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चित्रकूट: मठ-मंदिरों के बाबा दान की राशि से सुधार रहे अपना स्तर, सुविधाओं पर ध्यान नहीं

कामतानाथ मंदिर को शासकीय ट्रस्ट में लाने सौंपा ज्ञापन

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Memorandum submitted to bring Kamtanath temple to government trust

Memorandum submitted to bring Kamtanath temple to government trust

सतना/ धर्मनगरी चित्रकूट में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की दान और चढ़ावे की राशि से मठ मंदिरों के महंतों और उनके करीबियों द्वारा दुरुपयोग को लेकर अब आमजन सामने आने लगा है। इनका कहना है कि करोड़ों रुपये दान और चढ़ावे में मिलते हैं लेकिन इस राशि का विकास कार्य में उपयोग न करके मंदिरों के महंत आय बढ़ा रहे हैं। निजी नामों से जमीने खरीद रहे हैं और महंगी गाडियों में घूम रहे हैं। इस राशि का पूरी तरह से दुरुपयोग हो रहा है।

दूसरी ओर श्रद्धालुओं की सुविधा के लिये शासन प्रशासन को करोड़ों रुपये खर्च करने पड़ते हैं और लाभ मंदिरों के महंत उठाते हैं। ऐसे में अब जरूरी हो गया है कि चित्रकूट के प्रमुख मंदिरों और धार्मिक स्थलों को मैहर की तर्ज पर शासकीय ट्रस्ट के अधीन किया जाए जिसका नियंत्रण कलेक्टर के हाथ हो और प्रशासक के तौर पर एसडीएम इसकी निगरानी करें। इस संबंध में चित्रकूट के गणमान्य नागरिकों और संतों ने कलेक्टर के नाम तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा।

चढ़ोत्तरी के पैसों का दुरुपयोग
ज्ञापन में कहा गया है कि चित्रकूट में आज जो स्थितियां हैं उससे आम जन और श्रद्धालुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसका श्रेय मठ मंदिरों में बैठे महंतों और उनके संबंधी जनों को जाता है। ये लोगो मठ मंदिरों में होने वाली आय से अपने और अपने परिवार के लोगों के नाम निजी संपत्तियां खरीद कर भगवान कामतानाथ स्वामी के नाम पर होने वाली चढ़ोत्तरी के पैसों का दुरुपयोग कर रहे हैं। जबकि इस राशि का उपयोग भगवान के नाम पर और यहां की व्यवस्थाएं सुदृढ़ करने में होना चाहिए। लेकिन रिकार्ड उठा कर देख लिया जाए तो एक भी पैसा इनके द्वारा व्यवस्थाओं के नाम पर खर्च नहीं किया जा रहा है। बल्कि अपने घर परिवार के नाम पर जमीनें खरीदी जा रही हैं।

प्रबंधक कलेक्टर फिर भी दुरुपयोग
ज्ञापन में बताया गया है कि इन प्रसिद्ध मठ मंदिरों के अध्यक्ष और प्रबंधक कलेक्टर हैं। इसके बाद भी दान की राशि का दुरुपयोग हो रहा है। जब भी कभी इस राशि के हिसाब की बात आती है तो चिन्हित लोगों को इकट्ठा कर प्रशासन पर दबाव बनाने का काम शुरू कर दिया जाता है। दान की राशि का अब जनहित में उपयोग होना जरूरी है। इन मंदिरों की आय करोड़ो में है लिहाजा यह राशि अगर यहां व्यवस्था बनाने में लगे तो चित्रकूट का कायाकल्प हो जाएगा और श्रद्धालुओं को तमाम सुविधाएं मिलने लगेंगी। आज स्थिति यह है कि महंत पूजा पाठ छोड़ महंगी गाडियां और बंदूकों के प्रति आशक्त हैं, स्पष्ट है कि यहां की स्थितियां क्या होंगी।

मैहर की तर्ज पर गठित हो समिति
ज्ञापन में कहा गया है शारदा मंदिर प्रबंध समिति की तर्ज पर कामतानाथ धाम अधिनियम 2009 को यहां लागू किया जाए। चेताया गया है कि अगर प्रशासन ऐसा नहीं करता है तो यहां का जनमानस कलेक्ट्रेट पहुंच कर प्रदर्शन करेगा और सीएम तक को इस संबंध में ज्ञापन दिया जाएगा।