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MP में सक्रिय हुआ मानसून, 24 घंटे में 26.5 मिमी. वर्षा दर्ज

गर्मी से राहत, किसानों के चेहरे पर मुस्कान

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latest update of monsoon active in satna madhya pradesh

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सतना। जिले में मानसून सक्रिय हो गया है। बीती रात से जिलेभर में रुक-रुक कर बारिश जारी हैं। रात में कई दौर की बारिश हुई। सुबह भी बादल छाए रहे। दोपहर फिर रिमझिम बारिश दर्ज की गई। बीते 24 घंटे में शहर में 26.5 मिली मीटर बारिश हुई। उमस भरी गर्मी से राहत महसूस की गई। तापमान में गिरावट आई। बावजूद, झमाझम बारिश का इंतजार हैं। किसानों के चेहरे खिल उठे हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, विंध्य में मानसून की आमद कमजोर है। अभी जोरदार बारिश के आसार नहीं हैं। शुक्रवार को धूप छाव जारी रहेगी। हल्की बारिश हो सकती है। अगले दो तीन दिन में मानसून जोर पकड़ेगा। जुलाई के प्रथम सप्ताह में रीवा संभाग में जोरदार बारिश होने की संभावना है।

बोवनी में तैयारी में जुटे किसान
मानसून की बारिश शुरू होते ही किसान खरीफ की बोवनी में जुट गए हैं। हालांकि अभीइतनी बारिश नहीं हुई की बोवनी कर सके। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि, किसान जल्दबाजी न करे। चार इंच बारिश होने के बाद ही बिजाई करे। नहीं तो अंकुरण की संमस्या हो सकती है। एेसे में बोवनी के लिए तीन चार दिन और बारिश का इंतजार करना पड़ सकता है। तापमान में गिरावट आने से धान की रोपणी लगाने का यह उपयुक्त समय है। किसान धान की रोपणी डाल सकते हैं।

कॉलोनियों से सड़कों तक जलभराव, घुटने तक पानी
मानसून की पहली बारिश में ही जल निकासी की तैयारियों के दावों की पोल खुल गई। शहर में महज 25 मिमी बारिश में ही सड़कें जलमग्न हो गईं। निगम प्रशासन द्वारा बारिश पूर्व की गई तैयारियों के बावजूद, बीते 24 घंटे में हुई बारिश से ज्यादातर सड़कें पानी, गंदगी व कीचड़ से पट गईं। राह चलना मुश्किल हो रहा है। पॉश कालोनी हो, बाजार या प्रमुख मार्ग कहीं पर भी जल निकासी के प्रबंध कारगर नहीं रहे। कालोनियों की ज्यादातर सड़कें पानी में डूबी हैं।

40 फीसदी शहर में जलभराव
नगर निगम प्रशासन पानी निकासी के लिए कालोनियों में हर साल दस करोड़ से अधिक की नालियों का निर्माण कराता है। लेकिन बारिश आते ही नालियां गायब हो जाती है। गुरुवार को जल निकासी व्यवस्था का जायजा लेने निकली पत्रिका टीम को ज्यादाता जगहों पर सड़क पर जल भराव मिला। घुटने तक भरे पानी में लोग चप्पल-जूता हाथ में लेकर चलते मिले। रहवासियों के अनुसार 40 फीसदी कालोनियों में जल निकासी के प्रबंध नहीं हैं।

पुरानी पर नई नाली का निर्माण
शहर विकास में हर साल करोड़ों रूपए उड़ा रहे निगम इंजीनियरों के पास जल निकासी का कारगर उपाय नहीं हैं। हर साल नाली के ऊपर नाली का निर्माण करा रहे है। बीते एक साल में जिन स्थानों पर नालियों का निर्माण कराया गया। वहां पहले से नाली बनी था। जिन कालोनियों में जल निकासी के उचित प्रबंधन नहीं है वहां आज तक पक्की नालियों का निर्माण नहीं कराया गया।

एनीकेट के 43 में से 22 गेट खोले गए
बारिश को देखते हुए जल भंडारण जोन एनीकेट के 43 में से 22 गेट खोले जा चुके हैं। नगर निगम के जलकर शाखा ने यह निर्णय बारिश के मद्देनजर लिया गया। गौरतलब है, हफ्तेभर पहले 4 गेट जलकर महकमे ने खोले थे। अब आधी संख्या में गेट खोल दिये गए है। जिससे आने वाला क्षति न पहुंचा सके। और बारिश होगी तो सभी गेट खोल दिए जाएंगे। जानकारी मुताबिक एनीकट ओवर फ्लो होकर गेट को नुकसान सकता था। इससे बचने के लिये गेट खोले गये हैं।

नदी से आ रहा पानी
अभी बारिश कम हुई है लेकिन आसपास के दूसरे जिलों में हुई बारिश का पानी नदियों के जरिये एनीकेट में पिछले 10 दिनों से पहुँच रहा था। रोजाना 50 सेमी पानी एनीकेट में जलस्तर बढ़ रहा है। जबकि गर्मी में निगम को बाणसागर से पानी लेना पडा था। बारिश के 3 महीने के बाद वापस जून तक के लिए एनीकेट में पानी रोकने के लिए सभी 43 गेट बंदकर दिए जाएंगे। जिससे शहर की पेय जल व्यवस्था को निरन्तर बनाये रखने के लिए पानी का स्टोरेज हो सके। उल्लेखनीय है कि, 4 मीटर का एनीकेट शहर की प्यास बुझाता है।

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