
Oil adulteration game: Spending 20 thousand liters of adulterated oil
सतना/ सरसों एक दाना नहीं और सरसों का तेल तैयार..., चौंकिए नहीं। यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि मिलावटखोरों की करतूत है। मुनाफे की लालच में सेहत के सौदागर सरसों तेल के नाम पर सस्ता पॉम ऑयल बेच रहे हैं। प्रतिबंधित सिंथेटिक कलर मिलाकर इसे सरसों के तेल का रंग दिया जाता है। गंध के लिए एसेंस मिला देते हैं। यह खुलासा किसी लैब में नहीं, मौसम ने किया है। कड़ाके की ठंड शुरू होते ही उपभोक्ताओं के घरों में उपयोग हो रहा सरसों तेल जमने लगा है।
यह देख उपभोक्ता मिलावटी सरसों तेल बेचने की शिकायत दुकानदारों से कर रहे हैं। यदि आप भी किराना दुकान में 80 से 85 रुपए में मिलने वाला शुद्ध कच्ची घानी वाला ब्रांडेड सरसों तेल खरीद कर खा रहे हैं तो समझ लीजिए कि आप अपने और परिवार की सेहत के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। कारण, शहर में ब्रांडेड तेल कंनियों का स्टीकर लगाकर बाजार में खुलेआम सरसों के नाम पर मिलावटी तेल बेचा जा रहा है।
मुनाफे का गणित
पॉम ऑयल 40 से 50 रुपए लीटर है। सरसों तेल 100 से 120 रुपए लीटर। मुनाफा बहुत है। इसी लालच में मिलावटखोर लोगों की सेहत से खेल रहे हैं। तेल कारोबार से जुड़े जानकारों का दावा है कि इस समय शहर सहित जिले की किराना दुकानों में ब्रांडेड तेल कंपनियों के नाम से बेचा जा रहा 90 फीसदी तेल मिलावटी है।
ऐसे समझिए मिलावट का खेल
शहर के तेल कारोबारी बाहर से टैंकर में सस्ता पॉम ऑयल राइस ब्रान (चावल की भूसी का तेल) व मलेशिया से आयात होने वाला वेस्टेज खाद्य तेल मंगाते हैं। मिलों के अंदर सुगंध रहित इस खाद्य तेल को पीला रंग देने के लिए इसमें कैमिकल मिलाया जाता है। इसके बाद सरसों तेल जैसी सुगंध लाने के लिए 10 से 20 फीसदी सरसों तेल मिला दिया जाता है। फिर फैक्ट्री में तैयार इस मिलावटी तेल को 5, 10, 15 लीटर के जार एवं एक लीटर की बोतल में पैक कर देते हैं। पैकिंग के बाद जार में नामी गिरामी ब्रांडेड तेल कंपनियों का स्टीकर लगाकर इसे बाजार में उतार दिया जाता है।
मिलावट की पहचान बहुत आसान
सरसों तेल की बोतल को फ्रीज में रखें। यदि तेल जमने लगे या उसमें सफेद दाग बनने लगे तो तेल 100 फीसदी मिलावटी है। हाथ साफ कर तेल की मालिश करें, यदि वह त्वचा पर रंग छोड़ता है तो समझो मिलावटी है। तेल से बने व्यंजन खाने से यदि एसीडिटी ज्यादा होती है तो इसमें रसायन की मिलावट है।
सवाल खाद्य औषधि विभाग की सैम्पलिंग पर
बीते छह माह से पूरे प्रदेश में मिलावट के खिलाफ कार्रवाई हो रही है। जिले में भी खाद्य औषधि विभाग के अधिकारी गांव-गांव जाकर पर्चून की दुकानों से सैम्पल ले रहे हैं लेकिन प्रशासन की नाक के नीचे शहर की हर किराना दुकान में धड़ल्ले से बिक रहे मिलावटी सरसों तेल के सेम्पल नहीं लिए गए। विभाग के अधिकारियों का कहना है कि सरसों तेल के जो सेम्पल लिए थे, वे जांच में सही पाए गए हैं।
एक्सपर्ट बोले-लीवर डैमेज का खतरा
मिलावटी सरसों तेल के सेवन से फूड प्वॉइजनिंग, आंतों का इंफेक्शन तथा पेट संबंधी गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। मिलावटी तेल शरीर के सभी अंगों पर प्रभाव डालता है। लंबे समय तक इसका प्रयोग करने से लीवर डैमेज होने का खतरा बढ़ जाता है। बच्चों का मानसिक और शारीरिक विकास रुक जाता है। वर्तमान में जिले में पेट संबंधी बीमारी के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। मिलावटी तेल से बनी सामग्री खाने से पेट में एसीडिटी बनना एक बड़ा कारण है।
डॉ. मनोज शुक्ला, सीनियर मेडिकल ऑफिसर सतना
हकीकत
- जिले में सरसों तेल की खपत
- 20,000 लीटर प्रतिदिन
- 6,00,00 लीटर प्रति माह
- 72,00,000 लीटर प्रति वर्ष
- 90 फीसदी तेल मिलावटी
- 64.80 लाख लीटर मिलावटी तेल की खपत प्रति वर्ष
Published on:
22 Dec 2019 05:02 pm
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