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नजूल मामलों के निराकरण में लापरवाह MP का राजस्व न्यायालय, ये रिपोर्ट खोल देगी सुशासन की पोल

पांच साल से ज्यादा समय से लंबित है निराकरण, 24661 प्रकरण पंजीकृत, 10207 का हो पाया निराकरण

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सतना

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Suresh Mishra

Jan 24, 2018

MP Revenue Court Latest news Negligence dismantling in satna

MP Revenue Court Latest news Negligence dismantling in satna

रमाशंकर शर्मा @ सतना। आरसीएमएस व्यवस्था लागू होने के बाद राजस्व न्यायालयों की कार्यप्रणाली अब सामने आने लगी है। निराकरण की स्थितियां भी स्पष्ट हो रही हैं। आरसीएमएस (रेवेन्यू कोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम) में प्रकरण निराकरण की स्थितियां देखें तो सतना जिले में सबसे खराब स्थिति नजूल मामलों के निराकरण की है। 5 साल से ज्यादा लंबित सर्वाधिक 95 मामले नजूल अधिकारी कोर्ट के हैं।

निराकरण की सबसे खराब स्थिति को देखा जाए तो सबसे खराब परफार्मेंस 15 फीसदी न्यायालय तहसीलदार मझगवां का है। 1 अक्टूबर 2017 से 21 जनवरी 2017 तक की स्थिति देखें तो जिले में 24661 प्रकरण पंजीकृत किए गए तथा 10207 प्रकरण निराकृत किए गए हैं।

लेखाजोखा तैयार

दरअसल, मुख्य सचिव के सतना दौरे को लेकर जिले के राजस्व न्यायालयों के कामकाज का जो लेखाजोखा तैयार किया गया है उससे कई चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। इसके पहले मुख्य सचिव मई माह में सतना में समीक्षा बैठक लिए थे। यहां के कामकाज पर सवाल खड़े करते हुए कहा था कि व्यवस्थाएं सुधार लें ताकि अगली बार मुझे परशुराम बनकर न आना पड़े। लेकिन, आरसीएमएस का जो लेखाजोखा सामने आ रहा है उससे यह तो स्पष्ट हो रहा है।

प्रकरणों की संख्या सतना जिले में 241

कई राजस्व न्यायालयों का कामकाज गंभीरता से नहीं हो रहा है। अकेले 5 वर्ष से ज्यादा समय से लंबित प्रकरणों की स्थिति देखें तो सर्वाधिक लंबित मामले नजूल अधिकारी कोर्ट सतना के हैं। यहां 95 प्रकरणों का निराकरण 5 साल से ज्यादा अवधि के बाद भी नहीं हो सका है। पांच साल से ज्यादा लंबित प्रकरणों में न्यायालय नजूल तहसीलदार के 14, न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी नागौद 17, कलेक्टर कोर्ट सतना 31, न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी रघुराजनगर में 775 प्रकरण लंबित है। राजस्व न्यायालयों में 5 साल से लंबित चल रहे प्रकरणों की संख्या सतना जिले में 241 है।

41 फीसदी है निराकरण
सतना जिले में राजस्व प्रकरणों के निराकरण का प्रतिशत भी 41 फीसदी है। न्यायालय अपर कलेक्टर नजूल ही इकलौता न्यायालय है जिसके निराकरण का प्रतिशत 100 फीसदी है। इनके यहां कुल 44 प्रकरण पंजीकृत हुए थे और सभी का निराकरण कर दिया गया। सतना जिले के सबसे कमजोर निराकरण वाले न्यायालयों को देखे तो 15 प्रतिशत निराकरण के साथ सबसे कमजोर निकारण न्यायालय तहसीलदार मझगवां है। इसके बाद 18 फीसदी निराकरण वाले राजस्व न्यायालयों में नजूल अधिकारी कोर्ट मैहर और न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी मझगवां हैं। इसके बाद न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी नागौद का निराकरण प्रतिशत २४ तथा न्यायालय तहसीलदार कोटर का 25 फीसदी है।

