
mp bhu rajaswa sanhita in hindi
सतना। मध्यप्रदेश सरकार ने मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता में व्यापक पैमाने पर बदलाव किया है। मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहिता संशोधन अधिनियम 2018 के तहत यह बदलाव तो जुलाई में कर दिया गया। इस नए अधिनियम के तहत भू-राजस्व संहिता में किए गए बदलाव के अनुसार 25 सितंबर से नई भू-राजस्व संहिता प्रभावी होगी। इस संशोधन के तहत अब राजस्व वर्ष जो अभी तक अक्टूबर माह से बदल जाता था वह 1 अप्रैल से बदलेगा।
अर्थात नया राजस्व वर्ष एक अप्रैल से शुरू होगा। लेकिन यह बदलाव राजस्व अधिकारियों के लिए परेशानी का सबब बन गया। राजस्व अधिकारियों की मानें तो नई भू-राजस्व संहिता में यह तो बता दिया गया कि नया राजस्व वर्ष अब 1 अप्रैल से शुरू होगा। साथ ही नई राजस्व संहिता 25 सितंबर से लागू होने जा रही है। इधर पुराने नियमों के तहत 30 सितंबर को पुराना राजस्व वर्ष समाप्त होने जा रहा है और एक अक्टूबर को नया राजस्व वर्ष शुरू होना था। नई भू-राजस्व संहिता लागू होने के बाद अब एक अक्टूबर को नया राजस्व वर्ष शुरू नहीं होगा।
ऐसे में राजस्व अमला इस बात को लेकर परेशान है कि 1 अक्टूबर से लेकर 31 मार्च तक का समय किस राजस्व वर्ष में जोड़ा जाएगा। अभी तक शासन स्तर से भी इस बात का कोई स्पष्टीकरण नहीं आया है कि यह समयावधि किस राजस्व वर्ष में जाएगी। अगर नए राजस्व वर्ष में जोड़ते हैं तो 2019-20 का राजस्व वर्ष 18 माह का होगा यदि पुराने राजस्व वर्ष में जोड़ते हैं तो 2018-19 का राजस्व वर्ष 18 माह का होगा। यह भी प्रदेश के राजस्व इतिहास में अनोखी घटना होगी कि कोई एक वर्ष 18 माह का होगा। अथवा यह भी हो सकता है कि इन 6 माह को अलग से उल्लेखित किया जाए। लेकिन यह तीनों गतिविधियां तभी संभव होंगी जब शासन से कोई मार्गदर्शन आए। जो अभी तक नहीं आया है।
डायवर्सन पर भी उलझी पेंच
नई भू राजस्व संहिता के अनुसार डायवर्सन के लिए सरकार ने स्व-निर्धारण प्रक्रिया तय की है। इसके तहत अब आवेदन अपने डायवर्सन का निर्धारण स्वयं से कर चालान द्वारा भुगतान कर सकेगा। इसके लिए शासन ने डायवर्सन जमा करने की धारा 172 को खत्म कर दिया है। लेकिन शासन ने स्व निर्धारण के लिये स्पष्ट गाइडलाइन तय नहीं किया है कि स्व-निर्धारण आवेदक किस आधार पर करेगा।
एसडीएम डायवर्सन नहीं कर सकेंगे
इधर 25 सितंबर से परेशानी यह होगी कि एसडीएम डायवर्सन कर नहीं सकेंगे और आवेदन अपनी जमीन का डायवर्सन किस आधार पर तय करेगा यह घोषित नहीं हुआ है। हालांकि कुछ राजस्व अधिकारी धारा 59 को बीच का रास्ता मानकर चल रहे हैं कि पुनर्निर्धारण के तहत वर्तमान तरीके से राशि जमा करवा सकेंगे, लेकिन इस पर विवाद होना भी तय माना जा रहा है।
रेवेन्यू बोर्ड से रिवीजन छिना
इस बार सबसे सही बदलाव सीमांकन के मामलों में माना जा रहा है। सीमांकन के मामले में रेवेन्यू बोर्ड से रिवीजन के अधिकार वापस ले लिए गए हैं। अभी तक सीमांकन के मामले रिवीजन के नाम पर रेवेन्यू बोर्ड में ले जाए जाते थे और वहां बड़े खेल होते थे। अब नई व्यवस्था में सीमांकन के प्रकरणों में अपील नहीं हो पाएगी। तहसीलदार सीमांकन के लिये अधिकृत होंगे। असंतुष्ट होने पर एसडीएम के यहां से बड़ी टीम गठित की जाएगी। उसका निर्णय अंतिम होगा।
Published on:
16 Sept 2018 11:54 am
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