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साइड इफेक्ट के मरीज बढ़े: मच्छर न जाने कितने मरे, पर किलर ने ये बीमारियां जरूर फैला दीं

मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों से बचने लोग रिफिल, अगरबत्ती और स्प्रे जैसे मॉस्किटो किलर का उपयोग कर रहे हैं।

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Mosquito killer side effect in india

Mosquito killer side effect in india

सतना। मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों से बचने लोग रिफिल, अगरबत्ती और स्प्रे जैसे मॉस्कीटो किलर का उपयोग कर रहे हैं। इनसे मच्छर मरे या नहीं, इनके साइड इफेक्ट से बीमारियां हुई, दरअसल, मच्छरों के काटने से सात सालों में जिले में ८०० से ज्यादा लोगों को डेंगू हुआ। ३० से ज्यादा मरीजों की मौत हो गई।

अन्य बीमारियों को जोड़ दें तो आंकड़ा बढ़ जाएगा। मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. प्रवीण श्रीवास्तव के मुताबिक लोग स्किन इंफेक्शन, आंखों के संक्रमण, ब्रोंकाइटिस, एग्जिमा, चेंज जैसी परेशानी से जूझने लगे हैं।

३० करोड़ का बाजार
प्रदेश में हर साल लगभग २८ से ३० करोड़ के मॉस्कीटो किलर बेच दिए जाते हैं। इसमें से भी लगभर ५० फीसदी अगस्त और सितम्बर माह की खपत है ।

किससे क्या नुकसान

क्वाइल: डॉ. रजनीश जैसवाल के मुताबिक ये सबसे अधिक नुकसान वाला प्रोडक्ट है। इसमें पाइरेथीन के अलावा एस-2 और डीईईटी होता है। इसके धुएं से आंखों में जलन, सांस में दिक्कत, नाक बंद जैसी परेशानियां होती हैं। त्वचा को नुकसान हो सकता है।
रिफिल/लिक्विड फोम: विशेषज्ञों के मुताबिक इसका असर तुरंत और दीर्घ कालिक होते हैं। कुछ लोगों को इससे स्किन इंफेक्शन, आंखों में पानी आने और जलन की शिकायत होने लगती है। ज्यादा देर तक इसके संपर्क में रहने पर नर्वस सिस्टम पर असर पड़ सकता है।
स्प्रे और क्रीम: अधिकतर स्प्रे में पायरेथीन का इस्तेमाल किया जाता है। ज्यादा स्प्रे फेफड़ों में पहुंच जाता है जो स्वशन तंत्र को नुकसान पहुंचाता है। साथ ही कंजक्टीवाइटिस और साइनोटिस हो सकता है।

किसमें कौन सा रसायन, क्या खतरा
उत्पाद रसायन प्रभाव

- अगरबत्ती ब्यूटाइलेटेड केंद्रीय तंत्रिका तंत्र के लिए हाइड्रोक्सीटॉलुइन 35,36 हानिकारक

- अगरबत्ती पायपेरानिल ब्यूटाक्साइड 51 कैंसर कारक

- ब्लैक स्प्रे आयमीप्रोथिन 18 त्वचा, आंखों में जलन, उल्टी, छींक, नाक बहना, घुटन

- रेड स्प्रे सायपरमेथ्रिन 20 फेफड़ों को नुकसान, श्वसन तंत्र का काम बंद हो सकता है।

- रिफिल प्रेलेथ्रिन 96-98 त्वचा, आंख एवं फेफड़ों में जलन होना।

- रिफिल ट्रान्सफ्लूथ्रिन 99 मूत्राशय का कैंसर, मछलियों के लिए बेहद जहरीला है।

बीते आठ साल में डेंगू की स्थिति
- ८३१ डेंगू मरीज जिले में
- ३१ मौत अब तक शहर में
- ४७८५ मरीज पूरे प्रदेश में
- ८७ मौत पूरे प्रदेश में

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