14456 प्रकरण निराकरण को शेष
21 जनवरी की स्थिति में जिले के राजस्व न्यायालयों में 14456 प्रकरण निराकरण को शेष हैं। इसमें दो से पांच साल तक के लंबित प्रकरणों की संख्या 1577 है। सर्वाधिक लंबित प्रकरण वाले न्यायालयों की स्थिति देखें तो 1035 प्रकरण तहसीलदार न्यायालय रघुराजनगर के यहां, 856 प्रकरण न्यायालय अनुविभागीय अधिकारी रघुराजनगर, 680 प्रकरण कलेक्टर कोर्ट, 618 प्रकरण न्यायालय तहसीलदार मैहर और 596 प्रकरण न्यायालय नायब तहसीलदार वृत्त रैगांव तहसील रघुराजनगर के यहां लंबित हैं।

डायवर्सन प्रकरणों की स्थिति बेहतर
जिले के राजस्व न्यायालयों में डायवर्सन प्रकरणों के निराकरण की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है। जिले का कुल निराकरण का प्रतिशत 77 है। इसमें तहसीलदार न्यायालय रामपुर बाघेलान और अनुविभागीय अधिकारी न्यायालय अमरपाटन का डायवर्सन निराकरण शत प्रतिशत रहा है। सबसे कमजोर निराकरण अनुविभागीय अधिकारी न्यायालय मझगवां और रामनगर का 45 फीसदी है।

राजस्व वसूली 36 फीसदी
राज्य शासन ने वित्तीय वर्ष 2017-18 के लिए 15 करोड़ की राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया है। इसके एवज में अभी तक 5.40 करोड़ रुपए की वसूली हो सकी है। जो लक्ष्य के विपरीत 36 फीसदी है। शेष लगभग 10 करोड़ की वसूली के लिये अब विभाग के पास दो माह शेष हैं।

2 हजार लोगों को नहीं मिला मुआवजा
जिले में भू-अर्जन की स्थिति बेहतर मानी जा सकती है लेकिन अभी भी जिले में अलग-अलग परियोजनाओं के तहत अर्जित की गई भूमि के मामले में 2080 लोगों को मुआवजा नहीं मिल सका है। इन्हें 820485484 रुपए वितरित करना शेष है। सूत्रों की मानें तो जिले में कुल 8594 लोगों को 4910564955 रुपये मुआवजा दिया जाना था। इसमें से 6501 लोगों को 4090079471 रुपए की राशि का वितरण किया जा चुका है। लंबित प्रकरणों के संबंधों में ज्यादातर मामले न्यायालयों में लंबित है या आपसी सहमति नहीं बन पाने के कारण वितरण नहीं हो पा रहा है।

अविवादित नामांतरण भी नहीं निराकृत कर सके राजस्व न्यायालय
मुख्यमंत्री का सबसे ज्यादा फोकस अविवादित नामांतरण और बंटवारे को लेकर है। उन्होंने यह तक घोषणा की है कि तीन माह से पुराने अविवादित नामांतरण और बंटवारे की जानकारी देता है तो उसे एक लाख रुपए का पुरस्कार दिया जाएगा। लेकिन रिपोर्ट बताती है कि जिले में अविवादित नामांतरण के निराकरण का प्रतिशत 12 फीसदी है।

महज 6 प्रकरण ही निराकृत

1 नवंबर से 21 जनवरी तक दर्ज अविवादित नामांतरण के प्रकरणों की संख्या 51 है। इसमें से महज 6 प्रकरण ही निराकृत हो सके हैं। इसी तरह से अविवादित बंटवारे की स्थिति देखे तो 1 नवंबर से 21 जनवरी तक निराकरण का प्रतिशत 33 है। कुल 9 प्रकरण दर्ज हुए हैं जिनमें से एक का ही निराकरण हो सका है। इसमें नायब तहसीलदार वृत्त बिहरा तहसील कोटर के यहां 3 प्रकरण दर्ज हुए 1 का निराकरण हुआ। तहसीलदार कोटर के यहां 6 प्रकरण दर्ज हुए जिसमें से 1 ही निराकृत हो सका है।

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