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जिस धारा को सुप्रीम कोर्ट ने कर दिया था निरस्त, उसी के तहत MP पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा

मैहर कोतवाली पुलिस ने आपत्तिजनक पोस्ट पर दर्ज किया प्रकरण

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सतना

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Suresh Mishra

Aug 19, 2018

Muslim youth booked under IT Act section 66 A scrapped by SC in Satna

Muslim youth booked under IT Act section 66 A scrapped by SC in Satna

सतना। जिले की मैहर थाना पुलिस ने सोशल मीडिया पर पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के खिलाफ आपत्तिजनक पोस्ट करने पर एक व्यक्ति पर मुकदमा कायम किया है। अपराध में आइटी एक्ट की वह धारा 66 ए भी लगाई है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय निरस्त कर चुका है। कानून के जानकार और वकीलों ने इस पर ऐतराज जताया है।

सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट

पुलिस के अनुसार, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक पोस्ट की जांच के बाद शुक्रवार को पुलिस ने मैहर निवासी बजरंगदल से जुड़े महेश तिवारी पुत्र कौशल प्रसाद तिवारी की रिपोर्ट पर जावेद अंसारी पुत्र रसीद अंसारी निवासी मीराबाई धर्मशाला के पास मैहर के खिलाफ केस दर्ज किया है। इसमें आइटी एक्ट की धारा 66 ए के साथ आइपीसी की धारा 153, 505 (2) के तहत प्रकरण पंजीबद्ध किया है।

अधिकारियों से सलाह लेने के बाद धारा का प्रयोग

इसके बाद आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। वहीं उसके मोबाइल फोन की जांच की जा रही है। कोतवाली मैहर टीआई अशोक पाण्डेय ने पत्रिका से बातचीत में कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों से सलाह लेने के बाद धारा 66 ए आइटी एक्ट का प्रयोग किया गया है। अगर कानूनन कोई दिक्कत आती है तो विधि सलाह लेते हुए प्रकरण से धारा पृथक करते हुए कार्रवाई की जाएगी।

धारा 66 ए पर यह कहा था सुप्रीम कोर्ट ने
सुप्रीम कोर्ट में 24 मार्च 2015 को न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर और न्यायमूर्ति रोहिंगटन एफ नरीमन की खंडपीठ ने कानून की छात्रा श्रेया सिंघल एवं अन्य की जनहित याचिका पर सूचना प्रौद्योगिकी (आइटी) कानून की धारा 66 ए को असंवैधानिक करार देते हुए इसे निरस्त कर दिया। इस धारा के तहत पुलिस को यह अधिकार दिया गया था कि वह सोशल साइट्स पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी करने वाले को गिरफ्तार कर सकती है। इस धारा के तहत अधिकतम तीन साल की सजा के प्रावधान थे।

अभिव्यक्ति की आजादी का हनन

न्यायमूर्ति नरीमन ने फैसले में कहा था कि धारा 66 ए असंवैधानिक है और इससे संविधान के अनुच्छेद 19(1) में प्रदत्त अभिव्यक्ति की आजादी का हनन होता है। आम आदमी के जानने के अधिकार का भी उल्लंघन होता है। इस धारा के प्रावधानों को संदिग्ध करार देते हुए कहा था कि जो बातें एक व्यक्ति के लिए अपमानजनक हो सकती हैं, संभव है।

पुलिस इसका दुरुपयोग नहीं करेगी

ये बातें दूसरे के लिए अपमानजनक न हो। न्यायालय ने यह भी कहा कि वह केंद्र सरकार के इस आश्वासन से आश्वस्त नहीं हो सकता कि पुलिस इसका दुरुपयोग नहीं करेगी। धारा 66ए संविधान के अनुच्छेद 19 (2) के दायरे से बाहर है और यह समग्र रूप से निरस्त करने लायक है।

धारा 66 ए को सुप्रीम कोर्ट ने असंवैधानिक घोषित कर दिया है। यह जानते हुए भी इस धारा में कोई केस दर्ज करना कानूनन गलत है।
मो. एहतेशाम आमिर, अधिवक्ता

अगर एफआइआर में गलत धारा लगा दी गई है तो विवेचना के दौरान इसमें सुधार करेंगे।
संतोष कुमार गौर, एसपी, सतना