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पुलिस की बड़ी चूक, रास्ते से गायब हो गईं अपराधों की 30 से ज्यादा फाइलें

रात भर रेलवे कॉलोनी में तलाश करती रही पुलिस, कोर्ट मुंशी की बाइक से गायब हो गया फाइलों को बस्ता, कोलगवां थाना पुलिस की मुसीबत बढ़ी

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सतना. कोलगवां थाना पुलिस की 30 से अधिक केस डायरियां लापता हो गई हैं। कहा जा रहा है कि यह डायरियां एक बस्ते में बंधी थीं और बस्ता सिविल लाइन से सिटी कोतवाली के बीच चलती गाड़ी से गिर गया है। खबर है कि शनिवार की शाम यह बस्ता गायब हुआ है जो काफी तलाश के बाद भी नहीं मिल सका है। बस्ता गुमने की वजह से पुलिस अधिकारियों की चिंता भी बढ़ती जा रही है। बस्ते के गुमने के बाद सवाल खड़ा हो गया है कि केस डायरी, चालान और रिमांड डायरी सहित अन्य जरूरी कागजातों से भरा यह बस्ता वाकई कहीं गिर कर गुम हो गया है या इसके गायब होने के पीछे कोई और कहानी है?
कोर्ट मुंशी की लापरवाही
कोलगवां थाना के प्रधान आरक्षक रवि शंकर शुक्ला की ड्यूटी अदालत संबंधी कार्यों के लिए लगी है। इसीलिए पुलिस भी भाष में इन्हें कोर्ट मुंशी भी कहते हैं। मालूम हुआ है कि शनिवार 23 नवंबर को शाम करीब पौने 6 बजे जब वे जिला न्यायालय परिसर से निकल कर रेलवे कॉलोनी के रास्ते सीएसपी कार्यालय के लिए अपनी राजदूत मोटर साइकिल से जा रहे थे तब उनके पास मौजूद बस्ता कहीं गुम हो गया। लाल रंग के कपड़े से बना फाइलों का यह बस्ता उन्होंने अपनी मोटर साइकिल में पीछे बांध रखा था।
अंधेरी पुलिया के पास तलाश
यह जानकारी सामने आई है कि कोर्ट मुंशी रवि शंकर शुक्ला न्यायालय से निकल कर रेलवे ब्रिज के नीचे से होते हुए अंधेरी पुलिया को पार कर कोतवाली की ओर जा रहे थे। अंधेरी पुलिया से बाहर निकलते ही उन्होंने पीछे मुड़कर देखा तो बस्ता गायब था। फौरन उन्होंने मोटर साइकिल घुमाई और पूरे रास्ते में बस्ते को तलाश किया। मगर बस्ता कहीं नहीं मिला। न्यायालय में जाकर भी बस्ते को ढूंढा और विभागीय कर्मचारियों से पूछताछ भी की मगर बस्ते के संबंध में कोई जानकारी नहीं मिली। तब इसकी सूचना प्रभारी थाना प्रभारी उप निरीक्षक आरपी त्रिपाठी को फोन पर दी गई। सूत्र बताते हैं कि एसआइ त्रिपाठी को जैसे ही बस्ते के गुम होने की सूचना मिली वे थाना वाहन से दलबल सहित अंधेरी पुलिया पर पहुंचे। दूसरी ओर से सिटी कोतवाली पुलिस का बल भी वहां पहुंच गया। दोनों थानों की पुलिस ने मुख्य सड़क से लेकर आसपास के झाड़ झंकार तक खंगाल डाले मगर बस्ता हाथ नहीं लगा। लगातार दूसरे दिन रविवार को भी बस्ते की तलाश होती रही। फिलहाल बसते के मिलने की कोई सूचना नहीं है। अंधेरी पुलिया के आसपास रहने वाले लोगों से भी पूछताछ की गई है मगर कोई जानकारी नहीं मिली है।
कई बड़े मामलों की डायरी
सूत्रों की माने तो बस्ते के अंदर बाल गोविंद चौधरी पिता बिहारीलाल चौधरी उम्र 45 वर्ष निवासी बारी खुर्द थाना कोलगवां सतना से संबंधित कुछ कागजात थे। बाल गोविंद चौधरी को लगभग एक पखवाड़ा पूर्व पुलिस ने गिरफ्तार किया था। तीन- चार दिन पूर्व उसकी जमानत मंजूर हो गई है। सूत्रों के मुताबिक बाल गोविंद के विरुद्ध दर्ज आईपीसी की धारा 452 एवं 25/27 आम्र्स एक्ट के मामले के कागजात इस बस्ते के अंदर थे। बाल गोविंद के खिलाफ आईपीसी की धारा 452 के तहत अपराध क्रमांक 975/19 एवं आम्र्स एक्ट की धारा 25/27 के तहत अपराध क्रमांक 1294/19 दर्ज किया गया था। बस्ते के अंदर इन अपराधों की केस डायरी नहीं थी लेकिन रिमांड संबंधी दस्तावेज थे। इसके अलावा कोलगवां इलाके के कई बड़े अपराध और अपराधियों की केस डायरी, रिमांड डायरी और चालान डायरी बस्ते में रखी थी।
विवेचकों की बढ़ी मुसीबत
सूत्रों के मुताबिक जो बस्ता गायब हुआ है उसमें थाने के लगभग एक दर्जन विवेचकों की फाइलें थी। आबकारी अधिनियम से जुड़े दो प्रकरण की फाइल भी इसी बस्ते में रखी थी। लाल रंग के पकड़े से बंधे इस बस्ते में पुलिस की एक टोपी और छींटदार थैला भी था। इसी थैले के अंदर पुलिस संबंधी कागजात रखे थे। सूत्रों का कहना है कि जो बस्ता गायब हुआ है उसमें न्यायालय से जारी की गई कई डाक भी थीं।
32 वर्ष की हो चुकी सेवा
प्रधान आरक्षक रवि शंकर शुक्ला मध्य प्रदेश पुलिस विभाग में 32 वर्ष की सेवा दे चुके हैं। विगत 4 साल से यह अपनी सेवाएं कोलगवां थाने में दे रहे हैं। सूत्रों की माने तो सेवाकाल के दौरान यह अब तक बिल्कुल बेदाग रहे हैं, इनके विरुद्ध कभी कोई मामला जांच में नहीं आया है बल्कि इन्हें कुछ मामलों में नगद इनाम और प्रशंसा पत्र भी मिले हैं। अब जब उनके हाथ से सरकारी बस्ता गुम गया तो थाने से लेकर जिले के सभी अफसर परेशान हैं।


"कोर्ट मुंशी से गिरे बस्ते की तलाश कराई जा रही है। पूछताछ की जा रही है कि बस्ते में किस संबंध के क्या दस्तावेज थे। लापरवाही तो हुई है।"
गौतम सोलंकी, एडिशनल एसपी