
jald band hogi madhya pradesh me krishi upaj mandiya
सतना। मंडी प्रशासन की अनदेखी व अनाज की डाक नीलामी में व्यापारियों की तानाशाही के कारण प्रदेश की ए ग्रेड मंडियों में शामिल सतना मंडी की शाख को बट्टा लग रहा है। किसानों के अनाज की बाजार भाव से आधी कीमत लगाने व मिलकर अनाज खरीदने की प्रथा से परेशान होकर बीते पांच साल में 80 फीसदी किसान सतना मंडी से किनारा कर चुके हैं। इससे मंडी में अनाज की आवक एवं राजस्व वसूली का ग्राफ तेजी से गिरा है। मंडी में व्याप्त अव्यवस्था एवं सुविधाएं न मिलने के कारण वर्तमान में सिर्फ 15-20 फीसदी किसान ही उपज बेचने मंडी पहुंच रहे हैं। इसका असर मंडी की आवक में पड़ रहा है।
अनाज कारोबार से जुडे़ जानकारों का कहना है कि सतना मंडी में अनाज की आवक 60 फीसदी तक कम हो गई है। इससे मंडी की आय प्रभावित हो रही है। मंडी में व्याप्त व्यापारियों की तानाशाही और नगद भुगतान में कमीशनखोरी के चलते सतना मंडी बंद होने की कगार पर पहुंच गई है। यदि जल्द ही जिला प्रशासन मंडी की बिगड़ी व्यवस्था और व्यापारियों की मनमानी पर लगाम नहीं कसी तो कारोबार ठप हो जाएगा।
पर्ची कटाने से भुगतान तक लूट
अनाज लेकर मंडी आने वाले किसानों से गेट में प्रवेश पर्ची काटने के साथ ही लूट शुरू हो जाती है। चबूतरे में अनाज की नीलामी में गांव से अनाज लेकर आए छोटे व्यापारी गल्ला खरीद रहे व्यापारियों को 50 रुपए क्विंटल कमीशन देने का सौदा कर अपनी उपज का अधिक भाव बुलवाते हैं। जबकी मूल किसाने से सौदा न होने से उनकी उपज के दाम व्यापारी के माल से कम बोले जाते हैं। इसके बाद अनुबंघ कटाने के लिए 10 रुपए प्रति क्विंटल अलग से देने पड़ते हैं। इसके बाद यदि व्यापारी से नगद भुगतान लेना है तो प्रति क्विंटल 50 से 100 रुपए कमीशन काटा जाता है। मंडी कर्मचारी एवं व्यापारियों द्वारा खुलेआम की जाने वाली वसूली से तंग आकर किसान और व्यापारी सतना मंडी छोड़ दूसरी मंडियों का रूख कर रहे हैं। इसका परिणाम यह है कि सतना मंडी में अनाज की आवक लगातार घट रही है।
मंडी को खत्म करने की साजिश
मंडी से जुडे़ अनाज कारोबारियों का कहना है कि एक दशक पहले तक सतना मंडी नगद भुगतान और अच्छे भाव के लिए प्रदेशभर में जानी जाती थी। इस मंडी में विंध्य एवं महाकौशल के एक दर्जन जिलों के किसान अपनी उपज बेचने आते थे। लेकिन बीते कुछ वर्षों में मंडी में करोबार कर रहे कुछ व्यापारी अधिक मुनाफा कमाने की लालच में सतना मंडी बंद कराने में तुले हैं। उनके द्वारा जानबूझ कर किसानों की उपज के कम दाम बोले जाते हैं। मंडी में उजप के जो दाम बोले जाते हैं, उससे अधिक दाम उन्हें गांव में उपज बेचने पर मिल जाते हैं। ऐसे में किसान मंडी से मुह मोड़ रहे हैं।
व्यापारियों पर नियंत्रण नहीं
प्रदेश सरकार एक ओर खेती को लाभ का धंधा बनाने कई योजनाएं चल रही है। वहीं मंडी प्रशासन की अनदेखी के कारण किसानों को उनकी उपज के उचित दाम नहीं मिल पा रहे हैं। मंडी में लुट रहे किसानों का कहना है कि शिकायत के बाद भी मंडी सचिव न तो दूसरी बार अनाज की डाक करवाते हैं और न ही व्यापारियों पर किसी प्रकार की कार्रवाई होती। मंडी प्रशासन का व्यापारियों पर नियंत्रण न होने के कारण मंडी की अनाज खरीदी व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है।
Published on:
21 Jan 2019 04:34 pm
बड़ी खबरें
View Allसतना
मध्य प्रदेश न्यूज़
ट्रेंडिंग
