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MP election 2018: सीमेंट के फेर में खत्म हो गई चूने की पहचान, 20 उद्योग बंद हुए, पान की पनवारी भी खत्म

मैहर विधानसभा क्षेत्र: चूना उद्योग बंद हुए, पान की पनवारी खत्म, सीमेंट उद्योग ने बढ़ा दिया प्रदूषण

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सतना

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Suresh Mishra

Nov 17, 2018

MP election 2018: Ground Report in maihar vidhan sabha

MP election 2018: Ground Report in maihar vidhan sabha

सतना। मां शारदा और बाबा अलाउद्दीन खां की नगरी मैहर की धाक भारत ही नहीं विश्व में है। लेकिन, विकास की दौड़ ऐसी शुरू हुई कि पहचान ही मिट गई। 20 से ज्यादा चूना उद्योग बंद हो गए, पान की पनवारी सिमट गई और सीमेंट उद्योगों के आगे कृषि लाभ का धंधा नहीं रहा। फिर भी विपरीत परिस्थितियों में मैहर नई पहचान बना चुका है। देश को 6 फीसदी सीमेंट इस विधानसभा के उद्योगों से मिलता है। यह जिले का सबसे ज्यादा राजस्व देने वाला क्षेत्र है। उसके बावजूद बुनियादी सुविधाओं को लेकर मैहर का बड़ा हिस्सा जूझ रहा है। कारण, कि सत्ता व सरकार द्वारा क्षेत्र को लेकर किए गए अधिकतर वादे अधूरे होना है। शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली जैसे संसाधन को जनता परेशान है।

अस्पताल में डॉक्टर नहीं
दोपहर करीब एक बजे मैहर डाक घर के पास बस से उतरते ही कस्बाई माहौल का नजारा दिखा। ठेले, गुमटी, साइकिल, रिक्शा और बेतरतीब बाजार कस्बाई भारत की तस्वीर प्रस्तुत कर रहे थे। दो कदम पर अस्पताल व पुलिस थाना था। अस्पताल के दरवाजे पर ही बड़ा नाला था, मरीजों की रेलम पेल थी, लेकिन अस्पताल में डॉक्टर नहीं थे। तभी पान वाले सोनू अग्रवाल ने बताया कि दोपहर के समय डॉक्टर नहीं रहते। सवाल-जवाब का दौर चला, तो बताया कि वार्ड में स्टाफ भी नहीं रहता है। बेतरतीब महौल बना हुआ है।

सबकुछ घंटाघर
यहां से निकलकर पांच मिनट चलने के बाद घंटाघर दिखा, जो मैहर की पहचान है। मुख्य चौराहों में गिनती होती है, इसके चारों ओर ठेले व भीड़-भाड़ नजर आ रही थी। इसको लेकर अवी सिब्बल कहते हैं कि इस क्षेत्र में धरना-प्रदर्शन, हंगामा, हाट बाजार, सब्जी बाजार सबकुछ सजता है। अगर किसी को प्रदर्शन करना होगा, तो यहां आएगा। विवाद की स्थिति बनती है, तो लोग यहां एकत्रित होते हैं और समझाइश व सुलह का केंद्र भी यही स्थान है। करीब 500 मीटर की दूरी पर एसबीआइ चौराहा है। कटनी हाइवे गुजरता है और ओवरब्रिज यहां पर है। मैहर की व्यस्तम सड़कों में से एक है।

अब भी शहर के बीच से भारी वाहन गुजरते है
अरशद कहते हैं कि चुनाव से पहले बाइपास का उद्घाटन हुआ। अब भी शहर के बीच से भारी वाहन गुजरते हैं। साल में दो-तीन हादसे ऐसे होते हैं, जो दिल-दहला देते हैं। सतना की तरह मैहर में भी नो-एंट्री व्यवस्था लागू होनी चाहिए। आगे बढ़ते हुए मैहर जेल की सीमा आ जाती है। उससे आगे बढऩे में 50 मीटर की दूरी पर उस्ताद अलाउद्दीन खान की याद में मदिना भवन बना हुआ है। लेकिन, दोपहर के वक्त पूरा क्षेत्र सूनसान है। आगे बढऩे पर सरकारी अधिकारियों के बंगले हैं।

