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मोदी सरकार का बड़ा फैसला: सहारा कंपनी के निवेशकों को धन वापसी की प्रक्रिया शुरू, ऐसे निकालें अपना पैसा

सहारा रियल एस्टेट-हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लि. के निवेशकों को धन वापसी की प्रक्रिया शुरू, सेबी ने 2 जुलाई तक मांगे आवेदन

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Modi Government Plans and New Law for sahara

Modi Government Plans and New Law for sahara

रमाशंकर शर्मा @ सतना। इन्वेस्टर्स के पैसे नहीं लौटाने के मामले में साख खो चुके सहारा प्रमुख सुब्रत राय सहारा के जेल चले जाने के बाद से निवेशकों के करोड़ों रुपए फंस गए थे। अब सेबी की ओर से निवेशकों के लिए अच्छी खबर आई है। सहारा इंडिया रियल एस्टेट कार्पोरेशन लि. तथा सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉर्पोरेशन लि. के बांड धारकों को धनवापसी की प्रक्रिया सेबी ने शुरू कर दी है।

निवेशकों को तय प्रारूप में धनवापसी का आवेदन 2 जुलाई तक सेबी के मुंबई स्थित कार्यालय में प्रस्तुत करने को कहा गया है। इस संबंध में आयुक्त संस्थागत वित्त डॉ मनोज गोविल ने कलेक्टर को सूचित किया है कि सहारा की दो कंपनियों एसआइआरइसीएल और एसएचआइसीएल के निवेशकों की धनवापसी की प्रक्रिया प्रारंभ है।

ऐसे में इन दोनों कंपनियों द्वारा जारी रियल एस्टेट / एबोड / निर्माण बांड/ मल्टीपल / इनकम / हाउसिंग बांड धारकों को यह बताया जाए कि वे 2 जुलाई 2018 तक अपना आवेदन सेबी के मुंबई स्थित कार्यालय में प्रस्तुत कर दें। इस तारीख के बाद प्राप्त होने वाले आवेदनों पर जांच पड़ताल तथा धन वापसी के लिए सेबी द्वारा विचार नहीं किया जाएगा।

यह है मामला
सहारा की दो कंपनियों द्वारा निवेशकों को राशि नहीं लौटाने पर सेबी से शिकायत की गई थी। सेबी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। 31 अगस्त 2012 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सहारा ग्रुप द्वारा चलाई जा रही दो फाइनेंस स्कीम गैर-कानूनी हैं, लिहाजा ग्रुप को इन्वेस्टर्स की रकम ब्याज सहित लौटानी होगी। दोनों फाइनेंस फर्मों ने इस दावे के साथ छोटे इन्वेस्टर्स को बॉन्ड्स बेचे थे कि 10 साल बाद फेस वैल्यू का तीन गुना फायदा मिलेगा। सेबी का कहना है कि सहारा ने 2.7 करोड़ इन्वेस्टर्स से 27,000 करोड़ रुपए जुटाए थे।

सतना में भी दिखाया था सब्जबाग
सहारा द्वारा सतना में भी सहारा सिटी का सब्ज बाग दिखाकर लोगों से काफी रुपए निवेश कराए गए थे। इस निवेश में काफी संख्या में बड़े धन्ना सेठ भी शामिल थे। सोहावल माता मंदिर के सामने प्रस्तावित सहारा सिटी प्रोजेक्ट में निवेश बढ़ाने शुरुआती दौर में यहां तेजी से काम भी शुरू किया गया था। लेकिन सेबी द्वारा मामला न्यायालय में ले जाने के बाद यहां का पूरा काम ठप हो गया था। इसके साथ ही सैकड़ा भर से ज्यादा निवेशकों के रुपये फंस गए थे।