
panchak start 8 may 2018 avoid these work during panchak
सतना। पंचांग के अनुसार मंगलवार की रात 9 बजे से पंचक काल प्रारंभ हो गया, जो १3 मई को दोपहर 1 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। शास्त्रों में पंचक में किसी भी शुभ कार्य को करने की सख्त मनाही है, ऐसा इसलिए क्योंकि अगर इस काल में आपने कोई नया कार्य शुरू किया, तो उसका फल प्राप्त नहीं होता है। इस बार पंचक मंगलवार को शुरू होने के कारण इन्हें अग्नि पंचक कहा जा रहा है। इन पांच दिनों में अग्नि से भय बना रहता है। मंगलवार से शुरू पंचक के दौरान आग लगने का भय रहता है, इसकी वजह से पंचक को शुभ नहीं कहा जा सकता।
इस दौरान औजारों की खरीदारी, निर्माण या मशीनरी का कार्य नहीं करना चाहिए। हां, इस दौरान कोर्ट-कचहरी से जुड़े मामलों और अधिकार हासिल करने जैसे मामलों की पहल की जा सकती है, क्योंकि उनमें सफलता मिलने की संभावना होती है। पंचक वर्ष में कई बार आता है। इसलिए सामान्य जन को यह अवश्य ध्यान रखना चाहिए कि कोई भी जरूरी कार्य इन पांच दिनों में संपन्न न किया जाए तो ही बेहतर है। इसके लिए आप किसी विशेषज्ञ की सलाह ले सकते हैं।
पंचक में यदि हो मृत्यु
शास्त्रों में कहा गया है कि धनिष्ठा से रेवती तक इन पांच नक्षत्रों की युति यानी गठजोड़ अशुभ होता है। पंचक में अगर किसी की मृत्यु हो गई है तो उसके अंतिम संस्कार ठीक ढंग से न किया गया तो पंचक दोष लग सकते है। गरुण पुराण के अनुसार, पंचक के दौरान शव का अंतिम संस्कार करते समय किसी योग्य जानकार से पूछकर आटे या कुश के पांच पुतलों को भी अर्थी पर रखकर पूरे विधान के साथ अंतिम संस्कार करने से पंचक के दोष से मुक्ति मिलती है।
अंतिम पांच नक्षत्र
27 नक्षत्रों में अंतिम पांच नक्षत्र धनिष्ठा, शतभिषा, पूर्वाभाद्रपद, उत्तराभाद्रपद और रेवती नक्षत्रों को पंचक कहा जाता है। मुहूर्त चिंतामणि में उल्लेख है कि इन नक्षत्रों की युति में किसी की मृत्यु होने पर परिवार के अन्य सदस्यों को मृत्यु या मृत्यु तुल्य कष्ट का भय बना रहता है। इसलिए पंचक में दाह-संस्कार करते समय बहुत-सी सावधानियों का पालन करना होता है। शास्त्रों में पंचक के समय दक्षिण दिशा की यात्रा करना और लकड़ी का सामान खरीदना वर्जित बताया गया है।
1. रोग पंचक:
अगर पंचक का प्रारंभ रविवार से हो रहा होता है तो यह रोग पंचक कहा जाता है। इसके प्रभाव में आकर व्यक्ति शारीरिक और मानसिक परेशानियों का सामना करता है। इस दौरान किसी भी प्रकार का शुभ कार्य निषेध माना गया है।
2.अग्नि पंचक:
पंचक मंगलवार को शुरू होने के कारण इन्हें अग्नि पंचक कहा जा रहा है। इन पांच दिनों में अग्नि से भय बना रहता है। मंगलवार से शुरू हुए पंचक के दौरान आग लगने का भय रहता है, जिसकी वजह से इस पंचक को शुभ नहीं कहा जा सकता।
3. बुधवार या वृहस्पतिवार:
अगर पंचक बुधवार या वृहस्पतिवार से प्रारंभ हो रहे हैं, तो उन्हें ज्यादा अशुभ नहीं कहा जाता। पंचक के मुख्य निषेध कर्मों को छोड़कर कोई भी कार्य किया जा सकता है।
4. चोर पंचक:
ज्योतिषशास्त्रियों के अनुसार शुक्रवार से शुरू हुए पंचक को चोर पंचक कहा जाता है। इस दौरान यात्रा नहीं करनी चाहिए। इसके अलावा धन से जुड़ा कोई कार्य भी पूर्णत: निषेध ही माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान धन की हानि होने की संभावनाएं प्रबल रहती हैं।
5. मृत्यु पंचक:
शनिवार से शुरू हुआ पंचक सबसे ज्यादा घातक होता है, क्योंकि इसे मृत्यु पंचक कहा जाता है। अगर इस दिन किसी कार्य की शुरुआत की गई, तो व्यक्ति को मृत्यु तुल्य परेशानियों से गुजरना पड़ता है। पंचक के दौरान जोखिम भरा कार्य नहीं करना चाहिए।
6. राज पंचक:
सोमवार से शुरू हुआ पंचक राज पंचक होता है, यह पंचक काफी शुभ माना गया है। ऐसी मान्यता है कि इस दौरान सरकारी कार्यों में सफलता हासिल होती है और बिना किसी बाधा के संपत्ति से जुड़े मामले हल होते हैं।
Published on:
09 May 2018 06:52 pm
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