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Nag Panchami-2018: इस वर्ष बन रहे तीन योग, नाग देवता की पूजा कर इन शक्तियों पर पाएं विजय

विशेष संयोग: नागपंचमी 15 अगस्त को, घर-घर दीवारों पर भित्ती चित्र बनाकर की जाएगी नागपूजा, शुभ योग के साथ स्वतंत्रता दिवस के दिन मनेगी नागपंचमी
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सतना

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Suresh Mishra

•

Updated: 3 Aug 2018, 4:35 PM IST

nag panchami-2018: pooja muhurat date and time

nag panchami-2018: pooja muhurat date and time

सतना। नागपंचमी का पर्व इस बार कई शुभ योगों के साथ आजादी के पर्व अर्थात स्वतंत्रता दिवस के दिन 15 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन सुबह कुछ पलों के लिए चतुर्थी तिथि रहेगी। उसके बाद पंचमी आएगी, लेकिन शहर के पंडितों का कहना है कि तिथि के लिहाज से इसी दिन नागपंचमी का पर्व मनाया जाएगा। मंदिरों में भी नागपंचमी का पर्व 15 अगस्त को ही मनाया जाएगा। इस बार चतुर्थी और पंचमी तिथि 15 अगस्त को सुबह कुछ समय साथ रहेगी।

पं. मोहनलाल द्विवेदी ने बताया कि श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी के रूप में मनाया जाता है। चतुर्थी तिथि सुबह 7 बजकर 16 मिनट तक रहेगी, इसके बाद पंचमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। हिन्दू धर्म में नाग पंचमी का खास महत्व है और इस दिन देश के कई राज्यों में सर्प पूजन होती है। इस दिन 12 सर्प स्वरूपों की पूजा की जाती है और दूध चढ़ाया जाता है। ऐसा मानना जाता है कि नागराज को प्रसन्न करने से भोलेनाथ भगवान शंकर भी प्रसन्न हो जाते हैं और अपनी कृपा बरसाते हैं।

कई शुभ योग रहेंगे विद्यमान
पं. द्विवेदी के अनुसार नागपंचमी के दिन इस बार कई शुभ योग विद्यमान रहेंगे। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग के साथ आनंद योग भी विद्यमान रहेगा। नागपंचमी के दिन नाग देवता की पूजा का विशेष विधान है। पूरे साल में यह दिन नागदोष, कालसर्प दोष के निवारण के लिए भी विशेष फलदायी माना गया है।

शेषनाग की उत्पत्ति का दिन है नागपंचमी
पंडितों के अनुसार यह दिन भगवान वासुकी अर्थात शेषनाग की उत्पत्ति का दिन माना जाता है। इस दिन शेषनाग के प्रतीक स्वरूप नागपूजा का विशेष महत्व है। संतान की आयुष्य और आरोग्य, अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति के लिए भगवान शेषनाग का पूजन किया जाता है। नागपंचमी मनाने का परम्परा प्राचीन समय से चली आ रही है।

मध्याह्न व्यापिनी पर्व है नागपंचमी
पं. द्विवेदी के अनुसार इस दिन कुछ समय चतुर्थी तिथि रहेगी। उसके बाद पंचमी लगेगी, लेकिन नागपंचमी उदयाकालिक नहीं बल्कि मध्याह्न व्यापिनी पर्व है। दोपहर में ही पूजा होती है।