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karva chauth: पूजा की थाली में जरूर होनी चाहिए ये खास चीजें, वरना नहीं मिलेगा पुण्य

करवा चौथ: पूजा की थाली में जरूर होनी चाहिए ये खास चीजें, वरना नहीं मिलेगा पुण्य

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सतना

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Suresh Mishra

Oct 26, 2018

karva chauth pooja vidhi in madhya pradesh

karva chauth pooja vidhi in madhya pradesh

सतना। हिंदू धर्म में करवा चौथ का बहुत बड़ा महत्व है। यह पर्व इस वर्ष 27 अक्टूबर को पड़ रहा है। मान्यता है कि इस दिन शादीशुदा महिलाएं पूरे दिन भूखे और प्यासे रहकर अपने पति के लिए व्रत रखती हैं। कहते हैं कि करवा चौथ का उपवास रखने से पति के जीवन से संकट दूर होकर उसकी आयु लंबी होती है। इसी मान्यता के चलते यह त्योहार बहुत प्रचलित है। करवा चौथ व्रत जितना प्रसिद्ध है उतना ही कठिन भी है। क्योंकि इस दिन महिलाएं पानी तक नहीं पीतीं है। इस व्रत में करवा माता, श्री गणेश और शिव-पार्वती की पूजा का विधान है। अलग-अलग क्षेत्रों में वहां की मान्यता और परंपरा के अनुसार ही पूजा होती है।

करवा चौथ पर पूजन सामग्री
- करवा माता की पूजा के लिए देवी-देवताओं की तस्वीर होनी चाहिए।
- पूजा के लिए रुई और घी का दीपक लगाना चाहिए।
- इसके साथ ही अबीर, गुलाल, कुमकुम, हल्दी, मेहंदी, कलावा, जनेउ जोड़ा (गणेशजी और शिव जी के लिए), फूल, अक्षत (चावल), चंदन, इत्र, अगरबत्ती और नारियल होना चाहिए।
- माता जी को नैवेद्य लगाने के लिए मिठाई भी रखें।
- खील से भरे करवे रखे जाते हैं। मीठी मट्ठी का भी महत्व बताया गया है।
- सुहाग से जुड़ी चीजें जैसे-बिंदी, सिंदूर, चूडिय़ां होती हैं।
- सास या घर में मौजूद बुजुर्ग महिला के लिए कपड़े भी रखे जाते हैं।
- करवा माता की पूजा और कथा पढऩे के बाद ये सारी सामग्री अपनी सास या घर की बुजुर्ग विवाहित महिला को दी जाती है।

थाली में होनी चाहिए ये खास चीजें
- करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन करने के बाद पूजा और अघ्र्य के समय आपकी थाली में ये खास चीजें होनी चाहिए।
- जिसमें अबीर, गुलाल, कुमकुम, हल्दी, मेहंदी, कलावा, जनेउ जोड़ा, फूल, अक्षत (चावल), चंदन और अगरबत्ती घी का दीपक।
- चंद्र दर्शन के लिए छलनी।
- चंद्रमा को अघ्र्य देने के लिए करवे में जल।
- व्रत खोलने के लिए पानी और मिठाई।

ऐसे की जाती है पूजा
- करवा चौथ पर चंद्रमा को अघ्र्यं देने से पहले भगवान गणेश, शिव-पार्वंती और करवा माता की पूजा की जाती है।
- उसके बाद करवा चौथ व्रत की कथा या कहानी सुनी जाती है।
- मान्यताओं और परंपरा के अनुसार ये पूजा कहीं दिन में और कहीं शाम को चंद्रमा की पूजा से पहले होती है।
- इस दौरान पूजा की सामग्री में ये चीजें जरूर मानी गई हैं।