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मंदाकिनी नदी को लेकर गंभीर नहीं जिला प्रशासन, नगर पंचायत को अंतिम मौका

सतना लोकोपयोगी कोर्ट में नहीं रखा पक्ष

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mandakini river history in hindi

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सतना। चित्रकूट से बहने वाली मंदाकिनी नदी को लेकर जिला प्रशासन गंभीर नहीं दिख रहा। स्थिति यह है कि कोर्ट की लगातार नोटिस के बाद भी पक्ष रखने के लिए कोई उपस्थित नहीं हुआ। इसके चलते कोर्ट ने सतना कलेक्टर को एक पक्षीय कर दिया। इसका आशय है कि उनके पक्ष रखने का अवसर समाप्त कर दिया। अब उन्हें अपना तर्क रखने के लिए अलग से आवेदन करना होगा, जिस पर कोर्ट विचार करने के बाद पक्ष या विपक्ष में आदेश देगी। मामले में नगर पंचायत चित्रकूट सीएमओ का भी गैर जिम्मेदराना रवैया रहा है। उनकी तरफ से भी पक्ष नहीं रखा गया। हालांकि उन्हें कोर्ट ने अंतिम अवसर दिया है। मामले में कर्वी कलेक्टर, प्रदूषण बोर्ड के अधिकारियों ने अपना पक्ष रख दिया है।

लोकोपयोगी कोर्ट में याचिका

प्रेम नगर निवासी विपिन अरजरिया ने सतना लोकोपयोगी कोर्ट में मंदाकिनी को लेकर याचिका लगा रखी है। इसमें प्रदूषण, बदहाली व अतिक्रमण को मुद्दा बनाया गया है। उनकी तरफ से अधिवक्ता राजीव खरे ने कलेक्टर सतना, कलेक्टर कर्वी, क्षेत्री प्रदूषण अधिकारी सतना, सीएमओ नगर पंचायत चित्रकूट को पक्षकार बनाया है। इसमें कहा गया कि नदी की बदहाली के लिए ये सभी जिम्मेदार हैं?

उचित कदम उठाने के दिशा-निर्देश जारी

इन्होंने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन नहीं किया, जिससे ये हालात बने हैं। लिहाजा, इन सभी के खिलाफ कार्रवाई की जाए और नदी को लेकर उचित कदम उठाने दिशा-निर्देश जारी किए जाएं। इसको लेकर कोर्ट ने सभी पक्षकारों को नोटिस जारी किया, लेकिन कलेक्टर सतना व सीएमओ चित्रकूट अपना पक्ष रखने न कभी आए और न ही प्रतिनिधि या अधिवक्ता भेजा।

सीएमओ चित्रकूट को अंतिम अवसर

इसको लेकर शनिवार को सुनवाई के दौरान आवेदनकर्ता के अधिवक्ता ने आपत्ति ली। इस पर कोर्ट ने विचार करते हुए कलेक्टर सतना को एक पक्षीय कर दिया और सीएमओ चित्रकूट को अंतिम अवसर दिया है। उन्हें अगली सुनवाई 31-08-2019 को उपस्थित होकर पक्ष रखना है। अगर, नहीं पक्ष रखते हैं तो कोर्ट एक पक्षीय घोषित कर देगा। इसका आशय, पक्ष रखने का अवसर समाप्त होना है।

खारिज की जाए याचिका
प्रदूषण बोर्ड ने पक्ष रखते हुए कहा कि मंदाकिनी नदी धार्मिक आस्था का केंद्र है। जिला प्रशासन के सहयोग से नदी को स्वच्छ और प्रदूषणमुक्त करने की कवायद जारी है। एनजीटी के निर्देशानुसार सीवर ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना हो चुकी है। तकनीकी खामी के कारण अभी चालू नहीं है, ये जल्द चालू कर दिया जाएगा। कस्बे के जल-मल को उपचारित करते हुए कृषि कार्य में लिया जाएगा। इन कारणों को ध्यान में रखते हुए याचिका खारिज कर देनी चाहिए।

इन्होंने रखा पक्ष
कलेक्टर कर्वी और प्रदूषण बोर्ड सतना की ओर से पक्ष रखा गया है। दोनों के अधिवक्ता कोर्ट में उपस्थित हुए और पक्ष रखा। कलेक्टर कर्वी की ओर से शासकीय अधिवक्ता शशिकांत पांडेय व प्रदूषण बोर्ड की ओर अधिवक्ता सुधाकर मिश्रा ने पक्ष रखा।