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सोशल मीडिया में कतई न डालें ऐसे संदेश, नहीं तो जाना पड़ सकता है जेल

भारत बंद के दौरान हुई ङ्क्षहसा से मप्र सरकार चौकन्नी है। गृह विभाग ने एडवाइजरी जारी कार्रवाई की चेतावनी दी है

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No send message in social media, otherwise it may have to go to jail

सतना. भारत बंद के दौरान 2 अप्रैल को हुई हिंसा को लेकर मप्र सरकार चौकन्नी हो गई है। गृह विभाग ने एडवाइजरी जारी कर सभी जिलों की पुलिस और प्रशासन को सतर्क कर दिया है। सोशल मीडिया यूजरों, सामाजिक व राजनीतिक संगठनों के साथ-साथ कर्मचारी संगठनों पर सख्त नजर रखने को कहा है। साथ ही चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया में भ्रामक व भड़काऊ संदेश डालने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर जेल भेजें। बताया कि कुछ संगठन १० अप्रैल को पुन: भारत बंद की तैयारी में हैं। सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। ऐसे में दोबारा अप्रिय हालात न बनें, इसके लिए पुख्ता इंतजाम करें।

पुन: भारत बंद की आशंका
गृह सचिव केदार शर्मा ने जारी पत्र में बताया कि १० अप्रैल को पुन: भारत बंद की आशंका है। कुछ संगठनों द्वारा १४ अप्रैल तक एट्रोसिटी एक्ट को यथास्थिति लाने की चेतावनी दी गई है। १५ अप्रैल को नगरीय निकायों की आवश्यक सेवाओं को बाधित करने के भी प्रयास हो सकते हैं। कुछ संगठन आरक्षण हटाओ रैली करने की तैयारी में है। ऐसी स्थिति में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला और पुलिस प्रशासन को आवश्यक कदम उठाने होंगे।

अधिकारी-कर्मचारियों की ली क्लास
बुधवार को कलेक्टर मुकेश शुक्ला ने सभी अधिकारी-कर्मचारी संगठनों की बैठक बुलाई। कहा, अधिकारी-कर्मचारी संविधान के प्रति अटूट निष्ठा रखते हैं। अनुशासित व कर्तव्य परायण रहते हुए आदर्श आचरण संहिता का पालन करें। समाज में समरसता, सद्भाव और सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाए रखना उनका कर्तव्य है। इसलिए किसी भी ऐसे आंदोलन या प्रदर्शन का हिस्सा नहीं बनें, जिससे संवैधानिक मर्यादा का उल्लंघन हो और कानून-व्यवस्था बिगड़े।

सोशल मीडिया पर रखें नजर
२ अप्रैल के भारत बंद में सोशल मीडिया की अहम भूमिका सामने आने के बाद जारी एडवाइजरी में कहा गया कि सोशल मीडिया पर लगातार नजर रखी जाए। यदि कोई भ्रामक समाचार तथ्य आता है तो उसका तत्काल खंडन करें और भड़काऊ आपत्तिजनक पोस्ट पर वैधानिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

निरंतर संवाद करें
प्रशासन को कहा गया, प्रदर्शनकारी संगठनों और समूहों से निरंतर संवाद स्थापित करें। शासकीय कर्मचारी संगठनों, सामाजिक पदाधिकारियों और मीडिया से भी संवाद स्थापित रखें। समाज के सभी वर्गों को विश्वास दिलाया जाए कि संवैधानिक व्यवस्था को भली भांति लागू किया जाएगा। शांति समिति की बैठकें भी आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

अराजक तत्व चिह्नित
गृह विभाग ने कहा, वर्ग संघर्ष भड़काने वालों को चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाए। जुलूस की अनुमति पुलिस अधिकारियों से विचार-विमर्श करने के बाद ही दी जाए। अनुमति की शर्तों का सख्ती से पालन कराया जाए। धार्मिक स्थलों और महापुरुषों की प्रतिमाओं की सुरक्षा की व्यवस्था करने कहा गया है।