप्रदेश के 12 जिलों का चयन किया गया है, जिसमें सतना भी शामिल है। इसके लिए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय भारत सरकार ने वाधवानी एआई के साथ तकनीकि विकसित करने का काम कर रहा है।

इस प्रोजेक्ट के तहत मार्च से जून के बीच चयनित जिलों में बड़े पैमाने पर फील्ड डेटा संग्रहण किया जाएगा। इसके लिए विशेष टीमें गठित की गई है। जो गांव-गांव और आंगनवाड़ी केंद्रों तक पहुंचकर बच्चों का डेटा जुटा रही हैं। जिला स्तर पर प्रोजेक्ट की निगरानी के लिए फील्ड इन्वेस्टिगेटर तैनात किए गए हैं। सतना जिले में सोहावल और उचेहरा क्षेत्र में तकनीकि का परीक्षण किया जा रहा है।

क्यों खास है यह तकनीक

अब तक आशा कार्यकर्ताओं द्वारा बच्चों की लंबाई और वजन मापने की प्रक्रिया मैन्युअल रही है। जिसमें त्रुटि की संभावना बनी रहती है। नई एआई तकनीक मोबाइल आधारित होगी, जिससे माप अधिक सटीक और तुरंत रिकॉर्ड हो सकेगा। इससे न सिर्फ डेटा की गुणवत्ता सुधरेगी, बल्कि रियल टाइम में बच्चों के पोषण स्तर की निगरानी भी संभव होगी। इस तकनीकि में बच्चे का कुछ सेकेण्ड का वीडियो रिकार्ड किया जाएगा। जिसके आधार पर बच्चे की पूरी शारीरिक माप के साथ वजन भी सामने आ जाएगा।

कुपोषण से लड़ाई में बड़ा कदम

परीक्षण करने आए विशेषज्ञों के अनुसार इस तकनीक के लागू होने से कुपोषण की पहचान पहले और अधिक सटीक तरीके से हो सकेगी। इससे जरूरतमंद बच्चों तक समय पर पोषण और स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना आसान होगा। इन्होंने बताया कि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहा तो आने वाले समय में पूरे देश में बच्चों के स्वास्थ्य मॉनिटरिंग का तरीका पूरी तरह बदल जाएगा। इसके लिए मध्यप्रदेश के 12 जिलों में सर्वेक्षण प्रारंभ है।

एआई इंपैक्ट समिट में भी हुआ प्रदर्शन

बच्चों की शारीरिक माप वाले इस एआई टूल को वाधवानी एआई ग्रुप ने विकसित किया है और इसका प्राथमिक परीक्षण दमन में किया गया था। इसके सफल परीक्षण के बाद दिल्ली के एआई इंपैक्ट समिट में भी इसका प्रदर्शन किया गया। इस तकनीकि के प्रयोग के बाद आशा कार्यकर्ताओं को वजन स्केल, स्प्रिंग बैलेंस, इंफैंटोमीटर, एमयूएसी टेप और अन्य उपकरणों से छुट्टी मिल जाएगी। सिर्फ स्मार्ट मोबाइल फोन से इनका सारा काम हो जाएगा।

"टीम सतना पहुंची हुई है और इनके द्वारा सर्वे कार्य किया जा रहा है। महिला बाल विकास विभाग के अधिकारी कर्मचारी सहयोगी की भूमिका में हैं।" - राजीव सिंह, जिला महिला बाल विकास अधिकारी

"प्रदेश के 12 जिलों में इस तकनीकि का परीक्षण किया जा रहा है। इसे बाद में इस एआई माड्यूल को पोषण ट्रेकर एप में इनबिल्ट कर दिया जाएगा। इस तकनीकि में एक फोटो वीडियो से बच्चे की पूरी शारीरिक माप और वजन सामने आ जाएगा।" - बिधु भूषण मोहंती, स्टेट सुपरवाइजर