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MP Assembly Election 2018: सतना में किसका दावा, क्यों मजबूत, क्या शंकर को मिलेगा शिव का सहारा, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

MP Assembly Election 2018: सतना में किसका दावा, क्यों मजबूत, क्या शंकर को मिलेगा शिव का सहारा, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

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सतना

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Suresh Mishra

Sep 07, 2018

MP Assembly Election 2018: satna Assembly BJP Congress Candidates

MP Assembly Election 2018: satna Assembly BJP Congress Candidates

रमाशंकर शर्मा @ सतना। मध्यप्रदेश में लगातार तीन बार से सत्ता में काबिज भाजपा के लिए इस बार सतना विधानसभा सीट में सबसे ज्यादा कश्मकश दिखने वाली है। बताया जाता है कि राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता से भाजपा को ज्यादा नुकसान हो सकता है। सतना में लगातार तीन बार से विधायक बनने वाले शंकरलाल तिवारी के खिलाफ एंटी इंकम्बेंसी का भी पार्टी को नुकसान हो सकता है। भाजपा डैमेज कंट्रोल में जुटी है। उसके लिए नोटबंदी, जीएसटी, एट्रोसिटी एक्ट आदि मामले परेशानी का सबब बन सकते हैं तो कांग्रेस इन मुद्दों को भुनाने की कोशिश में जुटी है। यहां सीधा मुकाबला कांग्रेस और भाजपा का है।

सतना: हैट्रिक से आगे की तैयारी
तमाम विकास के दावों के साथ सतना में भाजपा ने अपना परचम फहराया था। लेकिन इस विधानसभा का ज्यादातर क्षेत्र नगर निगम के दायरे में आता है। इसमें पार्टी की महापौर की विफल नीतियों के कारण विकास को गति नहीं मिल सकी। इसका खमियाजा पार्टी को भुगतना पड़ सकता है। हालांकि स्मार्ट सिटी, मेडिकल कॉलेज इसके सकारात्मक पहलू होंगे। प्रत्याशी के प्रति असंतोष भी सतह और पार्टी में है। अगर कांग्रेस किसी सही प्रत्याशी को टिकट दे देती है, तो भाजपा की हैट्रिक आगे नहीं बढ़ सकेगी। इसे आगे बढ़ाने की बड़ी चुनौती है।

विधानसभा चुनाव 2013
- भाजपा: शंकरलाल तिवारी 56,160
- कांग्रेस: राजाराम त्रिपाठी 40,828

भाजपा से ये नाम हैं चर्चा में
- शंकर लाल तिवारी विधायक
- योगेश ताम्रकार- संघ समर्थन
- विमला पाण्डेय - पूर्व महापौर
- रत्नाकर चतुर्वेदी- सहकारी बैंक अध्यक्ष
- पुष्कर सिंह तोमर- पूर्व महापौर
- विनोद तिवारी - संगठन में पकड़
- धर्मेन्द्र सिंह बराज - जपं. सदस्य

कांग्रेस से ये नाम हैं चर्चा में
- मनीष तिवारी - पीसीसी सदस्य
- राजभान सिंह - कार्यकारी अध्यक्ष
- सुधीर सिंह -पूर्व लोस प्रत्याशी
- सइद अहमद - पूर्व मंत्री
- राजाराम त्रिपाठी - पूर्व महापौर
- अनिल अग्रहरि - व्यापारिक पकड़
- रवीन्द्र सेठी - पीसीसी सदस्य

ये भी ठोक रहे ताल
- सपा से राजेश दुबे, बसपा से रावेन्द्र पटवारी

मतदाताओं की स्थिति
- ब्राह्मण और व्यापारी तबका महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा

ये हैं प्रमुख मुद्दे
- शहर की खराब सड़कें, अनियोजित विकास

भाजपा के लिए इस बार चुनौती
भाजपा विकास के दावों में सफल नहीं रही। यह उसकी सबसे बड़ी चुनौती रही। आपसी अन्तरकलह भी असर करेगी। खराब सड़कें और फ्लाइओवर से हो रही परेशानी बडी चुनौती होगी।

कांग्रेस के लिए इस बार चुनौती
अवसर होने पर भुनाने में असफलता तथा कम सक्रियता बड़ी चुनौती होगी। विपक्ष की भूमिका नहीं दिखी। गुटबाजी ज्यादा और कम जनसंपर्क परेशानी का कारण होगा

पूरे कार्यकाल में आपसी मनमुटाव के कारण विकास नहीं हुआ। इससे जनता में काफी असंतोष है।
संदीप शुक्ला, कर्मचारी