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Shikshakarmi Recruitment Scam: तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ अनिल तिवारी को पांच साल का कारावास

शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाला : तीन आरोपियों की हो चुकी है मौत, छह दोषमुक्त

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video...churu court news: भाजयुमो नेता की हत्या के अभियुक्त को दस वर्ष का कारावास

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सतना. वर्ष 1998 में हुए शिक्षाकर्मी भर्ती घोटाले में सोहावल जनपद पंचायत के तत्कालीन सीइओ अनिल कुमार तिवारी को विशेष न्यायाधीश पीसी एक्ट अनुराग द्विवेदी की अदालत ने पांच साल के कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही 27 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है। मामले में कोर्ट ने 6 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया है। वहीं तीन आरोपियों की सुनवाई के दौरान मौत हो गई थी।
मप्र स्कूल शिक्षा विभाग के 24 जनवरी 1998 के आदेश पर अलग-अलग जिलों में शिक्षाकर्मियों की भर्ती प्रारंभ की गई थी। सतना जिले की जनपद पंचायतों में शिक्षाकर्मियों की भर्ती प्रक्रिया 25 मई 1998 को शुरू की गई थी। सोहावल जनपद में कुल 209 पदों पर भर्ती की गई थी। जिले में शिक्षाकर्मियों की भर्ती में अनियमितता और भ्रष्टाचार कर गलत नियुक्तियां करने की शिकायत मिलने पर लोकायुक्त ने रिपोर्ट दर्ज कर जांच की। बड़े स्तर पर अनियमितता एवं भ्रष्टाचार के साक्ष्य मिलने पर जनपद पंचायत अमरपाटन, सोहावल, रामपुर बाघेलान और मझगवां के अलग-अलग प्रकरण दर्ज किए गए।

साक्षात्कार में दिए थे मनमाने अंक
सोहावल में हुई भर्ती की जांच में सामने आया कि 194 पदों पर विज्ञापन प्रकाशित करने के बाद 14 पद उपसंचालक शिक्षा सतना द्वारा बढ़ा दिए गए। जिसके संबंध में न तो कोई विज्ञापन दिया गया और न ही आरक्षण नियमों का पालन किया गया। जबकि एक पद के लिए तीन अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाया जाना चाहिए था लेकिन तीन से अधिक अभ्यर्थियों को साक्षात्कार के लिए बुलाना पाया गया। सामान्य प्रशासन समिति और स्थायी शिक्षा समितियों के अध्यक्ष, सदस्यों द्वारा अपने परिजनों, रिश्तेदारों को नियम विरूद्ध साक्षात्कार में बुलाया गया। अयोग्य होने के बाद भी साक्षात्कार में मनमाने अंक देकर चयनित किया गया।

34 गवाहों के दर्ज कराए गए बयान
जंांच में मप्र पंचायत शिक्षाकर्मी भर्ती तथा सेवा शर्तें नियम 1997 उल्लंघन मिलने पर तत्कालीन जनपद पंचायत सीईओ अनिल कुमार तिवारी निवासी खरहरी सेमरिया रीवा, तत्कालीन ब्लाक एजुकेशन आफीसर सूर्यबली त्रिपाठी और 8 अन्य लोगों के विरूद्ध धारा 420, 120बी, 467, 468, 471 और धारा 13 (1) डी, 13 (2) के तहत 28 अक्टूबर 2006 को अदालत में चालान पेश किया गया। विचारण के दौरान तत्कालीन बीइओ सूर्यबली त्रिपाठी सहित तीन आरोपियों की मृत्यु हो गई। मामले में शासन की ओर से अभियोजन अधिकारी फखरूददीन ने पक्ष रखा। कुल 34 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए। आरोप प्रमाणित पाए जाने अदालत ने तत्कालीन सीइओ अनिल कुमार तिवारी को धारा 120 बी में दो साल का कारावास, दो हजार रुपए अर्थदंड, 467 में पांच साल का कारावास, 10 हजार रुपए अर्थदंड, 468 में तीन साल का कारावास, दस हजार रुपए अर्थदंड, 471 में दो साल की सजा व पांच हजार रुपए अर्थदंड से दंडित किया ।