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सतना। दुनियभर में विभिन्न शारीरिक लक्षणों से युक्त मनुष्य पाए जाते हैं जिनका भविष्य भी शारीरिक लक्षणों के अनुसार भिन्न-भिन्न होता है। ज्यातार पुरुष चाहते हैं कि उनका विवाह ऐसी स्त्री से हो, जो भाग्यशाली हो व कुल का नाम ऊंचा करने वाली हो, लेकिन सामान्य रूप से किसी स्त्री को देखकर इस बारे में विचार नहीं किया जा सकता।
क्योंकि सुंदर दिखने वाली स्त्री कुटिल भी हो सकती है, वहीं साधारण सी दिखने वाली स्त्री संस्कारी हो सकती है। ज्योतिष के अंतर्गत एक ऐसी विधा भी है जिसके अनुसार किसी भी स्त्री के अंगों पर विचार कर उसके स्वभाव व चरित्र के बारे में काफी कुछ आसानी से जाना सकता है। इस विधा को समुद्र शास्त्र कहते हैं। इस विधा का संपूर्ण वर्णन सामुद्रिक शास्त्र में मिलता है।
पं. मोहनलाल द्विवेदी के अनुसार, सामुद्रिक शास्त्र की रचना भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय ने की है। इस ग्रंथ के अनुसार, आज हम आपको कुछ ऐसे लक्षणों के बारे में बता रहे हैं, जिसे देखकर सौभाग्यशाली स्त्रियों के विषय में आसानी से विचार किया जा सकता है।
इस तरह होती है पहचान
1. जिस स्त्री के मुख की आक्रति गोल होती है। वह परम सौभाग्यशाली होती है। तथा अपने पति को जीवन के उच्चतम शिखर पर पहुंचाने वाली होती है।
2. जिस स्त्री के गाल भरे होते है वह धनवान होती है।
3. जिस स्त्री का दाहिना स्तन बड़ा होता है वह स्त्री पुत्र सुख को प्राप्त करने वाली होती है।
4. सभी स्त्रीयों एक स्तन बड़ा और एक स्तन छोटा होता है। सिर्फ तुला राशि की स्त्रीयों के दोनो स्तन बराबर होतो है।
5. जिस स्त्री के पेट पर तीन बलय रेखाएं हो। वह स्त्री मायके पक्ष और ससुराल पक्ष दोनों की कुल दीपक होती है।
6. जिस स्त्री की नाभि वरतुलाकार एवं गहरी होती है। वह जीवन में सभी सुखों को प्राप्त करती है।
7. जिस स्त्री के नितम्ब मेढ़क के समान होते है वह स्त्री महाभाग्यशाली एवं बहुत धनवान होती है।
8. जिस स्त्री की जंघाएं पुष्ट, कुंडलिया गोल होती है वह जीवन के सभी सुखों को प्राप्त करती है।
9. जिस स्त्री के पांव के तलबे नरम, मुलायम, साफ-सुधरे, बिना कटे फटे होते है। वह स्त्री परम एश्वर्य वाली होती है।
10. जिस स्त्री के कान बड़े होते है। वह स्त्री दीघार्यु एवं दीर्घजीवी होती है।
समुद्र शास्त्र में इन चीजों का वर्णन
समुद्र शास्त्र में पुरुषों और महिला दोनों की जानकारी के बारे में बताया गया है। जैसे हस्त रेखा, जन्म कुंडली, वास्तु विज्ञान, शरीर, अंग लक्षण विज्ञान, मुखाक्रति विज्ञान, पांव रेखा शास्त्र, मुहूर्त शास्त्र, स्वप्र शास्त्र और सगुन शास्त्र आदि का वर्णन किया गया है। पं. मोहनलाल द्विवेदी की मानें तो वेद के ६ अंग है। जिसमें ज्योतिष प्रमुख अंग है।
मां शारदा धाम मैहर के पंडित की जुबानी
पं. मोहनलाल द्विवेदी वास्तु एवं ज्योर्तिविद मां शारदा धाम मैहर ने बताया कि वास्तविकता में समुद्र शास्त्र समुद्र की तरह है। जिसकी न कोई थाह है न ही कोई आकार। यह अनंत अखण्ड है। जिसमे मनुष्य चाहे जितना अध्ययन करते चला जाए। उसकी कोई सीमा नहीं है। समुद्र शास्त्र वह शास्त्र जिस शास्त्र में किसी भी मनुष्य के सबंध में यानी स्त्री-पुरुष की समस्त जानकारी प्राप्त की जा सकती है। जैसे भूत, भविष्य, वतर्मान, स्वभाव, चरित्र, इच्छाएं, सोचने की शौली, शक्ति , मानसिक स्थिति, शारीरिक स्थिति, आर्थिक स्थिति आदि का पता लगाया जा सकता है।
Published on:
21 Mar 2018 01:33 pm
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