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ईएनसी ने जारी किया नोटिस: सीवरेज का काम कर रही केके स्पन कंपनी को ब्लैक लिस्टेड करने की तैयारी

70 फीसदी लक्ष्य के विरुद्ध 9 फीसदी ही किया काम

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kk spun company ko blacklisted karne ki taiyari

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रमाशंकर शर्मा@सतना। अमृत योजना के तहत नगर निगम में सीवरेज का काम कर रही केके स्पॉन को ब्लैकलिस्टेड करने की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। इस संबंध में मुख्य अभियंता ने ठेका कंपनी के एमडी को नोटिस जारी किया है। कंपनी को 5 दिसंबर 2016 में कार्यादेश जारी किया गया था और इसकी कार्य पूर्णता अवधि 36 माह थी। इस हिसाब से अभी तक ठेका कंपनी को 70 फीसदी काम कर लेना चाहिए था, लेकिन कंपनी ने अब तक महज 9 फीसदी ही काम पूरा किया है। कंपनी के काम करने के तरीके से शहर में जहां आए दिन विवाद की स्थिति बन रही है वहीं परियोजना के क्रियान्वयन में अपूर्णनीय क्षति भी हुई है।

इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्य अभियंता ने कंपनी के एमडी को अंतिम अवसर देते हुए 15 दिन में जवाब चाहा है। चेताया है कि समय पर उत्तर नहीं मिलने पर फर्म को ब्लैकलिस्टेड कर दिया जाएगा। सीवरेज के काम को लेकर निगमायुक्त और कलेक्टर भी इसके विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को लिख चुके हैं। मुख्य अभियंता ने केके स्पॉन के एमडी प्रमोद गुप्ता को दिए शोकॉज में बताया गया है कि ठेका अनुबंध की शर्तों के मुताबिक अनुबंध तिथि के 30 दिन के अंदर कार्य करने का वर्क प्लान प्रस्तुत करना था पर फर्म ने 5 माह से ज्यादा अर्थात 170 दिन में वर्क प्लान प्रस्तुत किया।

नहीं शुरू किया सीवेज शोधन संयत्र का काम
सीवरेज परियोजना का कार्यादेश जारी हुए 2 साल गुजर चुके हैं पर ठेका कंपनी केके स्पॉन ने अभी तक योजना के तहत आने वाले प्रमुख घटक सीवेज शोधन संयंत्र का काम प्रारंभ नहीं किया है। जबकि इसके लिए नगर निगम की ओर से कई बार नोटिस जारी की जा चुकी है। इसे भी मुख्य अभियंता ने आपत्ति जनक माना है। स्थिति तो यह है कि अभी तक इसका डिजाइन ही स्वीकृत के लिए प्रस्तुत नहीं किया गया है। इसमें 18 माह का विलंब हो चुका है।

डिजाइन के नाम पर खेल
मुख्य अभियंता ने बताया कि सीवरेज परियोजना को तीन जोन में बांटा गया है। जोन 1 की सीवर नेटवर्क की जो डिजाइन पहली बार दी गई उसके 4 माह बाद ही दूसरी डिजाइन प्रस्तुत की गई। यह डिजाइन पहली डिजाइन से पूरी तरह अलग मिली। इसकी प्रति प्रस्तुत करने में भी 4 माह का विलंब किया गया। जोन 2 और जोन 3 के सीवर नेटवर्क की जो डिजाइन अप्रैल 2018 में प्रस्तुत की, उसमें गड़बडिय़ां थी। इसे सुधार कर प्रस्तुत करने में तीन माह और लगा दिए गए।

वर्क प्लान की उड़ाई धज्जियां
मुख्य अभियंता ने कहा कि फर्म के वर्क प्लान के मुताबिक हर माह 25 किमी सीवर लाइन बिछाने का लक्ष्य तय किया गया था। लेकिन 17 माह गुजरने के बाद कुल काम ही 63 किलोमीटर का किया गया। जो दिए गए लक्ष्य 300 किमी का महज 21 फीसदी है और अनुबंध लक्ष्य 495 किमी का महज 13 फीसदी है।

निगम के नोटिस पर भी गंभीर नहीं
मुख्य अभियंता ने बताया कि काम की धीमी गति होने पर नगर निगम से जून 2017 एवं अप्रैल 2018 में शो-कॉज जारी किए गए। लेकिन, इसके बाद भी काम में प्रगति नहीं आई। यह भी पाया गया कि कार्य के लिए अनुभवी और निपुण अभियंता तथा कार्यकुशल सुपरवाइजर तक नहीं रखे गए।

सरकारी की प्रतिष्ठा धूमिल हुई
मुख्य अभियंता ने कहा कि फर्म आयुक्त नगरीय प्रशासन की समीक्षा बैठक में दिए गए अपने आश्वासन को पूरा नहीं कर सकी। इस तरह से फर्म ने भारत सरकार की महत्वाकांक्षी अमृत परियोजना के क्रियान्वयन में अपूर्णनीय क्षति की है तो मध्यप्रदेश सरकार की प्रतिष्ठा को भी कम किया है। फर्म की लापवाही से साबित हो रहा है कि योजना को पूर्ण करने में भी कोई रुचि नहीं है। फर्म के ठेकेदारी पंजीयन को निरंतर रखना शासन हित में भी नहीं है।