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LAW की पढ़ाई से वंचित रह जाएंगे मप्र के सैकड़ों छात्र, BCI से संबद्धता ने अटकाए एडमिशन

विधि काॅलेज में इस शिक्षण सत्र में भी नहीं मिल पाया छात्रों को प्रवेश, दूसरे काॅलेजों में भटक रहे, सितंबर में बीसीआइ के निरीक्षण की संभावना, अगले सत्र से मिल सकता है प्रवेश  
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सतना

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Sonelal Kushwaha

•

Updated: 22 Jul 2023, 3:14 AM IST

No admission in BA LLB due to non-affiliation of Bar Council of India

No admission in BA LLB due to non-affiliation of Bar Council of India

रीवा। हायर सेकंडरी की परीक्षा पास कर सीधे बीए एलएलबी में प्रवेश की इच्छा रखने वाले छात्रों को इस वर्ष भी झटका लगा है। शहर के शासकीय विधि महाविद्यालय में इस वर्ष भी बीए एलएलबी में प्रवेश नहीं हो पाया है। इसकी वजह यह है कि काॅलेज को बार काउंसिल आफ इंडिया की ओर से पाठ्यक्रम संचालित करने की संबद्धता नहीं मिल पाई है। बीए एलएलबी के प्रति छात्रों के बढ़ते रुझान के बीच लगातार काॅलेज में संपर्क करने के लिए छात्र पहुंच रहे हैं। इसके पहले भी प्रयास किया गया था लेकिन संबद्धता नहीं मिल पाई है। अब एक बार फिर से काॅलेज प्रबंधन तैयारियों में जुटा है। माना जा रहा कि बार काॅउंसिल आफ इंडिया की टीम संबद्धता देने से पहले काॅलेज का निरीक्षण करेगी और यहां पर संसाधनों का परीक्षण होगा। इसके बाद ही निर्णय हो पाएगा।

टीआरएस काॅलेज में विधि संकाय

टीआरएस काॅलेज में पहले विधि का एक अलग संकाय था। उसी में एलएलबी और एलएलएम आदि के कोर्स कराए जाते रहे हैं। बार काउंसिल आफ इंडिया के निर्देशों के चलते ही विधि का नया काॅलेज स्थापित किया गया। पहले भवन नहीं था तो टीआरएस काॅलेज के ही पुराने भवन में कई वर्षों तक संचालन होता रहा है। अब विधि काॅलेज का अपना नया भवन बन चुका है। उसमें कक्षाएं संचालित हो रही हैं। अन्य सरकारी काॅलेजों में जहां पर विधि को संकाय के रूप में संचालित किया जाता रहा है, इन्हें भी बार काउंसिल की ओर से कहा गया है कि वह निर्धारित शर्तों के अनुसार संबद्धता के लिए आवेदन करें।

विश्वविद्यालय में संचालित है कोर्स

बीए एलएलबी का कोर्स केवल विश्वविद्यालय में संचालित हो रहा है। वहां पर बीते कुछ वर्षों के अंतराल में छात्रों की संख्या तेजी से बढ़ी है। यहां पर भी कम प्रतिशत प्राप्त करने वाले छात्रों का एडमिशन नहीं हो पा रहा है। छात्रों की बढ़ती मांग के चलते ही विधि महाविद्यालय द्वारा बीए एलएलबी का कोर्स प्रारंभ करने की तैयारी तेज कर दी गई है। भवन के साथ ही अन्य संसाधन भी बढ़ाए गए हैं, जिसकी वजह से माना जा रहा है कि अगले शिक्षण सत्र से इसकी शुरुआत हो जाएगी।

संभाग का अकेला सरकारी काॅलेज

विधि महाविद्यालय रीवा विधि की पढ़ाई कराने वाला रीवा में संभाग का अकेला काॅलेज है। सीधी के काॅलेज में कई वर्षों तक एलएलबी का पाठ्यक्रम संचालित हुआ लेकिन बार काउंसिल आफ इंडिया की आपत्तियों की वजह से यहां पर कोर्स बंद हो गया। इसकी वजह से रीवा के विधि महाविद्यालय में प्रवेश के लिए छात्रों का दबाव अधिक होता है।

शहडोल संभाग में स्थितियां

सिंगरौली में भी विधि की पढ़ाई के लिए कोई इंतजाम नहीं हैं। सतना में भी सरकारी काॅलेज विधि का नहीं है। इसी तरह शहडोल संभाग में स्थितियां हैं, वहां भी सरकारी काॅलेजों में प्रवेश नहीं हो रहा है। कुछ प्राइवेट कालेजों में पाठ्यक्रम शुरू हुए हैं लेकिन वहां पर छात्रों को अधिक शुल्क देना पड़ता है। रीवा जिले में त्योंथर और मऊगंज कालेज में संकाय के रूप में विधि की पढ़ाई हो रही है। जिस तरह से बार काउंसिल के नियम सख्त हैं तो वहां भी आने वाले समय में इसके लिए अलग व्यवस्था बनानी होगी।

प्रक्रिया चल रही है

विधि के पाठ्यक्रमों की संबद्धता बार काउंसिल आफ इंडिया द्वारा जारी की जाती है। इसके लिए शर्तें निर्धारित हैं। रीवा के विधि महाविद्यालय में बीए एलएलबी की सबद्धता के लिए प्रक्रिया चल रही है। जल्द ही टीम मापदंडों का मूल्यांकन करेगी और संबद्धता पर निर्णय होगा।डॉ. प्रभात पांडेय, ओएसडी उच्च शिक्षा

बीसीआइ में भी आवेदन किया है

विश्वविद्यालय से बीए एलएलबी की संबद्धता प्राप्त हो चुकी है। बीसीआइ में भी आवेदन किया जा चुका है। उम्मीद है कि जल्द ही निरीक्षण के लिए टीम आएगी। हमारा प्रयास है कि इसी सत्र के लिए प्रवेश दिया जाए, इसके लिए अनुरोध किया है कि समय पर निरीक्षण हो ताकि छात्रों को प्रवेश मिल सके।

डॉ. योगेन्द्र तिवारी, प्राचार्य विधि महाविद्यालय रीवा