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सतना में 80 फीसदी गांवों की गिरदावरी शून्य, सीएलआर ने जताई नाराजगी

सतना में 80 फीसदी गांवों की गिरदावरी शून्य, सीएलआर ने जताई नाराजगीपटवारियों की लापरवाही से बिगड़ी स्थिति: प्रदेश के पांच फिसड्डी जिलों में सतना शामिल

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सतना। ई-उपार्जन, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, फसल हानि संबंधि योजनाओं के लिए अनिवार्य हो चुकी मोबाइल ऐप गिरदावरी के मामले में सतना जिले की स्थिति काफी खराब है। हालात यह है कि यहां के 80 फीसदी गांवों में पटवारियों ने गिरदावरी शुरू ही नहीं की है। अगर यही स्थिति रही आई तो बाद में पटवारियों द्वारा लक्ष्य पूरा करने फर्जीवाड़ा किया जाएगा, जिसका नतीजा आगे इ-उपार्जन में सामने आएगा और किसान पंजीयन और सत्यापन में परेशान घूमेंगे।

अभी पिछली गिरदावरी की हालत खराब होने से इस बार सत्यापन में व्यापक पैमाने पर गड़बड़झाला सामने आ ही चुका है। आयुक्त भू-अभिलेख ने मोबाइल ऐप से की जाने वाली फसल गिरदावरी की समीक्षा में पाया कि प्रदेश के पांच जिले गिरदावरी को लेकर गंभीर नहीं है। इसमें सतना सहित सीधी, सिंगरौली, मुरैना और भिण्ड शामिल हैं। इन सभी जिलों में 80 फीसदी से ऊपर गांवों में गिरदावरी का काम पटवारियों ने शुरू नहीं किया है। जबकि शासन स्तर से इसके निर्देश काफी पहले दिए जा चुके हैं।
सतना जिले की स्थिति देखें तो यहां 80.85 फीसदी गांवों में गिरदावरी का काम शून्य है। 17.22 फीसदी गांवों में 50 फीसदी से कम गिरदावरी का काम हुआ है। 1.47 फीसदी गांव ही ऐसे हैं जहां गिरदावरी का काम 50 फीसदी से ज्यादा हो सका है। जिले में 5 के लगभग गांव ऐसे हैं जहां गिरदावरी 90 फीसदी से ज्यादा है। कुल मिला कर स्थिति देखें तो जिले में गिरदावरी के हालात बदतर है। इस मामले में सीएलआर ने नाराजगी जाहिर की है।

यह होगा नुकसान
कृषि से जुड़ी ज्यादातर योजनाओं को ऑनलाइन करने के बाद इनकी प्रविष्टियां भी ऑनलाइन हो गई है। इसमें इ-उपार्जन, फसल बीमा, किसान क्रेडिट कार्ड, फसल हानि प्रमुख हैं। ऐसे में जरूरी है कि पटवारियों द्वारा गिरदावरी का काम प्रमुखता से करते हुए इसे मोबाइल ऐप के माध्यम से आनलाइन किया जाए। अगर समय पर पटवारियों द्वारा यह प्रविष्टियां नहीं की जाएंगी तो किसानों को विभिन्न शासकीय योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड़ेगा। इसमें समर्थन मूल्य पर फसल खरीदी प्रमुख है।

पटवारियों की लापरवाही
गिरदावरी न होने की पीछे सिर्फ पटवारियों की लापरवाही है। हालांकि इस मामले में जब भी पटवारियों से बात की जाए तो वे तमाम बहाने बनाते दिखते हैं लेकिन स्थिति यह है कि जिले में हर मामले में स्थिति कमजोर है। चाहे सीमांकन की स्थिति देखी जाए या फिर बंटवारे की। कुल मिलाकर जिले के पटवारी मनमानीराज की स्थिति में काम कर रहे हैं और इन पर कोई लगाम भी नहीं है। जिला वैसे भी पटवारियों के मामले में बदनाम रहा है। यहां के पटवारियों का मामला विधानसभा तक पहुंच चुका है।

यह है गिरदावरी
फैसल गिरदावरी प्रतिवर्ष की जाने वाली एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है जो वर्ष में दो बार रबी एवं रबी सीजन की बुवाई के पश्चात की जाती है एवं भूअभिलेखों में दर्ज की जाती है। इसमें पटवारी संबंधित खेत में बोई गई फसल और रकवा का उल्लेख करते हैं। यह जानकारी कई मामलों जैसे फसल बीमा, प्राकृतिक आपदा से हुए नुकसान की भरपायी, बैंक ऋण, योजनाओं के लाभ लेने आदि में महत्वपूर्ण होती है। अगर यह समय पर हो जाती है फसल प्रबंधन, विपणन आदि से संबंधित तैयारियां भी समय पर हो जाती है।