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ये है अनोखी जेल, जहां रसूखदार कैदियों को दी जाती है छूट, बिना बताए गायब हो जाते है लोग

जेलर के हस्ताक्षर से कैदी को दी गई थी रिहाई: सतना केंद्रीय जेल में खेल, दो दिन गायब रहा कैदी, 29 को निकासी, 31 मई को आमद दर्ज कराई गई

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influential prisons: central jail prisoner special Facility on satna

influential prisons: central jail prisoner special Facility on satna

सतना। अक्सर हिन्दी फिल्मों में देखने को मिलता है कि रसूखदार कैदी जेल अधिकारियों व नेताओं से मिलीभगत करते हुए सुविधा अनुसार जेल से बाहर जाता है। फिर अपनी सुविधा अनुसार लौट आता है। इस दौरान वो बड़ी वारदात को अंजाम देता है। ऐसा ही फिल्मी खेल सतना केंद्रीय जेल में खेला जा रहा है। बकायदा एक कैदी को जेल से बाहर निकाला जाता है, दो दिन तक आजाद घुमता है और फिर उसे जेल में दाखिल करा दिया जाता है। ये पूरा खेल जेलर बद्री विशाल शुक्ला व मातहत जेलकर्मियों के माध्यम से खेला गया है। मामला कैदी जितेन्द्र नागर पिता रामकुशल नागर (28)से जुड़ा है।

जो सिटी कोतवाली थाना अन्तर्गत पुष्पराज कॉलोनी का रहने वाला है। जितेन्द्र इन दिनों विचाराधीन कैदी के रूप में केंद्रीय जेल सतना में बंद है। इस कैदी को 29 मई 2019 को शाम करीब 7.45 बजे केंद्रीय जेल सतना से बाहर किया गया। ये बकायदा 48 घंटे तक जेल से बाहर आजाद घुमता रहा, फिर 31 मई 2019 को शाम करीब 5 बजे जेल दाखिल करा दिया गया। इसके जेल से बाहर जाने के कागजातों पर जेलर बद्री विशाल शुक्ला ने हस्ताक्षर किए। लिहाजा अधिनस्थ कर्मचारियों ने कुछ नहीं बोला और बेधड़क मुख्य गेट से कैदी को जाने दिया गया। इस दौरान रवानगी व आमद रजिस्टर में एंट्री भी की गई।

खुला मामला, तो कैदी को गिरफ्तार कर लाए जेल
दरअसल, कैदी को बाहर करने का खेल जेलर बद्री विशाल शुक्ला के स्तर पर हुआ। सूत्रों की माने, तो जेल अधीक्षक एनपी सिंह सतना में नहीं थे। लिहाजा जमानत का पत्र कोर्ट से पहुंचने के बाद कैदी को रिहाई दे दी गई। दूसरे दिन जब जेल अधीक्षक सतना पहुंचे, तो उन्होंने सवाल-जवाब किया और पूछा कि अन्य प्रकरण भी विचाराधीन है, फिर कैदी बाहर कैसे गया? इसके बाद हड़कंप मच गया। आनन-फानन मेें 31 मई को कैदी को कचहरी क्षेत्र से जेलकर्मी गिरफ्तार किए और जेल में लाकर बंद कर दिया। लेकिन, मामले को जेल स्तर पर ही दबा दिया गया। शीर्ष अधिकारियों को सूचना नहीं दी गई।

ऐसे हुआ खेल
कैदी जितेन्द्र नागर के खिलाफ कई प्रकरण दर्ज हैं। 29 मई को सतना कोर्ट ने उसके एक प्रकरण में जमानत दे दी थी। अन्य प्रकरण होने के कारण उसे जेल से रिहा नहीं होना चाहिए था। लेकिन, इसी की आड़ में कैदी को बाहर करने का खेल खेला गया। अन्य प्रकरणों को नजरअंदाज करते हुए 29 मई को शाम 7.45 बजे कैदी को रिहाई दे दी गई।

शातिर अपराधी है
दरअसल, जितेंद्र नागर जिले का शातिर अपराधी है। उस पर कई गंभीर प्रकरण विचाराधीन है। इस स्थिति को देखते हुए कलेक्टर ने जिला दंडाधिकारी की हैसियत से जिलाबदर भी घोषित कर दिया है। ऐसे शातीर अपराधी को जेल से 48 घंटे तक बाहर रखा गया। जो अपने आप में गंभीर सवाल है।

ये मामला गंभीर है। सतना जेल में लगातार गड़बड़ी सामने आ रही है। इसकी जांच होगी। जल्द ही जीपी ताम्रकार डीआइजी जेल जबलपुर से जांच प्रतिवेदन तलब किया जाएगा।
संजय चौधरी, जेल महानिदेशक, भोपाल