
National Rescue Day Special
सतना. घर में पूरे सदस्य होते हुए भी शहर के लोग अपने घरों में हर ब्रीड के डॉग रखना पसंद कर रहे हैं। क्योंकि उनका मानना है कि ये वे पेट्स हैं जो बिन बोले ही प्रेम की भाषा सिखाते हैं। घर का दूसरा सदस्य एक बार आपको धोका दे जाए पर यह जब तक घर में रहते हैं पूरी वफादारी के साथ घर वालों के साथ रहते हैं। कुछ घरों में इन पेट्स को फैमिली मेंबर बना कर रखा गया है। उनके खाने से लेकर सोने तक की व्यवस्था भी स्पेशल होती है। नेशनल रेस्क्यू डे है जिसमें हम शहर के एेसे परिवार से मिलवाने जा रहे हैं जो वर्षो से डॉग लवर है और उनके साथ फैमिलियर हैं।
बेटी को लेने और छोडने जात है डॉगी
चाणक्यपुरी निवासी संध्या और मनोज शर्मा ने बताया कि उनके यहां सन् 1986 से हर ब्रीड के डॉग पाले जा रहे हैं। लगभग १५ नस्ल के डाग के साथ इनका परिवार रह चुका है। वर्तमान में इनके घर में लेब्राडोर डॉग है, जिसके साथ पूरा दिन इनका परिवार समय गुजारता है। मनोज ने बताया कि उनका डॉग एक दम शिष्ट और ट्रेंड डॉग है। वह टाइम का बहुत पक्का है। सुबह सभी को उठाना, अखबार लाना, हम सबके के साथ नाश्ता करना और बेटी को बस तक छोड़ कर आना फिर बस का चक्कर कांटना और शाम को बस तक लेने भी जाता है। हम उसे अपने घर के सदस्य की तरह ही पालते हैं। हर तीन माह में चेकअप कराना। उसको इंजेक्शन लगवाना। खान पान का ध्यान रखना ये सब घर की हर सदस्य की जिम्मेदारी है। वह किसी को नुकसान नहीं पहुंचाता है और बाहरी लोगों को किसी भी कीमत में अंदर नहीं आने देता। उसके बिना सबकुछ अधूरा है।
घर आने के पहले ही मिल जाती है आहट
प्रधान आरक्षक राजेंद्र बागरी भी पेट्स लवर हैं । उन्होंने भी अपने यहां लेब्राडोर डॉग रखा हुआ है। उन्होंने बताया वह घर के हर सदस्य का ख्याल रखता है। सभी को प्यार करता है और सभी को सुरक्षित रखता है। जब तक वह घर में होता है मैं निश्चिंत होकर काम करता हंू। क्योंकि वह घर और परिवार का ध्यान रखता है। इतना चौकन्ना कि जरा सी आहट हुई कि भोकना शुरू। मेरा उससे एेसा जुड़ाव है कि उसे मेरे आने तक का अहसास कुछ मिनट पहले हो जाता है। मैं कॉलोनी के अंदर प्रवेश करता हंू और वह गेट पर आ जाता है। जैसे ही घर के अंदर आता हंू वह मुझसे चिपक कर उछल उछल प्यार करता है। वह नराजगी और खुशी का इजहार भी करता है। हर वक्त हम सब उसका ख्याल रखते हैं क्योंकि वह हमारे घर का सबसे प्यारा सदस्य बन चुका है।
कैप्टन है तो किस बात का डर
मझगवां निवासी पूर्णिमा छोंगड़े कहती हैं कि उनके हसबैंड पुलिस विभाग में हैं। सब इंस्पेक्टर होने के नाते वह हमेशा ही ड्यूट्री पर तैनात रहते हैं। एेसे में उनका पालतू डॉग जिसका नाम कैप्टन है, वह हर वक्त उनके साथ रहता है। उनका कहना है कि जब से कैप्टन उनके साथ रहने लगा है उन्हें घर में अकेले रहने पर डर नहीं लगता। वो हर वक्त गार्ड की तरह तैनात रहता है। मेरे फ्री होने के बाद वह मेरे साथ खेलता है। हम दोनों सुबह शाम वॉक पर जाते हैं। पूरी घर की निगरानी रखता है। सबसे बड़ी बात सभी से प्रेम करता है।
बचपन से डॉग से है दोस्ती
शहर के संजय सिंह चौहान कहना है कि उनका जीवन ही डिफरेंट ब्रीड के डॉग के साथ बीता। पिता जी को घर में डॉग रखने का शौक रहा। जब मैं आठ या नौ साल का था तभी से डॉग और मेरी दोस्ती होगई। मेरे यहां जर्मन शेफर्ड और लेब्राडोर डॉग है। दोनो ही स्पेशल है। हम सभी एक दूसरे से फैमिलियर है। एक दूसरे का ध्यान रखते हैं। हम जो बोलते हैं ये दोनों करते हैं। इतने समझदार कि किसी भी बात को दोबारा समझाना नहीं पड़ता। एक्टिव रहते हैं। घर की रखवाली के साथ घर की सदस्यों की केयर भी करते हैं। इसलिए हम सब भी इनका ध्यान देते हैं। हम जहां भी जाते हैं ये हमारे साथ जाते हैं।
Published on:
22 May 2019 09:54 pm
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