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एक दिन पहले तेंदुए को जंगल से रेस्क्यू कर जू में छोड़ा, अगले दिन संदिग्ध मौत

-उचेहरा रेंज के जंगल से तेंदुए का रेस्क्यू कर जू में छोड़ा था-तेंदुए को मृत अवस्था में देख जू प्रबंधन के छूटे पसीने-चुपचाप से पीएम कराकर जला दिया तेंदुए का शव -महफूज रखने के लिए लाए थे, फिर कैसे हुई मौत?

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एक दिन पहले तेंदुए को जंगल से रेस्क्यू कर जू में छोड़ा, अगले दिन संदिग्ध मौत

सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिले के उचेहरा रेंज के धनिया बीट के जंगल से एक दिन पहले ही रेस्क्यू किए गए नर तेंदुए की अगले दिन ही मुकुंदपुर जू सेंटर में मौत हो गई। तेंदुए को मृत अवस्था में देखकर जू-प्रबंधन समेत वन विभाग के आला अधिकारियों के पसीने छूट गए। जू सेंटर में तेंदुए की मौत ने जू-प्रबंधन पर कई सवाल खड़े कर दिये हैं। वन अफसरों के मुताबिक, जब एक दिन पहले रात में तेंदुएं का रेस्क्यू बिना किसी चौट लगे सफलतापूर्वक किया गया था, उस दौरान हुई जांच में में तेंदुआ पूरी तरह स्वस्थ भी था, तो उसकी मौत कैसे हो गई? क्या रेस्क्यू के दौरान ट्रेंकुलाइज करने में किसी प्रकार की गडबड़ी हुई, जो तेंदुए के मौत का कारण बनी। इन सवालों के जवाब न तो जू प्रबंधन के पास है और न ही वनमंडलाधिकारी के पास।

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गुपचुप तरीके से पीएम करा कर जलाया

महाराजा मार्तण्ड सिंह जू सेंटर में धनिया से रेस्क्यू कर लाए गए तेंदुए को मृत देखकर अफसरों के पैरों तले जीमन खिसक गई। जू-प्रबंधन ने आनन-फानन में वन मंडलाधिकारी को घटना की जानकारी देकर अवगत कराया। मुकुंदपुर जू सेंटर में ही तेंदुए का पोस्ट मार्टम करा कर गुपचुप तरीके से जला भी दिया गया। इस पूरे घटनाक्रम की खबर मुकुंदपुर-जू सेंटर के चार दीवारी के बाहर न जाए इसको लेकर भी वरिष्ठ अफसरों ने अपने मातहतों को निर्देश दे डाले। फिर क्या जू प्रबंधन समेत अन्य अधिकारी-कर्मचारियों के मुंह में ताले पड़ गए। कोई भी इस घटना के बारे में बताना तो दूर फोन उठाना भी मुनासिब नही समझ रहा।

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धनिया से रेस्क्यू कर मुकुंदपुर लाए गए नर तेंदुए की उम्र तकरीबन 10 साल बताई जा रही थी, जिसका वजन लगभग 65-70 किलो बताया जा रहा है। धनिया में पिंजरे के अंदर कैद हुआ तेंदुआ शनिवार को जीवित अवस्था में बाहर नहीं निकल सका जू-प्रबंधन और डॉक्टरों की टीम ने ये निर्णय लिया था कि, शनिवार की दोपहर तक सामान्य स्थिति होने पर पिंजरे से बाहर निकाला जाएगा। लेकिन, इसके पहले ही तेंदुआ इस दुनिया को अलविदा कह गया।

महफूज रखने के लिए लाए फिर मौत कैसे?

उचेहरा रेंज के धनिया में तेंदुए की हरकते देख वन विभाग को यह चिंता सताने लगी कि कहीं यह तेंदुए किसी पर हमला न कर दे या फिर तेंदुए को ही मानव जाति किसी प्रकार का नुकसान न पहुंचा दे। इन सब बातों को लेकर वन मंडलाधिकारी राजेश राय ने वाइल्ड लाइफ अफसरों से संपर्क कर रेस्क्यू करने की अनुमति हासिल कर ली। मंशानुसार तेंदुए को रेस्क्यू कर मुकुंदपुर ले जाया गया लेकिन वहां भी उसकी जान नही बच पाई। अगर तेंदुए को रेस्क्यू कर मुकुंदपुर न ले जाया गया होता तो आज वह जिदंा होता।

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पहले भी जू प्रबंधन पर उठ चुके हैं कई सवाल

मुकुंदपुर-जू सेंटर में जितनी तेजी के साथ वन्यप्राणियों की संख्या बढ़ रही है, उतनी ही तेजी से मौत के बाद वन्यजीवों की संख्या घट भी रही है। इसकी वजह कुछ और नहीं बल्कि जू-प्रबंधन का लापरवाह रवैय्या है। जू-सेंटर में होने वाली मौत को लेकर हमेशा से ही सवाल उठते रहे हैं। इसी साल यहां दुर्गा और देविका की मौत भी रहस्यमयी तरीके से हुई थी। हर दफा जू-प्रबंधन अपनी नाकामी छिपाने के लिए वरिष्ठालय के अफसरों से झूठ पर झूठ बोल कर गुमराह कर देता है।


किसी काम का नही वन महकमा

जंगल और वन्यप्राणियों को बचाने की जिम्मेंदारी संभालने वाले वन अफसरों के कंधों में शायद इतना दम नहीं है कि, वो इस भारी भरकम जिम्मेंदारी को संभाल सकें। लगातार वन्यप्राणियों के मौत का सिलसिला रोकने में कामयाब हो सके। सरकार बाघ, तेंदुए जैसे अनगिनत वन्यप्राणियों की सुरक्षा के नाम पर हर साल लाखो-करोड़ों रुपए का बजट फूंक रही है, लेकिन अफसरों के नकारेपन की वजह से आए दिन वन्यजीव मौत की आगोश में समाते जा रहे हैं। सतना वन मंडल के मझगंवा रेंज में 20 सितंबर को एक बाघ की मौत हो गई, तो वहीं शनिवार को फिर वन अफसरों की लापरवाही से एक तेंदुए ने चाक चौबंद व्यवस्था के घेरे में दम तोड़ दिया। इससे स्पष्ट है कि, वन महकमा अपनी जिम्मेदारियों को लेकर लापरवाह है।

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धनिया में शरु हुआ ट्रैप कैमरे का खेल

धनिया बीट के जंगल में एक ग्रामीण और वन रक्षक को घायल करने वाली बाघिन की तलाश में वन विभाग की टीम बीते तीन दिनों से लगी है, लेकिन सफलता हाथ नहीं लगी। हाथ लगा तो शुक्रवार को एक नर तेंदुआ जो रेस्क्यू के बाद भी इस दुनिया को अलविदा कह गया। दो लोगो पर हमला करने वाली बाघिन ही है इसकी पुष्टि के लिए वन विभाग ट्रैप कैमरे की मदद से लोगो के सवालों का जवाब देने का प्रयास कर रहा है। क्योंकि, अब तो ये कहा जा रहा है कि, बाघिन ने नहीं बल्कि तेंदुए ने ही दोनों लोगो को हमला कर घायल किया था, लेकिन वन-विभाग के अफसर अब तक पगमार्क ही नहीं पहचान पा रहे।


तेंदुए की मौत पर उठ रहे हैं ये सवाल?

- मौत का कारण अब तक सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया?

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