पानी संकट बड़ी समस्या
मैहर एसडीएम तक का निवास है। तभी ओवरलोड वाहन धड़ल्ले से गुजरे, कोई पूछने वाला नहीं था कि ये मनमानी कैसे हो रही है। करीब १ किमी चलने के बाद मैहर किला क पूरवी दरवाजा है। परंपरागत बाजार क्षेत्र व रहवासी क्षेत्र है। मुस्लिम आबादी ज्यादा है। मो. असगर कहते हैं कि सड़क व बिजली ठीक है, लेकिन पानी संकट बड़ी समस्या है। अब तो सालभर परेशानी झेलनी पड़ती है। फिर वे कहते हैं कि सरकारी जमीनों पर कब्जे भी हो रहे हैं, कोई रोकने वाला नहीं है।

श्रमिकों को हर सप्ताह 2 करोड़ वेतन बंटता था
बुजुर्ग लाला गुप्ता कहते हैं कि मैहर की पहचान 20-25 साल पहले चूना नगरी के रूप में थी। स्टेशन के बगल से पूरे क्षेत्र में चूना उद्योग दिखते थे। करीब 25-30 उद्योग थे। ये उद्योग साप्ताहिक रूप से वेतन का भुगतान करते थे। हर सप्ताह 2 करोड़ से ज्यादा को वेतन बंटता था। इससे मैहर का बाजार सतना को टक्कर देता था। लेकिन, अब ये माहौल नहीं है। पूरा बाजार चौपट हो गया।

खत्म हो गई पान दरीबा की रौनक
हेमंत कहते हैं कि मैहर में किला के पूरवी दरवाजे के पास पान दरीबा है। जहां बड़े पैमाने पर पान का कारोबार होता था। सतना, रीवा, छतरपुर, जबलपुर, महोबा, कर्वी व कानपुर तक मैहर से पान जाता था। 15 साल पहले 100 से ज्यादा व्यापारी थे। अब 20-25 बड़े व्यापारी बचे हैं। वहीं उमरी, पलेहा, हरनामपुर में पान की पनवारी लगती थी।

मैहर के मुद्दे
- मिनी स्मार्ट सिटी का काम शुरू हो, अभी भूमिपूजन तक सिमटा।
- बरगी का पानी की मांग वर्षों से है।
- उच्च शिक्षा में मैहर पिछड़ रहा। हर रोज करीब 500 बच्चे कॉलेज की पढ़ाई करने सतना आते हैं।
- सीमेंट उद्योग से खेती-किसानी प्रभावित हुई है। करेला व टमाटर का उत्पादन होता है। फूड प्रोसेसिंग यूनिट चुनावी वादा बनकर रह गई।
- पवित्र नगरी घोषणा तक सिमटी। शराब दुकान व मांस दुकान धड़ल्ले से चल रही हैं।
- मैहर मंदिर क्षेत्र में हरिद्वार की तर्ज पर हरकी पोड़ी का विकास होना था। आज तक नहीं हुआ।
- भटूरा मार्ग लंबे समय से चुनावी मुद्दा रही। काम अधूरा पड़ा है।
- उपचुनाव में दो कॉलेज व आइटीआइ की घोषणा हुई। शुरू भी हुए, लेकिन स्थायित्व नहीं मिल सका।
- सीमेंट कंपनियों में स्थानीय युवाओं को रोजगार मिले।
- जलसंकट के लिए पाइप लाइन से बाणसागर का पानी जल्द लाया जाए।

जनता के बीच रहे प्रतिद्वंद्वी
पिछला चुनाव भाजपा के नारायण त्रिपाठी ने जीता। वे लगातार यहां सक्रिय रहे। पिछले चुनाव में कांग्रेस से प्रत्याशी रहे मनीष पटेल भी सक्रिय रहे। इस बार भी भाजपा ने नारायण पर ही भरोसा जताया है। जबकि कांग्रेस ने श्रीकांत चतुर्वेदी को मौका दिया है। पिछली बार कांग्रेस के प्रत्याशी रहे मनीष पटेल गोंगपा से चुनाव लड़ रहे हैं। ऐसे में मुकाबला रोचक है। बगावत, भितरघात के साथ-साथ अंतिम समय में राजनीतिक समीकरण बदलने वाले हैं।

मैहर उपचुनाव 2016
- नारायण त्रिपाठी, भाजपा 82,658
- मनीष पटेल, कांग्रेस 54,377
- रामनिवास उरमलिया, सपा 9,892
- रामलखन पटेल, बसपा 8,989
- नोटा 2,863
- जीत का अंतर 28,281

2013 में प्राप्त प्रतिशत मत
- नारायण चतुर्वेदी, कांग्रेस 31.36
- रमेश प्रसाद, भाजपा 26.84
- मनीष पटेल, बसपा 26.34
- संदीप सिंह, एबीजीपी 2.83
- नोटा 0.59