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कोर्ट का फैसला: नि:शक्त के साथ दुष्कर्म करने वाले रिश्तेदार को आजीवन कारावास की सजा

पांच हजार रुपए के अर्थदंड से किया दंडित

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सतना. चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश दीपिका मालवीय की कोर्ट ने नि:शक्त दूर के रिश्ते की नाबालिग भतीजी से दुष्कर्म करने वाले चाचा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। कोर्ट ने आरोपी को पांच हजार रुपए के अर्थदंड से भी दंडित किया है। अभियोजन की ओर से जिला अभियोजन अधिकारी रामपाल सिंह ने पक्ष रखा। पीआरओ अभियोजन फखरुद्दीन ने बताया कि 6 मई 2016 को पीडि़ता की मां ने महिला थाना में शिकायत दर्ज कराई कि उसकी बेटी नाबालिग है।

आरोपी ने नाबालिग से किया था ज्यादती
वह बोल और सुन नहीं पाती। 5 मई 2016 की रात ९ बजे उसका मुंहबोला देवर अंगद उर्फ नीतू वर्मा घर आया। इस दौरान वह पानी लेने के लिए नल चली गई। जब वह पानी लेकर लौटी तो अंगद उसे देखकर जल्दी-जल्दी भागने लगा। उसे आशंका हुई लेकिन वह समझ नहीं पाई। जब वह अपनी नि:शक्त बेटी को नहलाने ले गई तो पाया कि उसके अंत: वस्त्र खून से सने हैं। उसने नि:शक्त बेटी से पूछा तो उसने इशारे से बताया कि अंगद ने उससे दुष्कर्म किया है। पुलिस ने अंगद के खिलाफ पास्को अधिनियम 5/6 और भादसं की धारा ३७६ के तहत प्रकरण कायम कर जांच आरंभ की।

पीडि़ता को प्रतिकर राशि देने के आदेश
विवेचना पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ न्यायालय में आरोप पत्र पेश किया गया। अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्य एवं गवाहों ने मामले को प्रमाणित किया। चतुर्थ अपर सत्र न्यायाधीश ने आरोपी अगंद कुमार वर्मा उर्फ नीतू वर्मा पिता भूरा प्रसाद चौधरी निवासी सुसुआर थाना कोठी के खिलाफ नि:शक्त नाबालिग से दुष्कर्म का आरोप साबित होने पर आजीवन कारावास की सजा सुनायी। आरोपी पर पांच हजार का अर्थदंड भी लगाया। यह राशि अभियोत्री को प्रतिकर के रूप में देने को आदेशित किया।