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लॉकडाउन से बेरोजगार हुए आर्केस्ट्रा कलाकार सब्जी बेचने को मजबूर

रोजी रोटी का संकट, प्रशासन से नहीं मिली मदद

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Organizing Orchestra Program at Katni on Holi

आर्केस्ट्रा प्रोग्राम में प्रस्तुति देते कलाकार।

सतना. आर्केस्ट्रा कलाकारों के सामने अब रोजी रोटी का संकट है। सरकार के लॉकडाउन के फैसले ने इनकी कमर तोड़कर रख दी है। विशेष अवसरों पर गा-बजाकर लोगों का मन बहलाने वाले यह कलाकार अब अंदर ही अंदर खून के आंसू रो रहे हैं। जिन कलाकारों के लिए आर्केस्ट्रा ही जीविका का एकमात्र साधन है, उनकी मानें तो सरकार ने उनके लिए अब तक अलग से कोई इंतजाम नहीं किए हैं। न ही समाजसेवी संस्थाओं की ओर से कोई मदद मुहैया कराई गई है। किसी ने सुध तक नहीं ली कि इन गरीब कलाकारों का पेट अब कैसे भर रहा है?

लॉकडाउन में निकला सीजन
गौरतलब है कि कोरोना संक्रमण को नियंत्रितकरने के लिए सरकार ने लॉकडाउन का निर्णय लिया था। इस दौरान सरकार की ओर से कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए। जिसके चलते शादी-विवाह सहित अन्य मांगलिक कार्यक्रम लगातार टलते गए। इसके कारण आर्केस्ट्रा कलाकारों के सामने रोजगार का संकट आ गया। शादी समारोह ना होने के कारण कलाकारों को भी काम नहीं मिला। काम नहीं किया तो दाम भी नहीं मिला। कलाकारों के सामने भूख एक बड़ी समस्या बन कर खड़ी हो गई। अब इन कलाकारों को सरकार से मदद की दरकार है।

जमा नहीं कर पाए पूंजी
यहां आर्केस्ट्रा कलाकारों के सात से आठ ग्रुप हैं। प्रत्येक ग्रुप में २५ से ३० लोग शामिल हैं। इनमें गायक, नृत्यांगना और वादक सहित अन्य सहयोगी हैं, जो मिलकर किसी एक जगह कार्यक्रम की प्रस्तुति देकर बमुश्किल एक बार में 1000 से 1200 तक मेहनताना पाते हैं। स्थाई तौर पर काम मिलता नहीं है लिहाजा इतने कम पैसों में घर चलाना पहले ही मुश्किल हो रहा था और अब लाक डाउन ने समस्या को और बढ़ा कर रख दिया है।

पेट की आग बुझाने में यह इतना व्यस्त रहे कि अपने घर की ओर भी कभी ठीक से ध्यान नहीं दिया। नतीजा यह रहा कि मुफ्त या सस्ता राशन पाने के लिए राशन कार्ड तक बनवा पाए। जैसे तैसे जो गुजारा हो रहा था वह भी बंद हो चुका है और कहीं से कोई मदद भी नहीं मिल रही है।
- मोनू सिंह, वादक एवं मंच संचालक

जो कमाया वो खर्च होता रहा। पूंजी जमा करने के बारे में कभी सोचा ही नहीं। मंचीय कलाकारों की एक यूनियन होनी चाहिए ताकि भविष्य सुरक्षित हो सके। अभी तो किसी तरह सब्जी बेचकर अपने परिवार का पेट पाल रहे हैं।
- विकास सोंधिया, ऑक्टापैड वादक

अभी तक तो घर चल रहा है। जब पैसा खत्म हो जाएगा तो मजदूरी करना ही पड़ेगा। तभी घर के खर्च चल सकेंगे। लॉक डाउन के बाद अब बरसात में भी नहीं काम की उम्मीद नहीं है।
सत्येंद्र चौधरी, ड्रम वादक