
maa sharda devi maihar history in hindi Unique story of sharda Temple
सतना। मध्य प्रदेश के सतना जिला अंतर्गत मैहर त्रिकूट पर्वत की चोंटी के बीच में ही शारदा माता का मंदिर है। भक्त यहां 1063 सीढिय़ां लांघ कर माता के दर्शन करने जाते हैं। करीब 10 वर्ष पहले शासन द्वारा रोपवे की भी व्यवस्था बना दी गई है। मैहर नगर से महज 5 किमी. दूर इस मंदिर को मैहर देवी का मंदिर भी कहा जाता है। यहां माता के साथ देवी काली, दुर्गा, श्री गौरी शंकर, शेष नाग, श्री काल भैरवी, भगवान, फूलमति माता, ब्रह्म देव, हनुमान जी और जलापा देवी की भी पूजा की जाती है। कहा जाता है कि पूरे भारत में अकेला मैहर एक ऐसा मंदिर जहां पर अमरत्व का वरदान मिलता है। इसी माई की महिमा को सुनकर देशभर के भक्त दौड़े चले आते है।
मां शारदा के परम भक्त है आल्हा-उदल
अल्हा और उदल शारदा माता के बड़े भक्त हुआ करते थे। आल्हा और उदल वही हैं जिन्होनें पृथ्वीराज चौहान के साथ युद्ध किया था। ऐसा कहा जाता है कि इन दोनों के द्वारा ही सबसे पहले जंगलों के बीच शारदा देवी के मंदिर की खोज की गई थी। फिर आल्हा ने इस मंदिर में 12 सालों तक तपस्या की। जिससे प्रसन्न होकर देवी ने उन्हें अमरत्व का आशीर्वाद दिया था। आज भी यह मान्यता है कि माता शारदा के दर्शन हर दिन सबसे पहले आल्हा और उदल ही करते हैं।
मंदिर के पीछे कुश्ती लड़ते थे दोनों भाई
मैहर मंदिर के प्रधान पुजारी देवी प्रसाद बताते है कि, माई के मंदिर के पीछे जो पहाड़ों के नीचे एक तालाब है। उसे आल्हा तालाब कहते है। तालाब से 2 किलोमीटर आगे जाने पर एक अखाड़ा मिलता है, जिसके बारे में ये मान्यता है कि यहां आल्हा और उदल कुश्ती लड़ा करते थे। इस अखाड़े पर दोनों भाईयों ने देश-दुनियां के पहलवानों को अपना दांव पेंच दिखा चुकें। कहानियों में बताया गया है कि दोनों भाई इतने बड़े बलशाली थे कि कभी किसी से नहीं हारे है।
ये है फैक्ट्स
- त्रिकूट पर्वत पर मैहर देवी का मंदिर भू-तल से ६ सौ फिट की ऊंचाई पर स्थित है।
- मंदिर तक जाने वाले मार्ग में तीन सौ फीट तक की यात्रा गाड़ी से भी की जा सकती है।
- माता शारदा की मूर्ति की स्थापना विक्रम संवत 559 में की गई थी।
- मूर्ति पर देवनागरी लिपि में शिलालेख भी अंकित है।
- बताया गया है कि सरस्वती के पुत्र दामोदर ही कलियुग के व्यास मुनि कहे जाएंगे।
- दुनिया के जाने-माने इतिहासकार ए कनिंग्घम ने इस मंदिर पर विस्तार से शोध किया है।
- अब शारदा प्रबंध समिति द्वारा रोप-वे की व्यवस्था बनाई गई है।
Published on:
09 Apr 2019 05:16 pm
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