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सतना

Satna में भूख-प्यास और हादसों में 5000 से अधिक पशुओं की मौत

बनती रहीं गौशालाएं, सड़क व बाड़ों में दम तोड़ते रहे आवारा पशु

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सतना. प्रदेश सरकार द्वारा जिले में 45 गौशालाएं बनाने की घोषणा से जिले के किसानों ने उम्मीद लगाई थी कि अब उन्हें आवारा पशुओं से राहत मिलेगी लेकिन एक साल बीतने के बाद भी न आवारा पशुओं से खेती सुरक्षित हुई और न गौवंश संरक्षित हो सका। जिला प्रशासन ने एक साल गौशालाओं के लिए जमीन तलाशने एवं उनका रंगरोगन करने में गुजार दिए। गौशालाओं का शुभारंभ न होने के कारण ग्रामीणों द्वारा खेती बचाने के लिए बनाए गए अवैध बाड़ों मंे कैद जानवर भूख-प्यास से दम तोड़ते रहे।
पंचायतों से मिली जानकारी के अनुसार, बीते एक साल में जिले में आवारा घूम रहे पांच हजार से अधिक पशुओं की मौत हो चुकी है। इनमें से अधिकांश पशुओं की मौत भूख-प्यास एवं ठंड के कारण हुई है। गौवंश की रक्षा में जुटे लोगों का दावा है कि यदि एक साल में कितने पशु मरे? इसकी जांच कराई जाए तो आंकड़ा और बढ़ सकता है।
बीते दो माह में सर्वाधिक मौत

जिले में बाड़ों एवं गौशालाओं में कैद पशुओं की सबसे अधिक मौत बीते दो माह में हुई है। सूत्रों का कहना है कि गौशालाओं में चारा-पानी एवं ठंड से बचने के उचित प्रबंध न होने के कारण दो माह में सैकड़ों गौवंश दम तोड़ चुका है। गांवों में बने अवैध बाड़ों में मरने वाले पशुओं की तस्वीरें विचलित करने वाली हैं। बीते एक साल में अकेले सड़क हादसों में एक हजार से अधिक पशु दम तोड़ चुके हैं।

अनुदान तक सिमटी जिम्मेदारी
गौवंश को संरक्षित करने एवं किसानों की खेती बचाने सरकार तथा प्रशासन की जिम्मेदारी जिले में गौशालाओं को अनुदान बाटने एवं जमीन तलाशने तक सीमित रही। प्रशासन द्वारा आवारा पशुओं की धरपकड़ एवं रोकथाम के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए।
सिर्फ सत्ता बदली, व्यवस्था नहीं

विंध्य में पशुओं के साथ की जा रही कू्ररता और भूख प्यास से तड़प रहे मवेशियों के संरक्षण की मांग करते हुए भारतीय किसान यूनियन ने सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं। यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश सिंह ने विंध्य में गौवंश के संरक्षण एवं कार्यालयों में व्याप्त भ्रष्टाचार पर प्रशासन को घेराते हुए कहा कि प्रदेश में सिर्फ सत्ता बदली है हालात और व्यवस्था नहीं।